Gratuity Calculator: ₹30,000 की बेसिक सैलरी पर कितनी मिलेगी ग्रेच्युटी? इस फॉर्मूले से समझें हिसाब

Gratuity Calculator: नए लेबर कोड ने ग्रेच्युटी पाने के नियम आसान कर दिए हैं। अब सिर्फ एक साल नौकरी करने पर भी कर्मचारी इस सुविधा के हकदार बनते हैं। एक तय फॉर्मूले से इस रकम की गणना होती है, जो आपकी बेसिक सैलरी और सर्विस पर आधारित होती है। यह पूरी तरह टैक्स-फ्री लाभ है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड30 Nov 2025, 12:25 PM IST
जानें आपकी सैलरी पर कैसे होगी ग्रेच्युटी कैलकुलेशन
जानें आपकी सैलरी पर कैसे होगी ग्रेच्युटी कैलकुलेशन

Gratuity Calculator: कई लोग नौकरी बदलते समय सबसे ज़्यादा इसी बात पर अटक जाते हैं कि आखिर उन्हें ग्रेच्युटी मिलेगी या नहीं। पहले तो 5 साल की अनिवार्यता ने लाखों कर्मचारियों का फायदा ही रोक दिया था, मगर नए लेबर कोड ने पूरी तस्वीर बदल दी है। अब सिर्फ एक साल की नौकरी पर भी ग्रेच्युटी का हक मिलता है। आपकी मौजूदा सैलरी में कितनी ग्रेच्युटी मिलेगा, आइये जानें इसका कैलकुलेशन।

1 साल में ही ग्रेच्युटी का हक लेकिन शर्तें पूरी हों

नए लेबर कोड के बाद सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब ग्रेच्युटी पाने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। बस आपको लगातार 1 साल कंपनी में काम करना होगा। अगर किसी कर्मचारी ने बीच में लंबी छुट्टी, ब्रेक या नॉन-पेड गैप लिया है, तो यह ग्रेच्युटी को प्रभावित कर सकता है। इसलिए एक साल का समय पूरा होने के साथ-साथ आपकी सर्विस की निरंतरता सबसे अहम मानी जाती है।

ग्रेच्युटी कैसे करें कैलकुलेट?

सरकार ने एक तय फॉर्मूला बनाया है जिसे हर कंपनी फॉलो करती है- लास्ट बेसिक सैलरी × (15/26) × कुल साल। यहां 15 दिन आपकी सर्विस वैल्यू मानी जाती है और 26 महीने के औसत वर्किंग डेज। इस फॉर्मूले से कोई भी कर्मचारी खुद तुरंत अपनी ग्रेच्युटी कैलकुलेट कर सकता है।

एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए किसी कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है और उसने कंपनी में 1 साल काम किया है। अब इस फॉर्मूले में डालकर देखते हैं:

लास्ट बेसिक सैलरी: 30,000 रुपये

15/26 की वैल्यू: 15 दिन की सर्विस वैल्यू / 26 वर्किंग डेज

कुल साल: 1 साल

अब कैलकुलेशन ऐसे होगा:

30,000 × (15/26) × 1

यह रकम लगभग 17,300 रुपये के करीब आती है। यानी सिर्फ एक साल नौकरी करने पर भी कर्मचारी को काफी अच्छी रकम बतौर ग्रेच्युटी मिल जाती है।

इससे यह भी साफ हो जाता है कि सैलरी जितनी ज्यादा होगी, ग्रेच्युटी उतनी ज्यादा बनेगी और नए लेबर कोड में 1 साल में ही ग्रेच्युटी का हक मिल जाना कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है।

इस कैलकुलेशन में 26 के मायने

अक्सर लोगों को यही सवाल होता है कि 30 या 31 दिन की बजाय 26 दिन ही क्यों? दरअसल, औसतन हर महीने 4 छुट्टियां (संडे) निकल जाती हैं, और एक्टुअल वर्किंग डेज 26 ही रह जाते हैं। इसलिए ग्रेच्युटी की गणना इसी आधार पर होती है।

ग्रेच्युटी के फायदे

नए नियमों में एक खास बात और है, अगर किसी कर्मचारी ने छह महीने से ज्यादा काम किया है, तो उसे पूरा एक साल माना जाता है। यानी 11 महीने में भी ग्रेच्युटी का हक बन जाता है। सबसे बड़ी राहत यह है कि यह पूरी रकम टैक्स-फ्री मिलती है। यही वजह है कि बार-बार नौकरी बदलने वाले युवा और कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारी अब पहले की तुलना में ज्यादा लाभ लेने की स्थिति में आ गए हैं।

ग्रेच्युटी का असली मतलब क्या है?

ग्रेच्युटी असल में कर्मचारियों को दी जाने वाली एक तरह की "थैंक यू अमाउंट" है। यह आपकी अंतिम बेसिक सैलरी और डीए के आधार पर तय होती है। जितनी ज्यादा बेसिक सैलरी, उतनी ज्यादा ग्रेच्युटी। यही वजह है कि नौकरी छोड़ते समय यह रकम कई कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत बन जाती है।

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