India Current Account Deficit: भारत का चालू खाते का घाटा बढ़कर 4.2 अरब डॉलर पहुंचा, जानिए आपकी जेब पर असर

India Current Account Deficit: भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का चालू खाता घाटा पहली तिमाही में बढ़कर $4.2 अरब हो गया है। जानिए व्यापार घाटे और अर्थव्यवस्था पर इसका पूरा असर।

Anuj Shrivastava
अपडेटेड1 Sep 2026, 09:51 PM IST
व्यापार घाटे ने बढ़ाया दबाव
व्यापार घाटे ने बढ़ाया दबाव

RBI Current Account Deficit: भारत के बाहरी खाते पर दबाव वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में थोड़ा बढ़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में देश का चालू खाते का घाटा बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गया। ये देश के सकल घरेलू उत्पाद का करीब 0.5 फीसदी है।

भारतीय रिजर्व बैंक के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, एक साल पहले इसी तिमाही में चालू खाते का घाटा 3.4 अरब डॉलर यानी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 0.4 प्रतिशत था। चालू खाते का घाटा तब होता है जब कोई देश विदेशी वस्तुओं, सेवाओं और निवेश के लिए विदेशों में बाकी दुनिया से प्राप्त होने वाली राशि से अधिक पैसा भेजता है।

किस वजह से बढ़ा व्यापार घाटा?

पहली तिमाही में CAD बढ़ने की सबसे बड़ी वजह देश का बढ़ता वस्तु व्यापार घाटा रहा। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 86.1 अरब डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में यह 68.9 अरब डॉलर था। यानी एक साल में वस्तुओं के व्यापार का घाटा करीब 17.2 अरब डॉलर बढ़ गया। इसका सीधा मतलब है कि भारत ने वस्तुओं के आयात पर निर्यात की तुलना में ज्यादा रकम खर्च की।

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CAD बढ़ने का आपकी जेब से क्या कनेक्शन?

अब सवाल ये है कि चालू खाते का घाटा बढ़ने से आम आदमी की जेब पर इसका क्या असर पड़ सकता है? इसका जवाब है कि इसका सीधा असर तुरंत दिखाई नहीं देता है, लेकिन अगर व्यापार घाटा लगातार बढ़ता है और इसके पीछे आयात बिल में बड़ी तेजी रहती है, तो विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ सकती है। इससे रुपये पर दबाव पड़ने की स्थिति बन सकती है। अगर रुपया कमजोर होता है, तो भारत के लिए विदेश से आने वाला कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और दूसरे आयात महंगे हो सकते हैं। कंपनियों की लागत बढ़ने पर इसका कुछ हिस्सा आगे चलकर ग्राहकों तक पहुंच सकता है।

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हालांकि, ग्लोबल बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत के लिए एक अच्छी खबर भी है। इस साल की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की सर्विस सेक्टर से होने वाली कमाई बढ़कर 51.6 अरब डॉलर हो गई, जो पिछले साल इसी दौरान 47.9 अरब डॉलर थी। आरबीआई का कहना है कि ये बढ़त मुख्य रूप से आईटी/कंप्यूटर, ट्रांसपोर्ट और बिजनेस सर्विसेज के मजबूत एक्सपोर्ट की बदौलत हुई है। साथ ही, विदेश में रहने वाले भारतीयों ने भी जमकर पैसा भेजा है। इस तिमाही में रेमिटेंस यानी देश में भेजा गया पर्सनल पैसा बढ़कर 42.9 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल 33.2 अरब डॉलर था।

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