India Stock Market Risk: इंडियन कैपिटल मार्केट में नया दौर शुरू हो चुका है। मौजूदा समय में सारा रिस्क अब निवेशकों को पाले में आ चुका है। दरअसल, बैंकों या वित्तीय संस्थानों की जगह अब रिटेल निवेशक ही हर रिस्क को झेल रहे हैं। यह बात हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि ICICI प्रूडेंशियल एएमसी के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर संकरन नरेन ने कह है। उन्होंने मुंबई में आयोजित मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस इंडिया में उन्होंने यह बात कही।
निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत
संकरन नरेन ने कहा, पहले के साइकिल में कैपिटल इंफ्यूजन का भार डेवलपमेंट इंस्टीट्यूशनल पर था। लेकिन अब यह तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। ऐसे में निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है,क्योंकि बाजार की हर अनिश्चितता अब उनके हिस्से आ रही है।
नरेन ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश में कैपिटल इंफ्यूजन के शुरुआती दौर में IDBI, IFCI और ICICI जैसे डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल अहम भूमिका निभाते थे। इन संस्थाओं ने जोखिम भरे प्रोजेक्ट्स को फंडिंग दी। इसके बाद 2007-08 के साइकिल में बैंकों ने यह जिम्मेदारी संभाली। लेकिन आज हालात अलग हैं।
पोर्टफोलियो पर पड़ रहा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर
अब कोई डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन नहीं बचे हैं। बैंक भी रिस्क भरे सेक्टरों में कर्ज देने से परहेज कर रहे हैं। नरेन ने साफ कहा, ‘देश के पूरे जोखिम उठाने की जिम्मेदारी अब निवेशक समुदाय पर है।’ यह बदलाव निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बाजार में उतार-चढ़ाव का पूरा असर अब सीधे उनके पोर्टफोलियो पर पड़ता है।
म्यूचुअल फंड को लेकर कही ये बात
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर नरेन की नजर गहरी है। उन्होंने बताया कि फंड हाउस अब स्मॉल-कैप, मिड-कैप और मल्टी-कैप जैसी स्पेशल कैटेगरी बना रहे हैं। लेकिन लगातार आते SIP इंवेस्टमेंट से फंड मैनेजरों पर दबाव बढ़ता है। महंगे स्टॉक्स में ही पैसा लगाना पड़ता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, 'अगर SIP महंगे मिडकैप में आएंगे, तो मिडकैप फंड मैनेजर महंगे मिडकैप इश्यू में निवेश करेंगे। इससे वैल्यूएशन का रिस्क पूरी तरह निवेशकों पर आ जाता है। पहले संस्थाएं यह बोझ उठाती थीं, लेकिन अब बाजार की हाई वैल्यूएशन का नुकसान निवेशकों को उठाना पड़ रहा है। यह स्थिति स्मॉल और मिड इन्वेस्टर्स के लिए ज्यादा चिंताजनक है।