
Debit Card Free Insurance: हम में से ज्यादातर लोग डेबिट कार्ड को सिर्फ एटीएम से पैसे निकालने या शॉपिंग करने का जरिया मानते हैं। लेकिन बहुत कम अकाउंट होल्डर्स जानते हैं कि कई बैंक अपने डेबिट कार्ड के साथ फ्री इंश्योरेंस भी देते हैं। सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन यह कवर अपने आप एक्टिव नहीं रहता। इसके साथ कुछ जरूरी शर्तें जुड़ी होती हैं, जिन्हें पूरा किए बिना इंश्योरेंस का फायदा नहीं मिलेगा।
भारत में कई बड़े बैंक अपने डेबिट कार्ड के साथ कॉम्प्लिमेंट्री इंश्योरेंस या पर्सनल एक्सीडेंट कवर देते हैं। इनमें HDFC बैंक, ICICI बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), कोटक महिंद्रा बैंक और DBS बैंक इंडिया जैसे नाम शामिल हैं।
यह बीमा आमतौर पर 'ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी' के रूप में दिया जाता है। यानी हर कार्ड होल्डर को अलग पॉलिसी नंबर नहीं मिलता। इसमें पर्सनल एक्सीडेंट कवर, एयर एक्सीडेंट, खरीद सुरक्षा और कार्ड फ्रॉड जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। कोटक महिंद्रा बैंक के प्रोडक्ट्स और कस्टमर एक्सपीरियंस डिलीवरी से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, चूंकि यह ग्रुप पॉलिसी होती है, इसलिए व्यक्तिगत स्तर पर अलग पॉलिसी नंबर जारी नहीं किया जाता।
इस फ्री इंश्योरेंस का लाभ तभी मिलेगा जब आप डेबिट कार्ड का नियमित इस्तेमाल कर रहे हों। कई मामलों में यह जरूरी होता है कि तय समय सीमा के भीतर एक खास तरह का ट्रांजैक्शन किया गया हो।
जैसे कोटक महिंद्रा बैंक के गोल्ड और प्लेटिनम डेबिट कार्ड होल्डर्स को पिछले 60 दिनों में कम से कम 6 POS या ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन (हर एक कम से कम ₹500 का) करना जरूरी है। वहीं DBS बैंक के इनफिनाइट डेबिट कार्ड होल्डर्स को पिछले 90 दिनों में कम से कम एक POS या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करना होता है।
अगर यह शर्त पूरी नहीं हुई, तो इंश्योरेंस कवर लागू नहीं होगा। इसलिए यह समझना जरूरी है कि आपके कार्ड पर कौन सी शर्त लागू है और कितने समय के भीतर ट्रांजैक्शन जरूरी है।
अगर आपके डेबिट कार्ड पर यह सुविधा है, तो आप इसे एक्टिव रखने के लिए छोटी-छोटी आदतें अपना सकते हैं। जैसे हर महीने बिजली बिल, मोबाइल रिचार्ज या पेट्रोल का भुगतान डेबिट कार्ड से कर लें। इससे ट्रांजैक्शन की शर्त पूरी होती रहेगी और आपका मुफ्त बीमा कवर सक्रिय रहेगा।
सबसे पहले अपने बैंक से यह जरूर जांच लें कि आपके कार्ड के साथ इंश्योरेंस कवर जुड़ा है या नहीं और उसकी शर्तें क्या हैं।
आपके डेबिट कार्ड की कैटेगरी ही तय करती है कि इंश्योरेंस कवर कितना मिलेगा। आम तौर पर यह रकम ₹50,000 से शुरू होकर ₹10 लाख तक जा सकती है।
इसलिए अपना कार्ड टाइप जरूर चेक करें, तभी सही तस्वीर साफ होगी।
चूंकि यह ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी होती है, इसलिए पारंपरिक टर्म इंश्योरेंस की तरह अलग पॉलिसी नंबर नहीं मिलता। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कार्ड होल्डर की मृत्यु हो जाए तो परिवार या नॉमिनी क्लेम कैसे करे?
बैंक के नियमों के अनुसार, घटना के बाद एक तय समय के भीतर बैंक से संपर्क करना जरूरी होता है। आमतौर पर 60 दिनों के भीतर क्लेम फाइल करना बेहतर माना जाता है, हालांकि हर बैंक की शर्त अलग हो सकती है।
DBS बैंक इंडिया के कंज्यूमर बैंकिंग ग्रुप से जुड़े अधिकारी के अनुसार, नॉमिनी को क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, जरूरी दस्तावेज और अपनी KYC डिटेल्स जमा करनी होती हैं। यह प्रक्रिया ब्रांच जाकर या कॉल सेंटर को सूचना देकर ईमेल के जरिए भी पूरी की जा सकती है।
नीचे दिए गए दस्तावेज आम तौर पर क्लेम करते समय मांगे जाते हैं (बैंक के हिसाब से थोड़ा फर्क हो सकता है)।
अगर दस्तावेज किसी स्थानीय भाषा में हैं, तो उनका अनुवाद और नोटरी कराना जरूरी हो सकता है। अगर कार्ड होल्डर ने नॉमिनी दर्ज नहीं किया है, तो लीगल heir सर्टिफिकेट भी देना पड़ सकता है।
अगर डेबिट कार्ड धारक के साथ कोई हादसा हो जाता है और इंश्योरेंस क्लेम करना हो, तो नॉमिनी को समय रहते कुछ जरूरी कदम उठाने होते हैं।
कई बार हम बैंक की दी गई सुविधाओं से अनजान रहते हैं। डेबिट कार्ड के साथ मिलने वाला यह मुफ्त बीमा कवर भी ऐसी ही एक सुविधा है, जो जरूरत के वक्त बड़ा सहारा बन सकता है। लेकिन इसका लाभ तभी मिलेगा जब आप शर्तों को समझकर उनका पालन करें।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.