
HRA Deduction Rule 2026 : अगर आप किराए के घर में रहते हैं और इनकम टैक्स में आवास किराया भत्ता (HRA) छूट का दावा करते हैं, तो साल 2026 से आपके लिए नियम बदलने वाले हैं। सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने के लिए रिपोर्टिंग के नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है। आइए समझते हैं कि आपके रेंट एग्रीमेंट और ऑफिस लोकेशन का उनके टैक्स पर क्या असर पड़ेगा।
नए नियमों के मुताबिक, एचआरए क्लेम करने वाले कर्मचारियों को अब यह साफ-साफ बताना होगा कि मकान मालिक के साथ उनका क्या रिश्ता है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि फर्जी एचआरए क्लेम्स को रोका जा सके। अक्सर लोग रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी रेंट रसीद लगाकर टैक्स बचाते थे, अब सरकार इस पर कड़ी नजर रखेगी।
अब सिर्फ रेंट रसीद से काम नहीं चलेगा। कर्मचारियों को निर्धारित फॉर्म के साथ रेंट एग्रीमेंट की एक कॉपी भी जमा करनी होगी। इसके बिना एचआरए डिडक्शन का क्लेम प्रोसेस नहीं किया जाएगा।
टैक्स छूट के लिहाज से यह एक अच्छी खबर है। सरकार ने मेट्रो शहरों की लिस्ट का विस्तार किया है। अब हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु को भी मेट्रो शहरों में शामिल कर लिया गया है। पहले मेट्रो शहरों के लिए बेसिक सैलरी का 50% और नॉन-मेट्रो के लिए 40% HRA छूट की सीमा थी। अब इन चार नए शहरों में रहने वालों को भी 50% का लाभ मिल सकेगा।
| विवरण | पुरानी स्थिति (Pre-2026) | नई स्थिति (आयकर नियम 2026) |
|---|---|---|
| मेट्रो शहरों की सूची | दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई | दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद |
| HRA छूट की अधिकतम सीमा | बेसिक सैलरी का 50% (केवल पुराने 4 शहरों के लिए) | बेसिक सैलरी का 50% (अब सभी 8 शहरों के लिए) |
| नॉन-मेट्रो शहरों के लिए सीमा | बेसिक सैलरी का 40% | बेसिक सैलरी का 40% |
| मुख्य शर्त (Double-Test) | स्पष्टता का अभाव | जॉब की लोकेशन और घर, दोनों एक ही शहर में होने चाहिए |
इनकम टैक्स नियम 2026 का नियम 279(1)(c) एक 'दोहरी-परीक्षण' की शर्त लेकर आया है। 50% छूट पाने के लिए अब कर्मचारी की नौकरी की जगह और उसका किराए का घर, दोनों एक ही मेट्रो शहर में होने चाहिए।
इसका बड़ा असर हाइब्रिड या रिमोट वर्क करने वालों पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई कर्मचारी बेंगलुरु जैसे मेट्रो में रहकर काम कर रहा है, लेकिन उसकी कंपनी जयपुर जैसे किसी नॉन-मेट्रो शहर में है, तो उसे 50% के बजाय सिर्फ 40% छूट ही मिल सकती है। इसी तरह नोएडा या गुरुग्राम में रहने वाले और दिल्ली में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी नियमों में अस्पष्टता बनी हुई है।
इन बदलावों के बाद अब कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें अपने कर्मचारियों के पेरोल और दावों की जांच के लिए इंटरनल पॉलिसी बदलनी होगी। कंपनियों को अब ज्यादा दस्तावेज देखने होंगे और उनका सही सत्यापन करना होगा।
एचआरए के इन नए नियमों ने पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था की बहस को फिर से छेड़ दिया है। नई टैक्स व्यवस्था में एचआरए का लाभ नहीं मिलता। ऐसे में मेट्रो शहरों की लिस्ट बढ़ने और 50% छूट का दायरा बढ़ने से मुमकिन है कि कई करदाता फिर से पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुनना पसंद करें।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। अपने इनकम टैक्स से जुड़ी सही जानकारी के लिए किसी प्रमाणित टैक्स एक्सपर्ट से राय लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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