ITR Defective Notice: इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आए तो क्या करें? जानें 139(9) का पूरा नियम

आकलन वर्ष 2026-27 में आईटीआर में गलत या अधूरी जानकारी होने पर आयकर विभाग धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस भेज सकता है। टैक्सपेयर को आमतौर पर 15 दिन में गलती सुधारनी होती है।

Manali Rastogi
अपडेटेड17 Aug 2026, 10:55 AM IST
ITR defective notice for AY 2026-27
ITR defective notice for AY 2026-27((AI-generated image))

आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर चुके टैक्सपेयर्स को अपने रजिस्टर्ड ईमेल और ई-फाइलिंग पोर्टल पर नजर रखनी चाहिए।

अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को आपके रिटर्न में कोई जानकारी अधूरी, गलत या आपस में मेल न खाने वाली मिलती है, तो वह इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस जारी कर सकता है।

डिफेक्टिव रिटर्न क्या होता है?

जब आईटीआर में दी गई जानकारी अधूरी, गलत या असंगत होती है या रिटर्न फॉर्म में मांगी गई जरूरी जानकारी नहीं दी जाती है, तो उसे डिफेक्टिव रिटर्न माना जा सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई टैक्सपेयर TDS का क्रेडिट क्लेम करता है, लेकिन उससे जुड़ी आय को आईटीआर में नहीं दिखाता है, तो आईटीआर डिफेक्टिव माना जा सकता है। इसी तरह, बिजनेस से होने वाली आय की जानकारी देते समय जरूरी डिटेल्स अधूरी छोड़ने पर भी डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस आ सकता है।

कैसे पता चलेगा कि आपका आईटीआर डिफेक्टिव है?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट डिफेक्ट की जानकारी कई तरीकों से देता है। इसके लिए टैक्सपेयर के रजिस्टर्ड ईमेल पर नोटिस भेजा जा सकता है। डाक के जरिए भी सूचना मिल सकती है। इसके अलावा, ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद भी नोटिस देखा जा सकता है।

धारा 139(9) के तहत जारी नोटिस में आमतौर पर यह बताया जाता है कि रिटर्न में क्या कमी है और उसे ठीक करने के लिए टैक्सपेयर को क्या करना होगा।

जवाब देने के लिए कितना समय मिलता है?

आमतौर पर टैक्सपेयर को डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस मिलने की तारीख से 15 दिन के अंदर रिटर्न में बताई गई कमी को ठीक करना होता है या अपना जवाब देना होता है। हालांकि, अगर नोटिस में कोई अलग समय सीमा दी गई है, तो उसी समय सीमा का पालन करना चाहिए।

अगर टैक्सपेयर को ज्यादा समय की जरूरत है, तो लागू प्रक्रिया के तहत समय बढ़ाने या अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया जा सकता है।

डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस आने की आम वजहें क्या हैं?

TDS क्लेम किया, लेकिन उससे जुड़ी आय नहीं बताई: टैक्सपेयर ने TDS का क्रेडिट तो क्लेम किया, लेकिन जिस आय पर TDS कटा है, उसे आईटीआर में शामिल नहीं किया।

  • ग्रॉस रिसीप्ट में अंतर: Form 26AS में TDS से जुड़ी ग्रॉस रिसीप्ट, आईटीआर में संबंधित आय के तहत दिखाई गई कुल रिसीप्ट से ज्यादा है।
  • आय शून्य, फिर भी टैक्स देनदारी: संबंधित आय और ग्रॉस टोटल इनकम शून्य दिखाई गई है, लेकिन फिर भी टैक्स की देनदारी की गणना करके टैक्स जमा किया गया है।
  • PAN में नाम और आईटीआर में नाम अलग: आईटीआर में दिया गया टैक्सपेयर का नाम PAN में दर्ज नाम से मेल नहीं खाता है।
  • बिजनेस की जानकारी अधूरी: अगर कोई टैक्सपेयर बिजनेस या प्रोफेशन से आय दिखाता है, लेकिन जरूरी बैलेंस शीत और प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट की जानकारी नहीं देता है, तो भी डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस आ सकता है।

क्या डिफेक्ट ऑनलाइन ठीक कर सकते हैं?

हां, टैक्सपेयर ऑनलाइन डिफेक्ट को ठीक कर सकता है। इसके लिए पहले नोटिस में बताई गई कमी को ध्यान से समझना जरूरी है। इसके बाद आईटीआर में जरूरी सुधार करके ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए जवाब जमा किया जा सकता है।

टैक्सपेयर को नोटिस में बताई गई समस्या के अनुसार ही जानकारी ठीक करनी चाहिए। बिना जरूरत आईटीआर में दूसरी जानकारी बदलने से बचना चाहिए।

अगर नोटिस का जवाब नहीं दिया तो क्या होगा?

डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर तय समय के अंदर डिफेक्ट को ठीक नहीं किया गया, तो रिटर्न को इनवैलिड माना जा सकता है।

ऐसी स्थिति में ब्याज या पेनल्टी से जुड़ी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा कुछ लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा नहीं मिल सकता है। कुछ छूट या डिडक्शन का लाभ भी प्रभावित हो सकता है। गंभीर स्थिति में संबंधित आकलन वर्ष के लिए रिटर्न को दाखिल नहीं किया हुआ माना जा सकता है।

क्या दूसरा रिटर्न दाखिल कर सकते हैं?

कुछ परिस्थितियों में, अगर लागू समय सीमा के अंदर अभी भी मौका है, तो टैक्सपेयर नया या रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है। इसके अलावा धारा 139(9) के तहत मिले नोटिस का जवाब देकर डिफेक्ट को ठीक किया जा सकता है।

अगर नया या रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा खत्म हो चुकी है, तो आमतौर पर धारा 139(9) के तहत मिले नोटिस की प्रक्रिया के जरिए ही डिफेक्ट को ठीक करना होता है। अगर टैक्सपेयर तय समय में समस्या को ठीक नहीं करता है, तो उसका रिटर्न आखिरकार इनवैलिड माना जा सकता है।

(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)

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