ICICI Bank: आईसीआईसीआई बैंक ने अपने ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। आईसीआईसीआई बैंक ने अपने उस फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें उसने शहरी क्षेत्रों में बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि 50,000 रुपये कर दिया था। बैंक ने ग्राहकों को राहत देते हुए मेट्रो और अर्बन इलाकों में मिनिमम बैलेंस की लिमिट 50000 रुपये से घटाकर सिर्फ 15,000 रुपये कर दिया है।
अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के नए ग्राहकों के मिनिमम बैलेंस में भी बदलाव किया गया है। अब अर्ध सरकारी के लिए न्यूनतम बैलेंस 7,500 रुपये है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2,500 रुपये तय किया गया है। यह बदलाव पिछले हफ्ते कस्टमर और इंडस्ट्री से मिली प्रतिक्रियाओं के बाद किया गया है, जब बैंक ने न्यूनतम औसत मासिक बैलेंस ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 करने का प्रस्ताव रखा था। कई ग्राहकों ने सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी जताई थी।
सरकारी बैंकों का उल्टा रुख
बैंकिंग सेक्टर में एमएबी नीतियों को लेकर अलग-अलग राय है। सरकारी बैंकों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक ने नियमित बचत खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस की जरूरत को खत्म कर दिया है। इसका मतलब है कि अब इन बैंकों में बैलेंस कम होने पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। दूसरी ओर प्राइवेट बैंक अभी भी जुर्माना लगाने का नियम लागू किए हुए हैं।
क्या होता है मिनिमम एवरेज बैलेंस?
मिनिमम एवरेज बैलेंस यानी MAB वो औसत रकम है जो आपके बैंक खाते में हर महीने रहनी चाहिए। आसान भाषा में कहें तो, बैंक चाहता है कि आपके खाते में हमेशा कुछ न कुछ पैसा रहे, ताकि खाता चलता रहे और बैंक को उसका रखरखाव करने में आसानी हो। न्यूनतम बैलेंस रखने का झंझट खत्म ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के ग्राहकों को सीधा लाभ बचत पर ज्यादा नियंत्रण और लचीलापन डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा। बैंक की तरफ से यह सुविधा सिर्फ सेविंग अकाउंट वाले ग्राहकों को दी गई है। करेंट अकाउंट वाले ग्राहकों का इससे किसी तरह का संबंध नहीं है।