आयकर रिटर्न फाइलिंग सीजन को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है और कई करदाताओं को उनके रिफंड मिल भी चुके हैं। लेकिन इस साल बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स, खासकर वे जिनका रिफंड ₹50,000 से अधिक है, अब भी इंतजार कर रहे हैं। जबकि आयकर विभाग आमतौर पर 4 से 5 सप्ताह में रिफंड जारी कर देता है।
संदिग्ध कटौतियों की जांच के चलते अटका रिफंड
CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल के मुताबिक इस बार रिफंड में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि विभाग कुछ ऐसे मामलों की गहन जांच कर रहा है, जिनमें गलत या संदिग्ध कटौतियों (wrongful deductions) का दावा किया गया है। सिस्टम ने कई रिफंड को हाई-वैल्यू या रेड-फ्लैग्ड श्रेणी में चिह्नित किया है, जिसके कारण उनकी प्रोसेसिंग रोककर मैनुअल विश्लेषण किया जा रहा है। मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट चिराग चौहान के अनुसार, मेरे लगभग आधे क्लाइंट जिनका रिफंड ₹50,000 से अधिक है, अभी तक रिफंड नहीं मिला। बाकी अधिकांश लोगों को मिल चुका है। यह स्पष्ट संकेत है कि आयकर विभाग बड़े रिफंड को लेकर सख्त जांच मोड में है।
क्या देर होने पर ब्याज मिलेगा?
आयकर रिफंड में देरी होने पर टैक्सपेयर्स को 6% सालाना ब्याज मिलता है, जिसकी गणना 1 अप्रैल से लेकर रिफंड जारी होने तक की जाती है। CA प्रतिभा गोयल के अनुसार, सेक्शन 244A के तहत प्रति माह 0.5% ब्याज लागू होता है और यह ब्याज आय भी टैक्सेबल होती है।
रिफंड ट्रैक कैसे करें?
करदाता आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन कर View Filed Returns सेक्शन में जाकर यह देख सकते हैं कि रिफंड पूरी तरह जारी हुआ है, आंशिक रूप से एडजस्ट हुआ है या विफल रहा है।
रिफंड देरी की आम वजहें
अधिकतर मामलों में देरी तकनीकी या वेरिफिकेशन संबंधी गलतियों के कारण होती है। जैसे बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट न होना, बैंक अकाउंट में नाम और PAN डिटेल का मेल न होना या फिर गलत या पुराना IFSC कोड दर्ज हो जाना या फिर टैक्स रिटर्न में दर्ज बैंक अकाउंट का बंद होना होता है।
बड़े रिफंड वालों को करना होगा थोड़ा इंतजार
CBDT की जांच पूरी होने और तकनीकी गलतियों के ठीक होते ही अटके हुए रिफंड जारी किए जाएंगे। फिलहाल, अधिक राशि वाले रिफंड वालों को कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।