आपके नोट पर छिपा है बड़ा राज: ऐसे जानें किस प्रिंटिंग प्रेस में छपा है भारतीय करेंसी नोट

Indian Currency: जिन नोटों को आप चलन में देखते हैं उनकी छपाई नासिक, देवास, मैसूर और सल्बोनी की करेंसी प्रिंट में होती है। नासिक और देवास नोट प्रिंटिंग प्रेस भारत सरकार के अधीन है। वहीं मैसूर और सल्बोनी की प्रिंटिंग प्रेस आरबीआई की भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण लिमिटेड के अधीन आती हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड2 Apr 2026, 03:22 PM IST
Indian Currency: नोट पर छपे Inset Letter से प्रिंटिंग प्रेस का पता चलता है।
Indian Currency: नोट पर छपे Inset Letter से प्रिंटिंग प्रेस का पता चलता है। (AI)

Indian Currency: जब आप अपनी जेब से 100 या 500 का नोट निकालते हैं, तो शायद ही कभी यह सोचते होंगे कि यह नोट आखिर बना कहां है। इसका कागज कहां से आया और इस पर छपी स्याही किस देश की है। लेकिन भारतीय करेंसी के पीछे एक लंबा इतिहास, आधुनिक तकनीक और कई देशों की साझेदारी छिपी हुई है। भारतीय करेंसी छापने का काम भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का होता है। इसके लिए देशभर में चार प्रिंटिंग प्रेस हैं। यहीं पर नोट छापे जाते हैं और भारतीय करेंसी के सिक्के भी चार मिंट में बनाए जाते हैं।

भारत में नोट छापने के उद्देश्य से साल 1926 में महाराष्ट्र के नासिक में एक प्रिंटिंग प्रेस शुरू की गई थी। इसमें 10, 100 और 1000 के नोट छापने का काम शुरु किया गया था। हालांकि, तब भी कुछ नोट इंग्लैंड से मंगाए जाते थे। साल 1947 तक नोट छापने के लिए सिर्फ नासिक प्रेस ही काम कर रही थी। इसके बाद साल 1975 में मध्यप्रदेश के देवास में देश की दूसरी प्रेस शुरू की गई और 1997 तक इन दोनों प्रेस से नोट छापे जा रहे थे।

अमेरिका और यूरोप से भी मंगवाए गए नोट

साल 1997 के बाद भारत सरकार ने नोटों की छपाई के लिए अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कंपनियों से भी नोट मंगवाने शुरू किए। इसके कुछ साल बाद देश में ही छपाई क्षमता बढ़ाने के लिए 1999 में कर्नाटक के मैसूर और 2000 में पश्चिम बंगाल के सलबोनी में दो नई प्रिंटिंग प्रेस स्थापित की गईं।

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कैसे पहचानें नोट कहां छपा है?

हर नोट पर सीरियल नंबर के पास एक छोटा अंग्रेजी अक्षर छपा होता है। इसे Inset Letter कहा जाता है। इसी अक्षर से पता चलता है कि यह नोट भारत के किस प्रिंटिंग प्रेस में छपा है।

मैसूर (कर्नाटक)

नोट के नंबर पैनल के पास अक्षर (Inset) नहीं होता या अंग्रेजी के A, B, C, D अक्षर होते हैं।

देवास (मध्य प्रदेश

नंबर पैनल के पास E, F, G, H, K अक्षर होते हैं।

नासिक (महाराष्ट्र)

नंबर पैनल के पास L, M, N, P, Q अक्षर होते हैं।

सालबोनी (पश्चिम बंगाल)

नंबर पैनल के पास R, S, T, U, V अक्षर होते हैं।

यानी अगर आपके नोट पर “M” लिखा है, तो वह नासिक प्रेस में छपा है, जबकि “R” का मतलब सालबोनी प्रेस होगा।

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कहां बनते हैं सिक्के?

सिक्कों की बात करें तो ये चार टकसालों (मिंट्स) में ढाले जाते हैं, जिनका स्वामित्व सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ( SPMCIL) नाम की सरकारी कंपनी के पास है। ये टकसालें मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और नोएडा में स्थित हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम (RBI Act) की धारा 38 के मुताबिक, सिक्के आम लोगों के इस्तेमाल के लिए सिर्फ रिजर्व बैंक (RBI) के जरिए ही जारी किए जाते हैं। इसका सीधा मतलब है कि सिक्के सीधे टकसालों (जहां सिक्के बनते हैं) से बाज़ार में नहीं आते, बल्कि **RBI के रास्ते ही लोगों तक पहुंचते हैं।

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कहां पहुंचते हैं छपे हुए नोट?

प्रिंटिंग प्रेस में छपे हुए नए नोटों को आरबीआई की शाखाओं के चेस्ट में भेज दिया जाता है। इसके लिए प्रिंटिग प्रेस और मिंट को सीधे रेल लाइन से जोड़ा गया है ताकि करेंसी को पूरे भारत में कहीं भी जल्द से जल्द पहुंचाया जा सके। अभी ऐसे 4,075 करंसी चेस्ट हैं जहां नोट पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

क्या होती है करेंसी चेस्ट?

सामान्य भाषा में करेंसी चेस्ट एक स्टोरहाउस होता है जहां बैंक नोट और सिक्के रिजर्व बैंक की तरफ से रखे (स्टॉक) जाते है। करेंसी चेस्ट को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ स्थापित किया गया था। इसके साथ ही इसमें छह सहयोगी बैंकों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, निजी क्षेत्र के बैंकों, एक विदेशी बैंक, एक राज्य सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी शामिल हैं।

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