डिजिलॉकर एक क्लाउड-बेस्ड डिजिटल वॉलेट है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा विकसित और संचालित किया गया है। यह आपको आपके महत्वपूर्ण दस्तावेजों के डिजिटल संस्करण उपलब्ध कराता है, जैसे:
- ड्राइविंग लाइसेंस
- वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC)
- बैंक खाता विवरण
- बीमा पॉलिसी
- शैक्षणिक मार्कशीट आदि।
डिजिलॉकर में रखे दस्तावेज कानूनी रूप से मूल दस्तावेजों के बराबर माने जाते हैं।
नामांकित व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
- डिजिलॉकर का संबंध Registrar General of India’s Civil Registration System (CRS) से है, जो जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करता है।
- अगर मृत्यु प्रमाणपत्र में आधार नंबर दिया गया है, तो सिस्टम अपने आप व्यक्ति की स्थिति “deceased” (मृत) के रूप में अपडेट कर देता है।
- यदि आधार नंबर नहीं जोड़ा गया, तो डिजिलॉकर यह अपडेट नहीं कर पाएगा। इस स्थिति में KYC Registration Agencies (KRAs) से मिली जानकारी का उपयोग वैकल्पिक रूप से किया जा सकता है।
अगर कोई परिवार का सदस्य, नामांकित व्यक्ति, संयुक्त खाता धारक या कानूनी उत्तराधिकारी किसी सेबी-पंजीकृत संस्था को सत्यापित मृत्यु प्रमाणपत्र देता है, तो मृत्यु की जानकारी KRA सिस्टम में दर्ज की जाती है।
इसके बाद सभी संबंधित वित्तीय संस्थाओं को इसकी सूचना दी जाती है। वे संस्थाएं मृतक के खातों को फ्रीज कर देती हैं और सूचना देने वाले व्यक्ति को संपत्ति दावा या ट्रांसफर की प्रक्रिया के बारे में बताती हैं।
ऐसे में नामांकित व्यक्ति डिजिलॉकर में लॉग इन करके निवेशक के दस्तावेज़ “read-only” मोड में देख सकते हैं, यानी वे दस्तावेज देख तो सकते हैं, पर उनमें कोई बदलाव नहीं कर सकते।