SIP trend Explained: एफडी-स्कीम्स की जगह अब SIP में बढ़ रही है भारतीयों की दिलचस्पी! इस बदलाव के पीछे ये हैं 5 कारण

SIP trend: भारत में बचत की पुरानी सोच तेजी से बदल रही है। लोग अब SIP के जरिए अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिकॉर्ड इनफ्लो, बढ़ते अकाउंट और इक्विटी में भरोसा दिखाता है कि देश 'सेविंग्स-फर्स्ट' से 'SIP-फर्स्ट' बन चुका है, जहां लक्ष्य लंबी अवधि की आर्थिक स्वतंत्रता है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड18 Feb 2026, 02:33 PM IST
SIP में भारतीयों की बढ़ती दिलचस्पी के पीछे क्या हैं कारण?
SIP में भारतीयों की बढ़ती दिलचस्पी के पीछे क्या हैं कारण?

SIP trend: भारत में पैसों की बचत को लेकर सोच में बदलाव साफ दिख रहा है। यह बदलाव हम नहीं, बल्कि खुद आंकड़े बता रहे हैं। कभी हमारा देश “पहले बचत” वाली मानसिकता पर चलता था। तनख्वाह आई, खर्च किया और जो बच गया उसे फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट या सोने में लगा दिया। सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, ग्रोथ नहीं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।

क्यों बदल रही है सोच?

पिछले 5-7 सालों में आम आदमी की प्राथमिकताएं बदली हैं। अब लोग सिर्फ पैसा सुरक्षित रखने से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि उसे बढ़ाना चाहते हैं। इसी वजह से भारत धीरे-धीरे ‘SIP-फर्स्ट’ देश की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

मनी इनवेस्टेड इन राइट एसेट्स (MIRA Money) के को-फाउंडर आनंद के. राठी के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ निवेश का ट्रेंड नहीं बल्कि व्यवहार में आया एक बड़ा परिवर्तन है। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या बदल गया? इसपर आनंद राठी ने ऐसे कुछ कारण बताएं हैं, जिनकी वजह से SIP तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

पहला कारण- महंगाई ने बचत की हकीकत दिखा दी

पहले परिवारों की प्राथमिकता थी पैसा सुरक्षित रहे। बैंक एफडी या पोस्ट ऑफिस स्कीम में पैसा रखने से सुकून मिलता था। लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने महसूस किया कि महंगाई की रफ्तार से उनकी बचत की असली वैल्यू घट रही है।

आज जब महंगाई 5-6% या उससे ज्यादा रहती है और एफडी का रिटर्न उसी के आसपास या उससे थोड़ा ऊपर मिलता है, तो असल में हाथ में बहुत कुछ नहीं बचता। यह समझ लोगों को इक्विटी की तरफ ले गई। अब लोग समझ चुके हैं कि सिर्फ बचत करना काफी नहीं, निवेश करना जरूरी है।

दूसरा कारण- डिजिटल सुविधा ने निवेश को बनाया आसान

पहले निवेश करना लंबी प्रक्रिया थी। बैंक जाना, फॉर्म भरना, सलाह लेना, सब समय लेने वाला काम था। आज मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने निवेश को बेहद आसान बना दिया है।

कुछ क्लिक में SIP शुरू हो जाती है। इस आसान पहुंच ने नौकरीपेशा लोगों और युवाओं को भी बाजार से जोड़ा है। तकनीक ने निवेश को आम आदमी की आदत बना दिया है।

तीसरा कारण- SIP बना नया “फ्यूचर EMI”

SIP ने सबसे बड़ा बदलाव अनुशासन में लाया है। पहले लोग महीने के अंत में सोचते थे कि कितना बचा और कितना निवेश करें। अब SIP को लोग एक तय मासिक प्रतिबद्धता की तरह देखते हैं। जैसे घर या कार की EMI हर महीने देनी ही होती है, वैसे ही SIP भी अब एक अनिवार्य खर्च जैसा बन गया है, फर्क बस इतना है कि यह EMI किसी बैंक के लिए नहीं, अपने भविष्य के लिए है।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31,000 करोड़ के आसपास लगातार रिकॉर्ड मासिक SIP इनफ्लो इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय परिवारों ने इसे अपनी वित्तीय योजना का हिस्सा बना लिया है।

चौथा कारण- महंगाई से आगे निकलने की कोशिश

भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। यहां खर्च बढ़ रहे हैं, जीवनशैली बदल रही है और सपने भी बड़े हो रहे हैं। ऐसे में केवल बचत खाते में पैसा रखना पर्याप्त नहीं है। इक्विटी आधारित SIP ने लोगों को एक ऐसा विकल्प दिया है, जो ऐतिहासिक रूप से लंबे समय में 10–12% तक का रिटर्न देता रहा है। यह रिटर्न महंगाई से आगे निकलने की क्षमता रखता है। लोग अब समझ रहे हैं कि अगर पैसे को काम पर नहीं लगाया, तो वह धीरे-धीरे अपनी ताकत खो देगा।

पांचवां कारण- कंपाउंडिंग की ताकत समझने लगी नई पीढ़ी

आज का युवा सोशल मीडिया, ब्लॉग्स और ऑनलाइन कैलकुलेटर के जरिए समझ रहा है कि छोटी रकम लंबे समय में कितनी बड़ी बन सकती है।

अगर कोई व्यक्ति 5,000 की मासिक SIP 30 साल तक जारी रखे और औसतन 12% रिटर्न मिले, तो यह रकम 1 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। यही लंबी अवधि का चक्रवृद्धि लाभ है जो SIP को आकर्षक बनाता है। जब लोग यह ग्राफ देखते हैं कि छोटी-छोटी रकम कैसे समय के साथ बड़ी पूंजी में बदलती है, तो उनकी प्राथमिकता बदल जाती है।

मार्केट गिरावट अब आपदा नहीं अवसर

कुछ साल पहले तक बाजार में गिरावट आते ही निवेशक घबरा जाते थे। लेकिन अब SIP के जरिए निवेश करने वाले लोग बाजार की गिरावट को अवसर की तरह देखने लगे हैं। रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा यह है कि जब बाजार नीचे जाता है, तो उसी राशि में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। यही रणनीति लंबी अवधि में औसत लागत को संतुलित करती है।

ग्लोबल अनिश्चितता, महंगाई या भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद 55 महीनों तक लगातार SIP इनफ्लो का बढ़ना यह दिखाता है कि निवेशकों की सोच परिपक्व हो रही है।

आंकड़े खुद दे रहे हैं बदलाव का सबूत एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के मुताबिक, भारत में अब 9.25 करोड़ से ज्यादा SIP अकाउंट हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, SIP AUM 16.6 लाख करोड़ पार कर चुका है। AMFI के अनुसार, लगातार 55 महीने SIP इनफ्लोज बढ़े हैं। 20 करोड़ से ज्यादा म्यूचुअल फंड फोलियो रिटेल निवेशकों के नाम हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि SIP अब सिर्फ एक निवेश विकल्प नहीं, बल्कि एक अच्छी आदत बन चुका है। यह सिर्फ फाइनेंशियल सेक्टर का विकास नहीं है, बल्कि देश के आम परिवारों की मानसिकता में आया बदलाव है।

आने वाले 10 साल क्या संकेत दे रहे हैं?

भारत में वेतन बढ़ रहे हैं, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच आसान हो रही है और वित्तीय जागरूकता लगातार बढ़ रही है। इन सबका सीधा असर SIP निवेश पर पड़ेगा। अगर यह ट्रेंड ऐसे ही जारी रहा, तो अगले दशक में करोड़ों भारतीय परिवार अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं। अब भारत केवल “बचत करने वाला देश” नहीं रह गया है। यह एक ऐसा देश बन रहा है जहां आम आदमी कह रहा है, “सिर्फ पैसा मत बचाओ, उसे बढ़ाओ।”

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