
किसी परिवार के सदस्य के निधन के बाद भावनात्मक स्थिति संभालना जितना कठिन होता है, उतना ही जरूरी होता है उनके आधिकारिक दस्तावेज़ों और पहचान पत्रों जैसे PAN कार्ड, आधार कार्ड, वोटर ID आदि को सही तरीके से संभालना।
कई बार कानूनी वारिस यह समझ नहीं पाते कि इन डॉक्यूमेंट्स को अपने पास रखना है, जमा करना है या नष्ट कर देना है। भले ही इनसे जुड़े कोई एक समान नियम नहीं हैं, लेकिन यह जानना जरूरी है कि इन डॉक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े या अवैध लेन-देन में हो सकता है। इसलिए इन्हें सही तरह से प्रबंधित करना जरूरी है।
PAN कार्ड आयकर दाखिल करने, बैंक और डिमैट खाते खोलने और कई वित्तीय लेन-देन के लिए जरूरी होता है। इसलिए PAN कार्ड को तब तक अपने पास रखें जब तक PAN से जुड़े सभी खाते या काम पूरे न हो जाएं।
अगर ITR दाखिल करना हो, तो PAN को तब तक सुरक्षित रखें जब तक ITR की प्रक्रिया पूरी न हो जाए। आयकर विभाग 4 वर्षों तक (वर्तमान असेसमेंट वर्ष सहित) पुराने मामलों को दोबारा खोल सकता है। जब सभी खाते बंद हो जाएं और अन्य प्रक्रियाएं पूरी हो जाएं, तब आप मृत व्यक्ति का PAN कार्ड आयकर विभाग में सरेंडर कर सकते हैं।
मृत व्यक्ति का वोटर ID रद्द कराने के लिए Registration of Electors Rules, 1960 के तहत Form 7 भरना होता है। इसके लिए नजदीकी चुनाव कार्यालय जाएं, Form 7 जमा करें और मृत्यु प्रमाण पत्र की कॉपी लगाएं। प्रक्रिया पूरी होने पर नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा।
पासपोर्ट को मृत्यु के बाद अनिवार्य रूप से जमा या रद्द कराना जरूरी नहीं है। पासपोर्ट की अवधि समाप्त होने पर वह अपने-आप अमान्य हो जाता है।
ड्राइविंग लाइसेंस के रद्द या सरेंडर करने की कोई निश्चित केंद्रीय व्यवस्था नहीं है। हर राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी अपनी-अपनी प्रक्रियाएं होती हैं। इसलिए सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से संपर्क करें। अगर मृत व्यक्ति के नाम पर कोई वाहन है, तो उसके ट्रांसफर की प्रक्रिया भी उसी RTO से मालूम की जा सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता।)
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