Gift Deed for Property Transfer: भारतीय संस्कृति में उपहार (Gift Culture) का लेन-देन लगा ही रहता है। गिफ्ट से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अंग गिफ्ट डीड ( Gift Deed ) या उपहार दस्तावेज है। गिफ्ट डीड सिर्फ तभी कानूनी रूप से वैध हो सकता है, जब इसे स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) और रजिस्ट्रेशन फी (Registration Fee) भुगतान करके नियमानुसार पंजीकृत किया गया हो। संपत्ति के आदान-प्रदान से संबंधित अधिकतर कार्यों की तरह, इसको कानूनन अनिवार्य बनाने के लिए गिफ्ट डीड पंजीकरण शुल्क भी लागू होता है। इस पर कुछ राज्य संपत्ति की लागत का 1% गिफ्ट डीड पंजीकरण शुल्क के रूप में लेते हैं और कुछ राज्य एक मानक शुल्क लेते हैं।
ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट यानी की संपत्ति हस्तांतरण कानून के तहत घर को गिफ्ट तौर पर देने के लिए एक नियमानुसार रजिस्टर्ड डॉक्युमेंट तैयार कराना पड़ता है। इस पर उस शख्स के दस्तखत होते हैं, जो प्रॉपर्टी गिफ्ट में दे रहा है। इसके अलावा दस्तावेज में दो गवाहों का भी हस्ताक्षर कराना पड़ता है। इसका मतलब यह है कि कोई व्यक्ति ऐसे ही किसी प्रॉपर्टी को उपहार में देने का फैसला नहीं कर सकता है। इसके लिए उसे पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा, जैसा कि सेल डीड के मामले में होता है। आइये जानते हैं गिफ्ट डीड पर कितनी लगती है स्टांप ड्यूटी
1. राज्य के आधार पर अलग-अलग शुल्क
भारत के हर राज्य में स्टांप ड्यूटी की दरें अलग-अलग होती हैं। आमतौर पर यह प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू (सर्कल रेट) का 2% से लेकर 7% तक हो सकती है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र में इसके रेट्स अलग-अलग होंगे।
2. महिला लाभार्थी के लिए विशेष छूट
चूंकि आप अपनी बेटी को फ्लैट गिफ्ट करना चाहते हैं, तो आपको कई राज्यों में स्टांप ड्यूटी पर 1% से 2% की छूट मिल सकती है। भारत के अधिकांश राज्य महिला खरीदारों या महिला लाभार्थियों के लिए कम शुल्क लेते हैं।
3. 'ब्लड रिलेशन' (रक्त संबंध) का लाभ
बेटी को प्रॉपर्टी गिफ्ट करने का एक बड़ा फायदा यह है कि कई राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा) ने परिवार के करीबी सदस्यों के बीच गिफ्ट डीड पर स्टांप ड्यूटी को काफी कम कर दिया है।
कुछ राज्यों में यह मामूली फिक्स चार्ज (जैसे ₹5,000 या ₹1,000) हो सकता है।
कुछ राज्यों में यह प्रॉपर्टी की वैल्यू का महज 1% होता है।
4. रजिस्ट्रेशन फीस
स्टांप ड्यूटी के अलावा, आपको रजिस्ट्रेशन फीस भी देनी होती है। यह आमतौर पर प्रॉपर्टी की कीमत का 1% होती है या फिर इसकी एक अधिकतम सीमा (Capping) तय होती है (जैसे अधिकतम ₹30,000)।
5. मूल्यांकन (Valuation)
स्टांप ड्यूटी की गणना हमेशा प्रॉपर्टी के सर्कल रेट (सरकारी रेट) के आधार पर की जाती है। अगर मार्केट रेट सर्कल रेट से ज्यादा है, तो ड्यूटी सर्कल रेट पर ही लगेगी।
उत्तर प्रदेश में सिर्फ 6000 रुपये फीस
उत्तर प्रदेश में परिवार की संपत्ति का पारिवारिक सदस्यों के बीच बंटवारे के लिए संबंधित सदस्यों के पक्ष में गिफ्ट डीड, बंटवारा पत्र एवं पारिवारिक व्यवस्थापन या समझौता ज्ञापन निष्पादन सिर्फ 6,000 रुपये में कराया जा सकता है। अभी तक परिवार के बीच भी संपत्ति के बंटवारे पर सात फीसदी स्टांप शुल्क लगता था। इसमें 5,000 रुपये स्टांप ड्यूटी और 1,000 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क के लिए देना होता है।
नोट: सटीक शुल्क जानने के लिए आपको अपने इलाके के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस की वेबसाइट चेक करनी चाहिए या किसी स्थानीय वकील से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं।