Gold and Silver Investment: साल 2025 निवेश की दुनिया में एक बड़े बदलाव के गवाह के रूप में दर्ज हुआ है। जहां पारंपरिक रूप से लोग इक्विटी और शेयर बाजार की ओर भागते थे, वहीं इस साल सोने और चांदी की 'सुरक्षित' जोड़ी ने वह कर दिखाया जिसकी उम्मीद कम ही लोगों को थी। इन कीमती धातुओं ने न केवल निवेशकों की पूंजी को सुरक्षित रखा, बल्कि मुनाफे के मामले में बड़े-बड़े स्टॉक्स को पछाड़ दिया। अब आलम यह है कि एक्सपर्ट्स इन्हें पोर्टफोलियो का 'ऑप्शनल' नहीं बल्कि 'अनिवार्य' हिस्सा मानने लगे हैं।
पिछले एक साल में चांदी ने जो छलांग लगाई है, उसने बाजार के पंडितों को भी हैरान कर दिया है। चांदी में 161% का जबरदस्त रिटर्न देखा गया, जो सोने की 73% की बढ़त से बहुत ज्यादा है। इसका सबसे बड़ा कारण सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि हमारी बदलती दुनिया है। सौर ऊर्जा और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। आज चांदी सिर्फ तिजोरी में रखने वाली धातु नहीं रह गई है, बल्कि यह भविष्य की अर्थव्यवस्था का एक जरूरी पहिया बन चुकी है। यही वजह है कि सोने और चांदी का अनुपात अब पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब लोग फिजिकल सोना या चांदी खरीदने के बजाय डिजिटल निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश 2 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को पार कर गया है। साल भर में इसमें चार गुना वृद्धि हुई है। यह इस बात का प्रमाण है कि नया निवेशक अब शुद्धता की चिंता और लॉकर के खर्च से बचकर सीधा बाजार की कीमतों का लाभ उठाना चाहता है।
अगर आप भी इस चमक का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड एक बेहतरीन रास्ता है। आप ETF या FoFs के जरिए इनमें निवेश कर सकते हैं।
मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड: यह उन लोगों के लिए है जो जोखिम कम लेना चाहते हैं। ये फंड आपके पैसे का एक हिस्सा सोने-चांदी में और बाकी हिस्सा शेयर और बॉन्ड्स में लगाते हैं।
SIP और STP: आप हर महीने एक छोटी रकम (SIP) के जरिए भी कीमती धातुओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। इसमें आपको फिजिकल मेटल संभालने का कोई झंझट नहीं होता और पैसे निकालने की सुविधा भी तुरंत मिलती है।
निवेश करने से पहले टैक्स के नियमों को समझना जरूरी है। अगर आप गोल्ड या सिल्वर ईटीएफ को 12 महीने से पहले बेचते हैं, तो लाभ आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होगा। वहीं, 12 महीने के बाद बेचने पर 12.5% की दर से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगता है। FoFs के मामले में यह समय सीमा 24 महीने की है। यह स्पष्टता निवेशकों को अपनी वित्तीय प्लानिंग बेहतर ढंग से करने में मदद करती है।
बाजार की इस तेज बढ़त को देखकर अक्सर निवेशक लालच में आकर एकमुश्त बड़ी रकम लगा देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों की सलाह इसके उलट है। एक्सपर्ट कहते हैं कि अपने कुल निवेश का केवल 10-15% ही सोने-चांदी में रखें। इसमें 10% सोना सुरक्षा के लिए और 3-5% चांदी अधिक मुनाफे की संभावना के लिए होनी चाहिए। जब भी बाजार में थोड़ी गिरावट आए, तब खरीदारी करें। इसे 'बाय ऑन डिप' कहते हैं। एक साथ पैसा लगाने के बजाय अगले 6 महीनों में धीरे-धीरे अपना निवेश बढ़ाएं। याद रखिए, पिछला रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होता, इसलिए समझदारी ही सबसे बड़ा हथियार है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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