
Income Tax Rules: कई लोग इनकम टैक्स बचाने के चक्कर में पार्टनर या पत्नी के अकाउंट में पैसे डाल देते हैं, सोचते हैं कि ये आसान ट्रिक है। लेकिन सच्चाई ये है कि इनकम टैक्स के क्लबिंग नियम इस खेल को उलट सकते हैं, और ये ट्रिक ट्रैप में बदल सकती है।
आयकर अधिनियम की धारा 64(1)(iv) के तहत अगर कोई व्यक्ति अपने पार्टनर के खाते में पैसे ट्रांसफर करता है, तो उस पैसे से हुई आय को मूल व्यक्ति की आय में जोड़ दिया जाता है। इसे क्लबिंग टैक्स कहा जाता है। इसका मतलब अगर पत्नी या पार्टनर अपने खाते में आए पैसे से म्यूचुअल फंड, स्टॉक, या प्रॉपर्टी में निवेश करता है और उससे आय होती है, तो उस आय का टैक्स ट्रांसफर करने वाले व्यक्ति को देना होता है। ये नियम इसलिए लागू होते हैं ताकि टैक्स बचाने के लिए फर्जी ट्रांसफर को रोका जा सके।
अगर कोई पति अपनी पत्नी के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर करता है और वाइफ उस पैसे को जेनेरिक खर्चों जैसे घर खर्च के लिए रखती है, तो उस ट्रांसफर पर टैक्स नहीं लगता। लेकिन अगर वही रकम निवेश में लगाकर आय कमाई जाती है तो उसके ऊपर टैक्स पति के खाते में जुड़ जाएगा। इसका मतलब है कि सिर्फ पैसे ट्रांसफर कर देने से टैक्स बचत नहीं होती, बल्कि आय की प्रकृति और स्रोत पर टैक्स नियम लागू होंगे। अगर टैक्स विभाग को किसी तरह का फर्जीवाड़ा दिखता है तो नोटिस भी आ सकता है।
टैक्स बचाने के लिए पति-पत्नी मिलकर टैक्स प्लानिंग कर सकते हैं। जैसे कि जॉइंट अकाउंट में निवेश करना, होम लोन के ब्योरे अलग-अलग क्लेम करना, या दोनों के नाम पर अलग-अलग 80C डिडक्शन लेना। जरूरत है तो ट्रांसफर को क़ानूनी ढंग से करना और क्लबिंग प्रावधानों को समझने की।
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