
आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर चुके टैक्सपेयर्स को अपने रजिस्टर्ड ईमेल और ई-फाइलिंग पोर्टल पर नजर रखनी चाहिए।
अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को आपके रिटर्न में कोई जानकारी अधूरी, गलत या आपस में मेल न खाने वाली मिलती है, तो वह इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस जारी कर सकता है।
जब आईटीआर में दी गई जानकारी अधूरी, गलत या असंगत होती है या रिटर्न फॉर्म में मांगी गई जरूरी जानकारी नहीं दी जाती है, तो उसे डिफेक्टिव रिटर्न माना जा सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई टैक्सपेयर TDS का क्रेडिट क्लेम करता है, लेकिन उससे जुड़ी आय को आईटीआर में नहीं दिखाता है, तो आईटीआर डिफेक्टिव माना जा सकता है। इसी तरह, बिजनेस से होने वाली आय की जानकारी देते समय जरूरी डिटेल्स अधूरी छोड़ने पर भी डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस आ सकता है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट डिफेक्ट की जानकारी कई तरीकों से देता है। इसके लिए टैक्सपेयर के रजिस्टर्ड ईमेल पर नोटिस भेजा जा सकता है। डाक के जरिए भी सूचना मिल सकती है। इसके अलावा, ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद भी नोटिस देखा जा सकता है।
धारा 139(9) के तहत जारी नोटिस में आमतौर पर यह बताया जाता है कि रिटर्न में क्या कमी है और उसे ठीक करने के लिए टैक्सपेयर को क्या करना होगा।
आमतौर पर टैक्सपेयर को डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस मिलने की तारीख से 15 दिन के अंदर रिटर्न में बताई गई कमी को ठीक करना होता है या अपना जवाब देना होता है। हालांकि, अगर नोटिस में कोई अलग समय सीमा दी गई है, तो उसी समय सीमा का पालन करना चाहिए।
अगर टैक्सपेयर को ज्यादा समय की जरूरत है, तो लागू प्रक्रिया के तहत समय बढ़ाने या अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया जा सकता है।
TDS क्लेम किया, लेकिन उससे जुड़ी आय नहीं बताई: टैक्सपेयर ने TDS का क्रेडिट तो क्लेम किया, लेकिन जिस आय पर TDS कटा है, उसे आईटीआर में शामिल नहीं किया।
हां, टैक्सपेयर ऑनलाइन डिफेक्ट को ठीक कर सकता है। इसके लिए पहले नोटिस में बताई गई कमी को ध्यान से समझना जरूरी है। इसके बाद आईटीआर में जरूरी सुधार करके ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए जवाब जमा किया जा सकता है।
टैक्सपेयर को नोटिस में बताई गई समस्या के अनुसार ही जानकारी ठीक करनी चाहिए। बिना जरूरत आईटीआर में दूसरी जानकारी बदलने से बचना चाहिए।
डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर तय समय के अंदर डिफेक्ट को ठीक नहीं किया गया, तो रिटर्न को इनवैलिड माना जा सकता है।
ऐसी स्थिति में ब्याज या पेनल्टी से जुड़ी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा कुछ लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा नहीं मिल सकता है। कुछ छूट या डिडक्शन का लाभ भी प्रभावित हो सकता है। गंभीर स्थिति में संबंधित आकलन वर्ष के लिए रिटर्न को दाखिल नहीं किया हुआ माना जा सकता है।
कुछ परिस्थितियों में, अगर लागू समय सीमा के अंदर अभी भी मौका है, तो टैक्सपेयर नया या रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है। इसके अलावा धारा 139(9) के तहत मिले नोटिस का जवाब देकर डिफेक्ट को ठीक किया जा सकता है।
अगर नया या रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा खत्म हो चुकी है, तो आमतौर पर धारा 139(9) के तहत मिले नोटिस की प्रक्रिया के जरिए ही डिफेक्ट को ठीक करना होता है। अगर टैक्सपेयर तय समय में समस्या को ठीक नहीं करता है, तो उसका रिटर्न आखिरकार इनवैलिड माना जा सकता है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
MoreOops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.