Income Tax Return Rules: अगर आप भी घर बैठे अमेरिका की दिग्गज कंपनियों जैसे Apple, Google, Microsoft या Amazon के शेयरों में निवेश कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बड़े काम की है। भारतीय निवेशकों के बीच विदेशी बाजारों में पैसा लगाने का क्रेज काफी बढ़ गया है। कुछ निवेशक तो विदेशी बाजारों से होने वाली कमाई को अपनी आय में ही नहीं दिखाना भूल जाते हैं,अगर भी उन्हीं में से एक हैं, तो सावधान हो जाइए। विदेश से होने वाली कमाई पर इनकम टैक्स विभाग भी सख्ती बढ़ा दी है।
अक्सर निवेशक यह सोचकर छोटी-मोटी विदेशी कमाई को अपने Income Tax Return (ITR) में दिखाना भूल जाते हैं कि इतनी कम रकम पर कौन ध्यान देगा? लेकिन आयकर विभाग की नजर अब आपकी हर उस 'छिपी हुई आय' पर है जो विदेश से आ रही है। अगर आपने एक चूक कर दी, तो आयकर विभाग आपको 200% तक की भारी पेनल्टी लगा सकता है।
आजकल कई मोबाइल ऐप्स के जरिए भारतीयों के लिए अमेरिका और अन्य विदेशी शेयर बाजारों में निवेश करना बहुत आसान हो गया है। इन शेयरों से निवेशकों को मुख्य रूप से दो तरह की कमाई होती है।
कैपिटल गेन : जब आप किसी शेयर को उसकी खरीदी गई कीमत से ऊंचे दाम पर बेचते हैं।
डिविडेंड : कंपनियां समय-समय पर अपने मुनाफे का हिस्सा शेयरधारकों को देती हैं, जिसे डिविडेंड कहा जाता है।
कई निवेशक कैपिटल गेन पर तो टैक्स की गणना कर लेते हैं, लेकिन डिविडेंड' की छोटी रकम (जैसे 5 या 10 डॉलर) को रिपोर्ट करना जरूरी नहीं समझते हैं। आयकर नियमों के अनुसार, यदि आपको विदेशी कंपनी से 1 रुपये का भी डिविडेंड मिला है, तो उसे अपनी कुल आय में जोड़ना और ITR में दिखाना अनिवार्य है।
अगर कोई करदाता जानबूझकर अपनी आय को छिपाता है या रिकॉर्ड में गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा आयकर विभाग उससे टैक्स की मांग करने के साथ ही उसपर जुर्माना भी लगा सकता है। इनकम टैक्स विभाग इस मामले में 50 सेेस 200 प्रतिशत तक जुर्माना लगा सकता है।
आयकर विभाग क्यों हैं सख्त?
आयकर विभाग विदेश से होने वाली कमाई को काफी गंभीरता से लेता है। इसकी वजह ब्लैक मनी एक्ट भी है, क्योंकि विदेश से हुई कमाई के पैसे को छिपाना ब्लैक मनी का हिस्सा भी हो सकता है। इसमें भी भारी जुर्माने के साथ ही जेल की भी सजा का प्रावधान है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि आयकर विभाग अब अलग-अलग देशों के साथ 'ऑटोमैटिक सूचना विनिमय' (AEOI) के जरिए डेटा साझा करता है। यानी, अगर आपने अमेरिका में निवेश किया है, तो उसकी जानकारी आयकर विभाग के पास पहले से ही पहुंच रही है। इसलिए अगर आप 1 डॉलर की कमाई को छिपाते हैं, तो उसकी जानकारी आयकर विभाग तक पहुंच जाती है।