Income Tax: क्या 15 लाख से ज्यादा सैलरी पर ओल्ड टैक्स रिजीम है बेहतर? कैलकुलेशन से समझें

Income Tax: ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स 2026 में अलाउंस लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव है। इससे ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत टैक्सपेयर्स को काफी कम टैक्स देना पड़ सकता है। ऐसे में अगर इन बदलावों को मंजूरी मिल जाती है, तो नए टैक्स सिस्टम की तुलना में 15 लाख रुपये से ज्यादा सैलरी वाले ज्यादा बचत कर सकते हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड20 Feb 2026, 04:55 PM IST
Income Tax: 15 लाख रुपये की आय पर Old या New Tax Slab बेहतर?
Income Tax: 15 लाख रुपये की आय पर Old या New Tax Slab बेहतर?

Income Tax: सरकार लगातार न्यू टैक्स रिजीम को ओल्ड टैक्स रिजीम से ज्यादा आकर्षक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसे सरल, अनुपालन के लिए आसान और टैक्सपेयर्स के लिए डिफॉल्ट विकल्प के रूप में पेश किया गया है। केंद्रीय बजट 2025 में किए गए बदलावों से नई आयकर व्यवस्था और अधिक आकर्षक बन गई है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से जारी ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियम 2026 में कई अहम भत्तों और टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

ये ड्राफ्ट 22 फरवरी 2026 तक आम जनता की राय के लिए खुले हैं। अगर संसद से मंजूरी मिल जाती है, तो पुराने टैक्स सिस्टम (Old Tax Regime) को चुनने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब सवाल यह उठता है कि क्या पुराने टैक्स सिस्टम के तहत 15 लाख रुपये, 20 लाख रुपये और 25 लाख रुपये की सैलरी पर नए सिस्टम के मुकाबले कम टैक्स दे सकते हैं? आइये जानते हैं पूरी डिटेल

इन भत्तों पर बढ़ोतरी का प्रस्ताव

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, ड्राफ्ट में ब्याज मुक्त या रियायती दर पर मिलने वाले लोन की छूट सीमा 20,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। बच्चों की शिक्षा भत्ता (Education Allowance) 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह और हॉस्टल भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह करने की बात कही गई है।

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इसके अलावा, फ्री मील पर टैक्स छूट 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील और गिफ्ट वाउचर की सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये सालाना करने का सुझाव दिया गया है। HRA (हाउस रेंट अलाउंस) की 50% छूट अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी लागू करने का प्रस्ताव है।

बढ़े हुए भत्तों से ओल्ड टैक्स रिजीम के जरिए कैसे करें बचत

इस मामले में टैक्स से जुड़े जानकारों का कहना है कि इन छूटों की सीमा बढ़ने से सैलरी का टैक्सेबल हिस्सा कम हो जाएगा। इससे बिना सैलरी बढ़े ही कर्मचारियों की टैक्स देनदारी घट सकती है और हाथ में ज्यादा पैसे आ सकते हैं।

15 लाख से ज्यादा सैलरी पर कितनी होगी सेविंग

टैक्स से जुड़े जानकारों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सभी भत्तों और 80C व 80D जैसी कटौतियों का पूरा फायदा उठाता है तो 15 लाख की सैलरी पर टैक्स करीब 41,496 रुपये तक आ सकता है, जो नए टैक्स सिस्टम के 97,500 रुपये से काफी कम है। ऐसे ही 20 लाख की सैलरी पर करीब 63,856 रुपये और 25 लाख की सैलरी पर करीब 66,456 रुपये तक की अतिरिक्त बचत हो सकती है।

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अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो 15 लाख रुपये से ज्यादा सैलरी उठाने वाले लोग ओल्ड टैक्स रिजीम में शइफ्ट हो सकते हैं। कुल मिलाकर सही टैक्स प्लानिंग के जरिए सैलरीड क्लास अपनी टैक्स देनदारी में बेहतर बचत कर सकते हैं।

नया इनकम टैक्स बिल कब होगा लागू

नया इनकम टैक्स बिल 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नए कानून में भाषा को सरल किया गया है और टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। इसे तैयार करने में काफी समय लगा है। इसके साथ ही डिजिटल युग की जरूरतों के अनुसार इसे ढाला गया है। वहीं Previous year और Assessment Year जैसे ऑप्शन को खत्म टैक्स ईयर कॉन्सेप्ट शुरू किया जाएगा।

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नया इनकम टैक्स बिल की जरूरत क्यों पड़ी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 1961 का आयकर अधिनियम में दशकों तक संशोधन किया गया। इसमें कई जटिलातएं है। यह काफी पुराना हो गया था। ऐसे में एक नए बिल की जरूरत महसूस की जा रही थी। नए बिल को आधुनिक अर्थव्यवस्था के तहत बनाया गया है। नए कानून में भाषा को सरल बनाया गया है ताकि आम टैक्सपेयर्स इसे आसानी से समझ सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए कानून में इनकम टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।

New Income Tax Bill 2025 में होंगे कई बड़े बदलाव

  • इस नए बिल को 536 धाराओं और 16 अनुसूचियों में व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि इसे समझना और पढ़ना दोनों आसान हो।
  • शून्य टीडीएस प्रमाणपत्र की सुविधा मिलेगी।
  • डिविडेंड में कटौती को लेकर सेक्शन 80M की फिर से शुरुआत की जाएगी।
  • आईटीआर फाइल चाहे डेडलाइन के बाद किया हो, लेकिन रिफंड मिलने में परेशानी नहीं होगी।
  • ऐसे सभी clause को हटाया जाएगा, जो इसे सपोर्ट नहीं करते।
  • ऐसी बिजनेस प्रॉपर्टी जिनका इस्तेमाल न‌‌ हो रहा हो‌ या लंबे से खाली हो‌, उन‌ पर टैक्स नहीं लिया जाएगा।

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