Income Tax Filing 2026 News: देश में इस महीने की पहली तारीख यानी 1 अप्रैल 2026 से नया फाइनेंशियल ईयर शुरू हो चुका है। टैक्सपेयर्स अपनी टैक्स प्लानिंग शुरू कर चुके हैं। लेकिन, बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनकी सालाना कमाई टैक्स स्लैब से कम है या कई डिडेक्शन और सेक्शन 87A रिबेट के बाद उनकी टैक्स लायबिलिटी जीरो हो जाती है, तो क्या उनको भी इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करना चाहिए? आमतौर पर लोग जीरो टैक्स लायबिलिटी पर आईटीआर फाइलिंग नहीं करते हैं, लेकिन टैक्स देनदारी नहीं होने के बावजूद रिटर्न फाइल करना उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
टैक्स विभाग के पास होती है आपकी हर वित्तीय गतिविधि की जानकारी
मौजूदा समय में आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। वार्षिक सूचना विवरण (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) जैसे टूल्स के जरिए विभाग के पास आपके बैंक ब्याज, शेयर बाजार के निवेश, डिविडेंड और हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल मौजूद रहती है। ऐसी में अगर आप अपनी कमाई का ब्यौरा नहीं देते हैं, तो डेटा में विसंगति होने पर विभाग की ओर से नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है।
ITR से लोन प्रक्रिया हो जाती है आसान
इसके अलावा, अचानक होम लोन या पर्सनल लोन लेते समय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बैंक लोन देने से पहले आपकी कमाई का प्रमाण मांगता है। ऐसे में पिछले तीन सालों का ITR इस बात की पुष्टि करता है कि आपकी आय का एक स्थिर स्रोत है, जिससे लोन मिलने की प्रक्रिया आसान हो जाती है। इसके साथ ही आपको बेहतर ब्याज दरें मिलने की संभावना भी बढ़ती है।
विदेश जाने के लिए भी ITR है मददगार
वहीं, अगर आप भविष्य में हायर एजुकेशन के या घूमने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन या कनाडा जैसे देशों के लिए वीजा अप्लाई करते हैं, तो वहां के दूतावास आपके फाइनेंशियल स्टेटस को चेक करने के लिए भी ITR की डिमांड करते हैं। ऐसे में अगर आप पहले से आईटीआर फाइल करते हैं, तो वीजा मिलना आसान हो जाता है।
शेयर मार्केट में निवेश पर बचा सकते हैं टैक्स
शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना बेहद जरूरी है। अगर आपको किसी फाइनेंशियल ईयर में इन्वेस्टमेंट या बिजनेस में घाटा हुआ है, तो उस लॉस को अगले कुछ सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा तभी मिलती है, जब आप समय पर ITR फाइल करते हैं। इससे भविष्य में होने वाले मुनाफे पर आप टैक्स बचा सकते हैं।
बिना ITR फाइल किए नहीं क्लेम कर पाएंगे TDS
इसके अलावा, कई बार बैंक टैक्स दायरे में नहीं आने के बावजूद फिक्स डिपॉजिट (FD) के ब्याज या फ्रीलांसिंग इनकम पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) काट लेते हैं। इस कटौती को वापस पाने का एकमात्र कानूनी रास्ता ITR फाइल करना ही है। बिना रिटर्न दाखिल किए आप सरकार से अपना रिफंड क्लेम नहीं कर सकते हैं।