म्यूचुअल फंड पर लोन लेने में ऐसी धोखाधड़ी! आपके साथ भी हो तो अपनाएं ये तरीका

Financial Fraud: हमें अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है और संभव है कि उस वक्त हमारे पास पैसे नहीं हों। तब म्यूचुअल फंड को गिरवी रखकर लोन लिया जा सकता है। एक रेडिट यूजर ने भी यही किया, लेकिन उनका अनुभव बहुत कड़वा रहा। आइए जानते हैं कि धोखाधड़ी के शिकार हुए इस यूजर से हमें क्या सबक लेनी चाहिए।

Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट हिंदी)
अपडेटेड5 Sep 2025, 01:56 PM IST
वित्तीय संस्थानों की धोखाधड़ी के खिलाफ आरबीआई लोकपाल से करें शिकायत (AI Image)
वित्तीय संस्थानों की धोखाधड़ी के खिलाफ आरबीआई लोकपाल से करें शिकायत (AI Image)(Gemini)

Loan Against Mutual Fund: म्यूचुअल फंड (MF) को गिरवी रखकर लोन लेना आम चलन है। अगर आपके पास म्यूचुअल फंड हैं और आपको पैसों की अचानक जरूरत पड़ जाए, तो इनके बदले लोन लेना एक अच्छा विकल्प है। लेकिन, आपको इस प्रक्रिया में बहुत सतर्क रहना चाहिए। एक Reddit यूजर ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे म्यूचुअल फंड्स पर लोन लेते वक्त उनसे धोखाधड़ी हुई। पूरी कहानी इस लेख के अंत में दी गई है।

इंट्रेस्ट रेट पर कंपनी ने की धोखाधड़ी

रेडिट यूजर के मुताबिक, पहले उन्हें बताया गया था कि ब्याज दर 10.5% होगी, लेकिन जब उसने डिजिटल रूप से दस्तावेज पर हस्ताक्षर (e-sign) कर दिए, तो ब्याज दर बढ़कर 14% हो गई। रेडिट यूजर ने हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ओम्बड्समैन की मदद से अपनी समस्या का समाधान करवा लिया। आइए इस घटना से मिली सीख और उन जरूरी बातों को समझते हैं जिनका ध्यान लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड (LAMF) के समय रखना चाहिए।

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लोन लेते समय इन बातों का ध्यान रखें

जब आप किसी भी वित्तीय संस्थान से लोन लेते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आप सभी नियमों और शर्तों को अच्छी तरह से समझ लें।

ब्याज दर (Interest Rate): लोन के लिए अप्लाई करने से पहले ब्याज दर की जानकारी अच्छी तरह से लें। कई बार ऑनलाइन या विज्ञापनों में बताई गई दरें फाइनल नहीं होती हैं। यूजर ने बताया कि उन्हें पहले 10.5% की ब्याज दर बताई गई थी, जो बाद में 14% हो गई। हमेशा सुनिश्चित करें कि लोन के दस्तावेजों में वही ब्याज दर हो जो आपको बताई गई थी।

प्लेजिंग प्रक्रिया (Pledging Process): म्यूचअल फंड या सिक्योरिटीज को गिरवी रखने की प्रक्रिया को ध्यान से समझें। पता करें कि इसे पूरा होने में कितना समय लगेगा और इस दौरान आपके निवेश पर क्या असर पड़ेगा। Reddit यूजर के मामले में, उनके फंड्स गिरवी होने के बाद वे अपनी होल्डिंग्स को बेच या बदल नहीं पा रहे थे, जिससे उन्हें काफी नुकसान हुआ।

अनप्लेजिंग प्रक्रिया (Unpledging Process): यह जानना भी जरूरी है कि आपके लोन का भुगतान होने के बाद आपके निवेश को कब और कैसे अनप्लेज किया जाएगा। इस प्रक्रिया में लगने वाले समय और किसी भी अतिरिक्त शुल्क के बारे में पहले ही जानकारी ले लें। कुछ मामलों में, यह प्रक्रिया ऑनलाइन भी नहीं होती।

अधिकारों को समझें (Understand Your Rights): लोन लेते समय आपके क्या अधिकार हैं, यह जानना बहुत जरूरी है। आपको यह भी पता होना चाहिए कि अगर कंपनी आपके साथ कोई धोखाधड़ी करती है, तो आप किस तरह से शिकायत कर सकते हैं।

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धोखाधड़ होने पर RBI Ombudsman की मदद लें

आरबीआई ने शिकायत निवारण के लिए एक एकीकृत योजना शुरू की है, जिसे आरबीआई एकीकृत लोकपाल योजना, 2021 (RBI Integrated Ombudsman Scheme, 2021) कहा जाता है। यह योजना 12 नवंबर, 2021 को लॉन्च की गई थी। यह योजना बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), और पेमेंट सिस्टम ऑपरेटरों के ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करती है।

अगर किसी वित्तीय संस्थान से आपको कोई शिकायत है और वह इसका समाधान नहीं कर रहा है, तो आप RBI ओम्बड्समैन की मदद ले सकते हैं। Reddit यूजर ने इसी माध्यम से अपनी समस्या का समाधान करवाया। RBI ओम्बड्समैन योजना एक मुफ्त और प्रभावी तरीका है, जिससे ग्राहकों की शिकायतें जल्दी निपटाई जाती हैं।

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वित्तीय संस्थानों की धोखाधड़ी की कैसे करें शिकायत?

सबसे पहले संस्थान से संपर्क करें: अपनी शिकायत को लिखित रूप में संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान को भेजें। अगर वे आपकी शिकायत का 30 दिनों के भीतर जवाब नहीं देते या आप उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप आगे बढ़ सकते हैं।

RBI की शिकायत प्रबंधन प्रणाली पर जाएं: आप आरबीआई की शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Complaint Management System - CMS) पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर उपलब्ध है।

जरूरी जानकारी भरें: पोर्टल पर अपनी शिकायत से जुड़ी सभी जानकारी, जैसे - कंपनी का नाम, शिकायत का विवरण, और आपकी पहचान से जुड़े दस्तावेज़ अपलोड करें।

शिकायत का समाधान: आपकी शिकायत दर्ज होने के बाद, RBI ओम्बड्समैन उस पर काम शुरू करता है। वह दोनों पक्षों से जानकारी मांगता है और मामले को सुलझाने की कोशिश करता है। Reddit यूजर के मामले में शिकायत दर्ज होते ही कंपनी ने तुरंत कार्रवाई की।

अचानक पैसों की जरूरत पड़े तो क्या करें?

म्यूचुअल फंड या सिक्योरिटीज पर लोन लेना एक अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन यह एकमात्र विकल्प नहीं है। अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो आप कुछ और सुरक्षित विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं...

इमरजेंसी फंड (Emergency Fund): सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप पहले से ही एक इमरजेंसी फंड बनाकर रखें। इसमें आप अपनी 3 से 6 महीने की सैलरी के बराबर रकम रखें, ताकि अचानक जरूरत पड़ने पर आपको कहीं से लोन न लेना पड़े।

पर्सनल लोन (Personal Loan): अगर आपके पास इमरजेंसी फंड नहीं है, तो पर्सनल लोन एक विकल्प है। यह LAMF की तुलना में थोड़ा महंगा हो सकता है, लेकिन इसमें आपकी सिक्योरिटीज गिरवी नहीं रहतीं, जिससे आप अपने निवेश को बेच या बदल सकते हैं।

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फिक्स्ड डिपॉजिट पर लोन (Loan Against Fixed Deposit): अगर आपके पास फिक्स्ड डिपॉज़िट है, तो आप उस पर लोन ले सकते हैं। इसकी ब्याज दरें पर्सनल लोन से कम होती हैं और आपकी एफडी भी सुरक्षित रहती है।

गोल्ड लोन: अगर आपके पास सोना है, तो आप इसे गिरवी रखकर आसानी से और कम ब्याज दर पर लोन ले सकते हैं।

टॉप-अप लोन: अगर आपके पास पहले से ही लोन चल रहा है, तो आप उसी बैंक से टॉप-अप लोन ले सकते हैं।

क्रेडिट कार्ड पर लोन: कुछ बैंक अपने क्रेडिट कार्ड धारकों को उनकी क्रेडिट लिमिट के आधार पर प्री-अप्रूव्ड लोन की सुविधा देते हैं।

रेडिट यूजर ने अपनी पोस्ट में क्या बताया, जानिए

Reddit यूजर ने 'अभि लोन्स' नामक कंपनी से म्यूचुअल फंड (MFs) के बदले लोन लेने की कोशिश की। इसके बाद, उसके म्यूचुअल फंड यूनिट्स गिरवी रख दिए गए (pledged)। उस समय उसके कुछ पैसे गोल्डबीज (GOLDBEES) में लगे थे। सोना सस्ता होने लगा तो उन्होंने यूनिट्स बेच दिए। अपना मुनाफा भुनाने के लिए उन यूनिट्स को दूसरे फंड में बदलने की कोशिश की, लेकिन गिरवी रखे होने के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए। इस वजह से वे गोल्डबीज के 83 से 86.5 होने का फायदा नहीं उठा सके और उन्हें 70,000 का नुकसान हुआ।

जब उन्होंने अपनी यूनिट्स को गिरवी से मुक्त (unpledge) कराने की कोशिश की, तो कंपनी ने बहाने बनाने शुरू कर दिए। कंपनी ने कहा कि इसमें 10 दिन का समय लगेगा। म्यूचुअल फंड रजिस्ट्रार (Nippon) ने भी कहा कि गिरवी से मुक्त कराने की प्रक्रिया सिर्फ ऑफलाइन हो सकती है। वह अभि लोन्स और उनकी पार्टनर कंपनी DMI फाइनेंस के बीच फंस गया। परेशान होकर उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लोकपाल (Ombudsman) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होते ही, तुरंत ही अगली सुबह उसके म्यूचुअल फंड यूनिट्स को गिरवी से मुक्त कर दिया गया।

उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने आरबीआई लोकपाल को मेल में CC किया, तो उनकी टीम ने तुरंत कार्रवाई की। इस अनुभव से उसने सीखा कि सिक्योरिटीज के बदले लोन लेने से पहले पूरी तरह से रिसर्च करना बहुत जरूरी है। इसलिए, इस यूजर का मानना है कि आरबीआई लोकपाल एक बेहतरीन विकल्प है और धोखे या समस्या होने पर यह बहुत मदद करता है।

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