
Mutual Fund: म्यूचुअल फंड निवेश के सबसे पॉपुलर तरीकों में से एक हैं। इसकी वजह ये है कि इनमें निवेश करना आसान होता है। इतना ही नहीं इसमें निवेश की कई स्ट्रैटेजी के ऑप्शन भी मिलते हैं, डाइवर्सिफिकेशन की वजह से रिलेटिव सेफ्टी मिलती है और अलग-अलग सेक्टर और एसेट क्लास में से चुनने का ऑप्शन भी होता है। ऐसे में म्यूचुअल फंड के निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रहती है कि आखिर वो अपना पोर्टफोलियो कैसे बेहतर बनाएं। इसके लिए बेहतर रणनीति के साथ निवेश की जरूरत होती है
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, वेल्थ मैनेजर्स का कहना है कि पहली बार म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने वाले और जो लोग फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स से पैसा निकाल रहे हैं, उन्हें धीरे - धीरे अपना पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। एकसाथ बड़ी रकम नहीं निवेश करना चाहिए। जानकारों का कहन है कि धीरे - धीरे निवेश करने से निवेशको को अपने लक्ष्यों, समय और रिस्क लेने की क्षमता के साथ चुनाव करने में मदद मिलती है।
नए निवेशकों को सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP का सहारा लेना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। SIP में हर महीने एक तय रकम निवेश किया जाता है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है। इसके साथ ही औसत लागत का फायदा भी मिलता है। ऐसे में गलत फैसला लेने से बच सकते हैं।
निवेश का बेहतर विकल्प यही है कि आप अपने पैसो को हर जगह थोड़ा - थोड़ा निवेश करें। इसे एसेट एलोकेशन कहा जाता है। आम तौर पर पोर्टफोलियो में इक्विटी (शेयर बाजार से जुड़ी स्कीम), डेट (बॉन्ड या फिक्स्ड इनकम), अंतरराष्ट्रीय निवेश और सोना या अन्य कीमती धातु शामिल हो सकते हैं।
आप अपनी उम्र के हिसाब से निवेश का प्लान बना सकते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर आपकी उम्र कम है और आपके पास निवेश के लिए सात साल या उससे ज्यादा का समय है। ऐसी स्थिति में इक्विटी फंड में ज्यादा हिस्सा रख सकते हैं। वहीं अगर आप जोखिम कम लेना चाहते हैं, तो डेट और मल्टी-एसेट फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं। आपके निवेश का तरीका आपकी आमदनी, खर्च, लक्ष्यों और जोखिम सहन करने की क्षमता पर निर्भर करता है।
नए निवेशक डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड या इंडेक्स फंड से शुरुआत कर सकते हैं। इंडेक्स फंड बाजार के प्रमुख इंडेक्स जैसे निफ्टी 50 या सेंसेक्स को फॉलो करते हैं, इसलिए इनमें फंड मैनेजर के फैसलों का जोखिम कम होता है। वहीं जो लोग बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं चाहते हैं, ऐसे लोगमल्टी-एसेट एलोकेशन फंड चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी, डेट और गोल्ड सभी शामिल रहते हैं।
अगर आप कम समय के लिए निवेश करना चाहते हैं या बाजार का मूड नहीं समझ पा रहे हैं तो ऐसे में आर्बिट्राज फंड या शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड पर विचार कर सकते हैं। इन फंड्स में आमतौर पर जोखिम कम होता है। इतना ही नहीं यह बचत खाते के मुकाबले बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। वहीं जो लोग कम टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, उनके लिए डेट फंड उपयोगी साबित हो सकते हैं।
अगर आप निवेश के शुरुआती चरण में हैं तो मिड कैप और स्मॉल कैप में निवेश करना सही नहीं रहेगा। इसकी वजह ये है कि इनमें उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है। जब बाजार की समझ हो जाए और जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ जाए तो फिर मिड कैप और स्मॉल कैप की ओर रूख कर सकते हैं। इस कैटेगरी में अगर आप निवेश करना चाहते हैं तो अपने पोर्टफोलियो का थोड़ा हिस्सा ही इस कैटेगरी में निवेश करें। जोखिम ज्यादा होने की वजह से नुकसान और फायदा दोनों शामिल होता है। लिहाजा सीमित मात्रा में ही निवेश करना चाहिए।
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