Explained: दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले LRS और FEMA के बारे में जरूर जानें, वरना फंस जाएगा पैसा

Dubai Property Rule: भारतीय लोग दुबई में कानूनी तौर पर प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें RBI के सख्त नियमों का पालन करना होगा। प्रॉपर्टी खरीदने के लिए दुबई के किसी बैंक से लोन नहीं ले सकते। अगर आप इनमें से किसी भी नियम को तोड़ते हैं, तो आप पर FEMA के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

Jitendra Singh
अपडेटेड16 Mar 2026, 02:00 PM IST
Dubai Property Rule: LRS के तहत विदेश में 2,50,000 डॉलर तक की प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं।
Dubai Property Rule: LRS के तहत विदेश में 2,50,000 डॉलर तक की प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं।

Dubai Property Rule: विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने के इच्छुक भारतीयों के लिए दुबई एक पसंदीदा जगह बन गया है। आमतौर पर बहुत से लोग दुबई में प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं। ऐसे में अगर आप भी दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ नियमों को जानना बेहद जरूरी है। अगर आप इन नियमों की अनदेखी करते हैं तो फंस सकते हैं। ऐसे में आपको तगड़ा नुकसान हो सकता है। लिहाजा प्रॉपर्टी खरीदने से पहले LRS और FEMA के नियमों की पूरी जानकारी हासिल कर लें। अगर कोई गलती हो गई तो भारी भरकम जुर्माना भरना पड़ सकता है।

भारतीय रेजिडेंट व्यक्ति दुबई में प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं, लेकिन इसके लिए सबसे आम तरीका लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) है। इस स्कीम के तहत कोई भी व्यक्ति एक वित्त वर्ष (अप्रैल से मार्च) में 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर तक विदेश भेज सकता है। यह पैसा प्रॉपर्टी खरीदने जैसे कामों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

दुबई में खरीद सकते हैं घर

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर हिमांशु चहर का कहना है कि भारतीय रेजिडेंट LRS के जरिए दुबई में प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं, लेकिन इसकी सालाना सीमा 2.5 लाख डॉलर ही है। पैसे को किसी अधिकृत बैंक के माध्यम से सही पर्पज कोड के साथ भेजना जरूरी होता है। साथ ही फंड्स का स्रोत पूरी तरह वैध और टैक्स चुकाया हुआ होना चाहिए।

अगर प्रॉपर्टी संयुक्त नाम से खरीदने की तैयारी की जा रही है, तो परिवार के सदस्य अपनी-अपनी LRS लिमिट जोड़ सकते हैं। अकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलाय रजवी के मुताबिक, ऐसा तभी संभव है जब सभी लोग प्रॉपर्टी के टाइटल डीड में जॉइंट ओनर हों। इससे कुल रकम बढ़ जाती है और बड़ी प्रॉपर्टी खरीदना आसान हो सकता है।

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हालांकि, यह योजना केवल भारत में रहने वाले व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है। Alpha Partners के एसोसिएट पार्टनर, शिवांक अरोड़ा का कहना है कि LRS सुविधा का इस्तेमाल कॉर्पोरेट्स, पार्टनरशिप फर्म, ट्रस्ट या हिंदू अविभाजित परिवार नहीं कर सकते हैं।

टैक्स नियमों का पालन करना जरूरी

विदेश में प्रॉपर्टी खरीदना सिर्फ़ पैसे भेजने तक ही सीमित नहीं है। निवेशकों को भारत में टैक्स और रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों का भी पालन करना होता है। जानकारों का कहना है कि विदेश में खरीदी गई प्रॉपर्टी, साथ ही उससे होने वाली कोई भी किराये की इनकम या उसे बेचने से होने वाला कैपिटल गेन, खरीदार के भारतीय इनकम टैक्स रिटर्न में जरूर दिखाना चाहिए। चहर का कहना है कि LRS के ज़रिए भेजे जाने वाले सभी पैसे किसी अधिकृत डीलर बैंक के ज़रिए ही जाने चाहि। प्रॉपर्टी के साथ-साथ उससे होने वाली किराये की इनकम या उसे बेचने से मिलने वाली रकम की जानकारी भारतीय टैक्स फ़ाइलिंग में जरूर दी जानी चाहिए।

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विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लोन लेने पर लगी है पाबंदी

दुबई में बैंक या बिल्डर से लोन लेकर प्रॉपर्टी खरीदना भारतीयों के लिए आसान नहीं है। FEMA के नियमों के मुताबिक रेजिडेंट भारतीय आम तौर पर विदेशी लोन लेकर विदेश में प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते हैं। अकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलाय रजवी के मुताबिक UAE के बैंक या डेवलपर से फाइनेंसिंग लेना भी नियमों के तहत संभव नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट के वकील तुषार कुमार कहते हैं कि विदेश के किसी लेंडर से लोन लेकर प्रॉपर्टी खरीदना FEMA नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। वहीं एलारा लॉ ऑफिसेस की माधुरी सामंत का कहना है कि फाइनेंसिंग के तरीके को लेकर नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। यही वजह है कि भारतीय बैंक भी आम तौर पर विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए होम लोन नहीं देते हैं। ज्यादातर मामलों में, भारतीय बैंक भी विदेशों में रियल एस्टेट खरीदने के लिए हाउसिंग लोन नहीं देते हैं।

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कंप्लायंस की अहमियत

ये नियम थोड़े कठिन होते हैं। विदेश पैसे भेजने की लिमिट, लोन लेने की पाबंदी, टैक्स में जानकारी देना और पैसे वापस लाने जैसे कई नियम लागू होते हैं। अगर इनका पालन नहीं किया गया तो FEMA के तहत जुर्माना लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील तुषार कुमार के मुताबिक नियमों का उल्लंघन करने पर आर्थिक पेनल्टी लग सकती है। इसी वजह से एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले पूरी प्लानिंग करें और पैसे भेजने से पहले किसी कानूनी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।

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पहले FEMA के तहत थी इजाजत

2022 तक FEMA के नियमों में एक क्लॉज था, जो अमीर भारतीयों को विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए स्पेशियलाइज्ड ओवरसीज एनटिटी बनाने की इजाजत देता था। लेकिन, सरकार ने FEMA के नए नियम नोटिफाय किए, जो अगस्त 2022 से लागू हैं। इसमें उस क्लॉज को हटा दिया गया है। FEMA के नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना काफी ज्यादा है। ऐसे मामलों में जेल की सजा तक हो सकती है। FEMA के उल्लंघन के मामले ED के तहत आते हैं।

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