
Income Tax Alert: भैया QR कोड कहां है? ये आज के दौर का सबसे कॉमन सवाल बन गया है। गली-मोहल्ले की छोटी दुकान हो या शहर का बड़ा शोरूम, हर जगह काउंटर पर एक QR कोड जरूर चिपका होता है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में कैश का झंझट खत्म हो गया है, लेकिन कुछ लोग इस सुविधा में भी झोल कर रहे हैं। इस वजह से कई दुकानदार और उनके कर्मचारी इनकम टैक्स विभाग की रडार पर आ रहे हैं।
अगर आप एक दुकानदार हैं और आपने अपनी दुकान के काउंटर पर अपना QR कोड लगाने के बजाय अपने किसी कर्मचारी (Employee), भाई, या किसी रिश्तेदार का QR कोड लगा रखा है, तो ठहर जाइए। ये खबर आपके लिए एक वेक-अप कॉल है।
मान लीजिए गुप्ता जी की एक किराने की दुकान है। दुकान बढ़िया चलती है और दिन भर में हजारों रुपये का डिजिटल ट्रांजैक्शन होता है। अब गुप्ता जी ने काउंटर पर अपना QR कोड न लगाकर अपने सेल्समैन राहुल का QR कोड लगा दिया। ग्राहक आते हैं, सामान खरीदते हैं और राहुल के खाते में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। शाम को राहुल वो सारा पैसा निकालकर गुप्ता जी को कैश में दे देता है या उनके पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है। गुप्ता जी को लगता है कि चलो अच्छा है, मेरी सेल कागजों पर कम दिखेगी और मुझे टैक्स नहीं भरना पड़ेगा।
आयकर विभाग के लिए QR code से जमा हुआ पैसा गुप्ता जी की कमाई नहीं, बल्कि राहुल की कमाई है। अगर साल भर में राहुल के खाते में इस तरह से 20-30 लाख रुपये आ गए, तो राहुल की प्रोफाइल एक हाई इनकम वाले व्यक्ति की बन जाएगी। अब अगर इन पैसों के हिसाब के लिए इनकम टैक्स विभाग नोटिस भेजता है, तो वो गुप्ता जी के लिए नहीं राहुल के लिए आएगा। इनकम टैक्स विभाग राहुल से पूछेगा कि भाई, तुम्हारी सैलरी तो 15,000 रुपये है, फिर तुम्हारे खाते में ये 25 लाख रुपये कहां से आए? अब अगर राहुल इसका जवाब देने में असमर्थ रहा,तो वो फंस जाएगा।
राहुल ये साबित नहीं कर पाएगा कि वह पैसा उसका नहीं है। अगर वो कहता है कि ये दुकान की बिक्री का पैसा है,तो विभाग उससे 'बिजनेस बुक्स' और 'GST रजिस्ट्रेशन' मांगेगा, जो उसके पास होंगे नहीं। पैसा राहुल के अकाउंट में आया है, तो उसके ऊपर लगने वाला जुर्माना भी उसे ही भरना होगा। उसे टैक्स चोरी का हिस्सा माना जा सकता है।
अब अगर दुकान का मालिक सोचता है कि वो ऐसे करके टैक्स बचा लेगा, तो ऐसा नहीं है। जब कर्मचारी फंसता है, तो जांच की आंच मालिक तक जरूर पहुंचती है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार किसी और के नाम पर अपनी संपत्ति या आय को छिपाना बेनामी लेनदेन के दायरे में आ सकता है। यह एक गंभीर अपराध है।अगर आप अपनी सेल को अपने रिकॉर्ड में नहीं दिखा रहे हैं, तो आप GST की भी चोरी कर रहे हैं।
सलाह- हमेशा अपने फर्म या अपने नाम के मर्चेंट अकाउंट का ही QR कोड इस्तेमाल करें। इसे अपने बैंक खाते और GST नंबर से लिंक रखें। इसके अलावा अपनी दुकान की कमाई को अपने पर्सनल सेविंग अकाउंट में न मंगाकर 'करंट अकाउंट' (Current Account) में मंगवाएं।
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