CGAS Scheme: सरकार ने टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत दी है। अब कैपिटल गेंस अकाउंट स्कीम (CGAS) में पैसे जमा करने की सुविधा सिर्फ सरकारी बैंकों तक सीमित नहीं रही। वित्त मंत्रालय ने नई नोटिफिकेशन जारी कर 19 प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंकों को भी इस लिस्ट में शामिल कर दिया है। इससे टैक्सपेयर्स को अपने कैपिटल गेंस को सुरक्षित रखने और टैक्स छूट पाने में आसानी होगी।
कौन-कौन से बैंक जुड़े?
अब HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank, Kotak Mahindra Bank, IndusInd Bank, Yes Bank, Bandhan Bank, Federal Bank, RBL Bank, IDFC First Bank, South Indian Bank, City Union Bank, DCB Bank, Karnataka Bank, Karur Vysya Bank, Jammu & Kashmir Bank, Dhanlaxmi Bank, CSB Bank और Tamilnad Mercantile Bank की नॉन-रूरल शाखाओं में CGAS अकाउंट खुल सकेगा। ध्यान रहे, ग्रामीण शाखाएं जहां आबादी 10,000 से कम है, इस सुविधा से बाहर रहेंगी।
कैपिटल गेंस टैक्स क्या होता है?
जब आप कोई संपत्ति जैसे जमीन, मकान, गहने या निवेश बेचते हैं और उससे मुनाफा कमाते हैं, तो उसे कैपिटल गेंस कहा जाता है। अगर संपत्ति कम समय तक रखी गई है तो उसे शॉर्ट-टर्म गेंस माना जाता है, और लंबे समय तक रखने पर लॉन्ग-टर्म गेंस की श्रेणी में रखा जाता है। दोनों पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू होते हैं।
CGAS क्यों जरूरी है?
कई बार टैक्सपेयर्स को अपनी कैपिटल गेंस को दोबारा निवेश करने में समय लग जाता है। अगर आयकर रिटर्न की डेडलाइन तक निवेश नहीं हो पाता, तो CGAS अकाउंट में पैसा जमा करके टैक्स छूट ली जा सकती है। यही वजह है कि CGAS टैक्स बचाने का एक भरोसेमंद तरीका माना जाता है।
टैक्स बचाने के तरीके
Tax2Win के को-फाउंडर, सीए अभिषेक सोनी ने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54, 54F और 54EC के तहत टैक्सपेयर्स कैपिटल गेंस पर टैक्स बोझ कम कर सकते हैं। धारा 54 और 54F के तहत अगर आप प्रॉपर्टी बेचकर नया घर खरीदते या बनाते हैं तो टैक्स छूट मिलती है। वहीं धारा 54EC के तहत स्पेशल कैपिटल गेंस बॉन्ड में निवेश करने पर राहत मिलती है। इन निवेशों को या तो प्रॉपर्टी बेचने से एक साल पहले या फिर दो साल बाद तक किया जा सकता है।
नए बदलाव (Finance Bill 2024)
सरकार ने कैपिटल गेंस टैक्सेशन को आसान बनाने के लिए कई सुधार किए हैं। अब होल्डिंग पीरियड को सिर्फ 1 साल और 2 साल में बांटा गया है। टैक्स रेट को 20% से घटाकर 12.5% कर दिया गया है और इंडेक्सेशन की सुविधा खत्म कर दी गई है ताकि कैलकुलेशन आसान हो सके। इसके अलावा रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट टैक्सपेयर्स के लिए नियम समान कर दिए गए हैं, जबकि रोलओवर बेनिफिट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि CGAS में 19 नए बैंक जुड़ने से टैक्सपेयर्स को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। अब उन्हें सिर्फ SBI या BOB जैसे सरकारी बैंकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे टैक्स कंप्लायंस आसान होगा और निवेश का प्लान भी लचीला होगा।
सरकार का यह कदम टैक्सपेयर्स के लिए राहत और सुविधा दोनों लेकर आया है। अब कैपिटल गेंस को सुरक्षित रखना और टैक्स छूट लेना पहले से कहीं आसान हो गया है।