
भारत का बैंकिंग और वित्तीय सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद हो गया है। वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (IMF) दोनों ने हाल ही में भारत के वित्तीय सिस्टम को ज्यादा मजबूत, विविध और इनक्लूसिव (सबको शामिल करने वाला) बताया है। वहीं RBI ने भी बैंकों को ज्यादा आजादी देते हुए नए सुधारों का ऐलान किया है, जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती देंगे।
वर्ल्ड बैंक ने 30 अक्टूबर को अपनी फाइनेंशियल सेक्टर असेसमेंट (FSA) रिपोर्ट जारी की और IMF ने फरवरी 2025 में फाइनेंशियल सिस्टम स्टेबिलिटी असेसमेंट (FSSA) दी। दोनों ने माना कि 2017 के बाद से भारत का वित्तीय सिस्टम काफी मजबूत हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ने कोऑपरेटिव बैंकों पर निगरानी बढ़ाई है, प्रूडेंशियल नॉर्म्स को सख्त किया है और सुपरवाइजरी फंक्शन्स को बेहतर बनाया है।
NBFCs के लिए स्केल-बेस्ड फ्रेमवर्क को सराहा गया, लेकिन क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट और निगरानी को और मजबूत करने की सलाह दी गई। सिक्योरिटीज मार्केट में सुधार जैसे बेहतर कोलेटरल मैनेजमेंट, म्यूचुअल फंड्स के लिए लिक्विडिटी नॉर्म्स, कॉर्पोरेट डेट मार्केट डेवलपमेंट फंड और सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क को पॉजिटिव बताया गया।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर भारत इसी रफ्तार से सुधार करता रहा तो 2047 तक $30 ट्रिलियन इकोनॉमी बनने का सपना पूरा हो सकता है। इसके लिए प्राइवेट कैपिटल मोबिलाइजेशन यानी निजी निवेश की भूमिका अहम होगी।
दूसरी ओर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने SBI बैंकिंग और इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में कहा कि अब भारतीय बैंक पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हैं। इसलिए RBI ने कई पुरानी पाबंदियां हटाते हुए बैंकों को नए क्षेत्रों में निवेश और अधिग्रहण (acquisition) को फंड करने की अनुमति दी है। ECB और डिपॉजिट्स से विदेशी पूंजी का प्रवाह भी मजबूत बना रहेगा। नई पॉलिसी में लोन-टू-वैल्यू फ्रेमवर्क, लिस्टेड इन्वेस्टमेंट-ग्रेड डेट को कोलेटरल मानना और एक्वीजिशन फाइनेंस (acquisition finance) पर लिमिट्स जैसे कदम शामिल हैं। मल्होत्रा ने कहा कि यह सब भारत की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगा और बैंकों को ज्यादा लचीला बनाएगा।
RBI ने हाल ही में जो सुधार किए हैं, वे 1999 के नियमों को अपडेट करते हैं। अब बैंकों को सिक्योरिटीज के खिलाफ ज्यादा लोन देने की छूट मिलेगी और “लोन-टू-वैल्यू” फ्रेमवर्क के तहत एक्सपोजर को रिस्क से जोड़ा जाएगा। इससे बॉन्ड मार्केट और गहरा होगा और निवेशकों के लिए ज्यादा विकल्प खुलेंगे।
मल्होत्रा ने कहा, “अब बैंक तीन गुना बढ़ चुके हैं, चाहे क्रेडिट हो या डिपॉजिट। बैंकों के पास अब पहले से ज्यादा कैपिटल बफर है और जोखिम की निगरानी के लिए सिस्टम तैयार है।”
गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद स्थिरता बनाए रखी है। विदेशी पूंजी (ECB और डिपॉजिट्स) का फ्लो भी मजबूत बना हुआ है, जिससे मार्केट में भरोसा बढ़ा है।
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