
Stock Market Tax Rules India: कहते हैं शेयर बाजार दिल का नहीं दिमाग और धैर्य का खेल है। यहां आज आप अर्श पर हो सकते हैं, तो कल फर्श पर भी हो सकते हैं, लेकिन निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी तब शुरू होती है, जब वे घाटे से उबरकर मुनाफे की ओर कदम बढ़ाते हैं। हाल ही में कई निवेशकों के साथ ऐसा हुआ कि पिछले साल के बड़े नुकसान के बाद,इस साल उन्होंने कुछ रिकवरी की है। शेयर मार्केट से पैसा बनाते हुए एक सवाल हमेशा दिमाग में रहता है कि क्या इस 'रिकवरी' वाले मुनाफे पर भी सरकार को टैक्स देना होगा? चलिए, इनकम टैक्स के इस पेचीदा सवाल को आसान भाषा में समझते हैं।
मान लीजिए कि आपने पिछले साल जोश-जोश में ₹2 लाख गंवा दिए, लेकिन कुछ महीनों बाद आपने फिर हिम्मत जुटाई, थोड़ा संभलकर खेला और इस बार ₹1 लाख का शुद्ध मुनाफा (Profit) कमा लिया। अब सवाल ये रहता है कि 2 लाख के घाटे के बाद क्या इस ₹1 लाख की कमाई पर भी सरकार को टैक्स देना पड़ेगा? इसका जवाब है नहीं।इनकम टैक्स की किताब में एक नियम 'सेट-ऑफ' (Set-off) है। यहां पर ये नियम आपका टैक्स का पैसा बचाएगा। आइए जानते हैं कैसे
इनकम टैक्स के नियम सेट-ऑफ के अनुसार, अगर आपको किसी बिजनेस या निवेश में नुकसान हुआ है, तो आप उसे अपने मुनाफे के साथ 'एडजस्ट' कर सकते हैं। इनकम टैक्स विभाग का एक नियम है जिसे 'Set-off and Carry Forward' कहा जाता है। यह नियम कहता है कि अगर आपको शेयर बाजार में घाटा हुआ है, तो आप उस घाटे को अपने मुनाफे के खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं।
कुल नुकसान: ₹2,00,000
कुल मुनाफा: ₹1,00,000
नेट बैलेंस: - ₹1,00,000 (यानी आप अभी भी ₹1 लाख के घाटे में हैं)
आपकी नेट इनकम प्लस में नहीं है, इसलिए आपको एक भी रुपये का टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि इस सेट ऑफ नियम के कुछ नियम शर्ते भी हैं। इनका पालन करना भी बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं उनके बारे में
शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस (STCL): अगर आपने शेयर खरीदकर 1 साल के अंदर बेच दिए और घाटा हुआ, तो इसे आप शॉर्ट टर्म मुनाफे (STCG) और लॉन्ग टर्म मुनाफे (LTCG) दोनों से एडजस्ट कर सकते हैं।
लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस (LTCL): अगर आपने शेयर 1 साल से ज्यादा समय तक रखे और फिर घाटे में बेचे, तो इस घाटे की भरपाई सिर्फ और सिर्फ लॉन्ग टर्म मुनाफे से ही हो सकती है। इसे आप शॉर्ट टर्म मुनाफे के साथ नहीं जोड़ सकते।
अगर आपका घाटा आपके मुनाफे से ज्यादा है,तो उसे आप अगले 8 वित्तीय वर्षों तक Carry Forward कर सकते हैं। आसान शब्दों में कहें, तो अगले साल अगर आपको फिर से ₹1 लाख का फायदा होता है, तो आप इस पुराने बचे हुए नुकसान को दिखाकर उस साल भी टैक्स बचा सकते हैं। ये सिलसिला तब तक चल सकता है जब तक आपका पूरा ₹2 लाख का घाटा मुनाफे से एडजस्ट न हो जाए।
बता दें कि बाजार के पुराने खिलाड़ी अक्सर 'टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग' का इस्तेमाल करते हैं। अगर उन्हें दिखता है कि साल के अंत में उन्हें बड़ा मुनाफा हो रहा है, तो वे जानबूझकर अपने उन शेयर्स को बेच देते हैं जो घाटे में चल रहे होते हैं। इससे उनका टैक्स वाला मुनाफा कम हो जाता है और उन्हें कम टैक्स देना पड़ता है।
नोट- अगर आपने रिटर्न फाइल नहीं की या देरी से की,तो इनकम टैक्स विभाग आपके नुकसान को आगे ले जाने की अनुमति नहीं देगा। इसलिए हमेशा ITR वक्त पर फाइल कर दें।
अगर आपका ₹2 लाख का नुकसान इंट्राडे ट्रेडिंग या F&O से है, तो नियम बदल जाते हैं। इंट्राडे का नुकसान सिर्फ इंट्राडे के मुनाफे से ही एडजस्ट हो सकता है। इसे आप डिलीवरी वाले शेयर के मुनाफे से नहीं घटा सकते। इसके अलावा इसे सिर्फ 4 साल तक ही कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है। वहीं F&O (Non-Speculative Business) को बिजनेस इनकम माना जाता है। इसके घाटे को आप रेंट की इनकम या अन्य सोर्स से एडजस्ट कर सकते हैं।
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