Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय सबसे बड़ी गलती गलत फॉर्म का चयन करना माना जाता है। आयकर विभाग ने विभिन्न प्रकार के करदाताओं के लिए ITR-1 से लेकर ITR-7 तक अलग-अलग फॉर्म निर्धारित किए हैं।
अगर टैक्सपेयर्स अपनी इनकम के सोर्स और कैटेगरी के अनुसार सही फॉर्म नहीं चुनतें है तो उसका रिटर्न दोषपूर्ण (Defective Return) माना जा सकता है।
कौन भर सकता है ITR-1?
ITR-1, जिसे सहज (Sahaj) भी कहा जाता है, वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए है। यह फॉर्म उन लोगों के लिए उपयुक्त है जिनकी वार्षिक आय ₹50 लाख तक है और आय का स्रोत वेतन, एक मकान संपत्ति तथा ब्याज जैसी अन्य आय है।
ITR-2 किसके लिए है?
यदि आपकी आय ₹50 लाख से अधिक है या आपने शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, विदेशी संपत्ति अथवा पूंजीगत लाभ (Capital Gain) से कमाई की है, तो ITR-2 भरना होगा। यह फॉर्म उन व्यक्तियों और HUF के लिए है जिनकी व्यवसायिक आय नहीं है।
ITR-3 और ITR-4 में क्या अंतर है?
ITR-3 उन व्यक्तियों और HUF के लिए है जिनकी आय व्यवसाय या पेशे (Business/Profession) से होती है। वहीं ITR-4 (Sugam) छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, फ्रीलांसरों और प्रोफेशनल्स के लिए है जो Presumptive Taxation Scheme का लाभ लेते हैं और जिनकी आय निर्धारित सीमा के भीतर है।
सही फॉर्म चुनने से क्या फायदा?
सही ITR फॉर्म भरने से रिटर्न प्रोसेसिंग तेजी से होती है, टैक्स रिफंड समय पर मिलता है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नोटिस आने की संभावना कम हो जाती है। वहीं गलत फॉर्म चुनने पर दोबारा रिटर्न दाखिल करने की नौबत आ सकती है।
ITR भरने की डेडलाइन क्या है ?
सैलरीड टैक्सपेयर्स और वैसे लोग जो आईटीआर-1 या आईटीआर-2 फॉर्म दाखिल करते हैं, उनके लिए आकलन वर्ष 2026-27 का आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन 31 जुलाई 2026 तक है। यदि इस तारीख के बाद कोई आईटीआर भरता है तो उसे जुर्माना देना होगा। ऐसे में आप अंतिम तिथि का इंतजार न करें और तुरंत आईटीआर दाखिल कर दें।