Second Hand Car: सेकंड हैंड गाड़ी खरीदने-बेचने से पहले इन बातों का रखें ध्यान, दिल्ली ब्लास्ट के बाद बढ़ी सावधानी

Second Hand Car: अक्सर लोग सेकंड हैंड गाड़ी खरीदते या बेचते वक्त कानूनी औपचारिकताओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में बड़ी मुसीबत बन सकती है। दिल्ली धमाके के बाद फिर से यही बात सामने आई कि बिना ओनरशिप ट्रांसफर के गाड़ी बेचना बेहद रिस्की है। 

Priya Shandilya
अपडेटेड12 Nov 2025, 03:50 PM IST
सेकंड हैंड गाड़ी बेचने-खरीदने से पहले बरतें सावधानी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
सेकंड हैंड गाड़ी बेचने-खरीदने से पहले बरतें सावधानी (प्रतीकात्मक तस्वीर)(HT)

Second Hand Car: अक्सर लोग सेकंड हैंड गाड़ी खरीदने या बेचने के समय कानूनी झंझटों से बचने के लिए आधे-अधूरे कागजों में काम चला लेते हैं। लेकिन कई बार यही लापरवाही बाद में बड़ी परेशानी बन जाती है। हाल ही में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट के बाद इसपर लोगों की सतर्कता बढ़ गई है।

दरअसल, दिल्ली ब्लास्ट जांच में सामने आया कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई कार कई बार हाथ बदल चुकी थी। जांच एजेंसियां कार की खरीद-बिक्री की कड़ी खंगाल रही हैं, जिससे एक बार फिर ओनरशिप ट्रांसफर की अहमियत पर सवाल उठे हैं।

ओनरशिप ट्रांसफर न करना बन सकता है बड़ा खतरा

गाड़ी बेचने के बाद बहुत लोग सोच लेते हैं कि जिम्मेदारी खत्म हो गई, लेकिन ऐसा नहीं है। जब तक RTO रिकॉर्ड में गाड़ी का नाम नए मालिक के नाम पर दर्ज नहीं होता, तब तक कानून की नजर में पुराना मालिक ही जिम्मेदार होता है। अगर गाड़ी किसी हादसे या अपराध में शामिल मिलती है, तो सबसे पहले पुलिस पुराना मालिक पकड़ती है। कई बार कोर्ट में पेशी या मुआवजा देने की नौबत तक आ जाती है। यहां तक कि ट्रैफिक चालान और पार्किंग फाइन भी पुराने मालिक के नाम पर ही आ सकता है।

गाड़ी खरीदते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

सेकंड हैंड गाड़ी खरीदते वक्त सिर्फ गाड़ी की हालत नहीं, कागजों की भी जांच जरूरी है। खरीदने से पहले बेचने वाले की पहचान पक्की करें- उसकी ID, एड्रेस प्रूफ और पैन कार्ड की अटेस्टेड कॉपी लें। यह आगे किसी भी कानूनी दिक्कत में आपके काम आएगा।

इसके बाद RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) देखकर यह सुनिश्चित करें कि कोई पेंडिंग चालान या रोड टैक्स बाकी नहीं है। कई बार पुराना मालिक ये फाइन नहीं भरता और बाद में परेशानी नए मालिक के सिर पड़ जाती है। अगर गाड़ी लोन पर खरीदी गई थी, तो यह सबसे जरूरी है कि फाइनेंसर यानी बैंक या फाइनेंस कंपनी से NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) ले लिया गया हो। जब तक RC से हाइपोथिकेशन हटती नहीं है, तब तक कानूनी तौर पर गाड़ी बैंक के नाम पर रहती है, आपके नहीं। इसलिए खरीद से पहले यह प्रोसेस पूरा करवा लें।

गाड़ी बेचते वक्त क्या करें, क्या न करें

अगर आप अपनी कार बेच रहे हैं तो कोशिश करें कि डील सीधे उस व्यक्ति से करें जो गाड़ी का फाइनल ओनर बनेगा। बिचौलियों के चक्कर में गाड़ी कई हाथों में जाती है लेकिन ट्रांसफर नहीं होता, जिससे बाद में आप पर जिम्मेदारी आ सकती है।

RTO पेपर तभी साइन करें जब सभी कॉलम भरे हों। खाली फॉर्म पर साइन करना खतरे से खाली नहीं। इंश्योरेंस (NCB के साथ) तुरंत कैंसिल करें और नए ओनर को अपनी नई पॉलिसी खरीदने की सलाह दें। खरीदार के ड्राइविंग लाइसेंस और पते की कॉपी अपने पास रखें।

डिलीवरी नोट बनवाएं

गाड़ी सौंपने के बाद एक डिलीवरी नोट बनवाएं जिसमें यह लिखा हो कि गाड़ी किस तारीख को दी गई और कब तक उसे नए नाम पर ट्रांसफर करना है। इस दस्तावेज पर दोनों पक्षों के सिग्नेचर और दो गवाहों के नाम-पते जरूर हों।

सेकंड हैंड गाड़ी खरीदना या बेचना कोई मुश्किल काम नहीं, लेकिन कानूनी पेपरवर्क पूरा करना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी आपको आने वाले बड़े झंझटों से बचा सकती है।

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