Income Tax News: 1अप्रैल से देश का टैक्स कैलेंडर पूरी तरह बदलने जा रहा है। नए वित्तीय वर्ष से आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 लागू हो जाएगा। ऐसे में मिडिल क्लास और सैलरीड पर्सन को पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच चयन करने के लिए अपनी टैक्स कैलकुलेशन फिर से करनी होगी। सरकार की तरफ से भत्तों की छूट सीमा में हुए बदलावों से पुरानी टैक्स रिजीम में जान आ गई है।
इन टैक्सपेयर्स के लिए ओल्ड टैक्स रिजीम बेहतर
बजट 2025 में नए टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाने के बावजूद अब पुरानी टैक्स रिजीम मजबूती से मुकाबले में खड़ी है। बच्चों की एजुकेशन और हॉस्टल भत्ते जैसी कैटेगरी में अब सालाना 2.88 लाख रुपये तक की छूट का फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, मील कूपन या भोजन के लिए मिलने वाले भत्ते पर भी राहत दी गई है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई टैक्सपेयर 80C के तहत 1.5 लाख, 80D में हेल्थ इंश्योरेंस के 75,000 रुपये और होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये की पूरी छूट लेता है, तो ओल्ड टैक्स रिजीम उसके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।
HRA पर 50% तक की छूट
वहीं, किराए के मकान में रहने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। अब तक गैर-मेट्रो शहरों में HRA छूट की सीमा बेसिक सैलरी का 40% थी, जिसे नए नियमों के तहत बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे मेट्रो शहरों में रहने वालों के लिए यह बदलाव गेम चेंजर साबित होगा। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आपकी कुल कटौती और छूट 8 लाख रुपये से अधिक बैठती है, तो आंख बंद करके पुरानी व्यवस्था की ओर झुकाव रखना समझदारी हो सकती है। हालांकि, जो लोग अपने माता-पिता को किराया देकर छूट का दावा करते हैं, उन्हें अब अधिक कागजी कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। क्योंकि अब मकान मालिक के साथ संबंध घोषित करना जरूरी कर दिया गया है।
EY LLP की नेशनल लीडर और पार्टनर (पीपल एडवाइजरी सर्विसेज-टैक्स) सोनू अय्यर ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, "पुरानी टैक्स रिजीम को चुनने के लिए (बिना HRA क्लेम किए) नए रिजीम के टैक्स स्लैब रेट्स के फायदे को पूरा करने के लिए दूसरे एग्जेम्प्शन्स काफी बड़े होने चाहिए। कुल कटौतियों और छूटों का योग 8 लाख रुपये से ज्यादा होना चाहिए, तभी पुरानी रिजीम फायदेमंद साबित होगी। इसलिए दोनों विकल्पों में से कोई भी चुनने से पहले, इनकम टैक्स एक्ट 2025 और आई-टी रूल्स 2026 के तहत मिलने वाली सारी टैक्स छूटों को ध्यान में रखते हुए फैक्ट्स के आधार पर तुलना जरूर कर लें।"
दोनों रिजीम वाले टैक्सपेयर्स को मिलेगा मील बेनिफिट्स
टैक्स नियमों में बदलाव के बाद मील बेनिफिट्स अलाउंस की चर्चा भी तेज हो गई है। अब तक मील बेनिफिट्स केवल ओल्ड टैक्स रिजीम पर मिलता था, लेकिन आयकर नियम 2026 में इस छूट को केवल पुरानी टैक्स रिजीम तक सीमित करने का कोई साफ जिक्र नहीं है। यानी 1 अप्रैल से नई कर व्यवस्था वाले करदाताओं को भी इस छूट का फायदा मिल सकता है। इसी के साथ मील बेनिफिट्स को 200 रुपये तक कर दिया गया है।
CA नितिन कौशिक ने कहा, "मील वाउचर (जैसे प्लक्सी या सोडेक्सो) पर टैक्स-फ्री लिमिट अब चार गुना बढ़कर ₹50 से ₹200 प्रति मील हो गई है। अगर कोई व्यक्ति रोज दो वक्त का खाना इन वाउचर्स से लेता है, तो सालाना ₹1.05 लाख से ज्यादा का फायदा टैक्स-फ्री मिल सकता है।"