
Infosys Buyback: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए Infosys की नई घोषणा काफी अहम है। कंपनी ने अपना अब तक का सबसे बड़ा ₹18,000 करोड़ का शेयर बायबैक शुरू कर दिया है, और इसके लिए आज से लेकर 26 नवंबर तक शेयरधारक अपने शेयर टेंडर कर सकते हैं। कई निवेशक इसे एक अच्छा मौका मान रहे हैं, क्योंकि कंपनी ने ₹1,800 प्रति शेयर का फिक्स्ड प्राइस रखा है, जो मौजूदा मार्केट प्राइस से अच्छा प्रीमियम देता है। लेकिन बायबैक में भाग लेने से पहले कुछ जरूरी बातें समझना बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब टैक्स के नियम पहले जैसे नहीं रहे।
इन्फोसिस के इस बायबैक में वही निवेशक शामिल हो सकते हैं, जिनके पास 14 नवंबर को कंपनी के शेयर उनके डिमैट अकाउंट में थे। अगर आपने यह तारीख निकलने के बाद शेयर खरीदे, तो आप इस ऑफर का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। कंपनी सिर्फ अपनी कुल हिस्सेदारी का करीब 2.4% ही खरीद रही है, इसलिए एक्सेप्टेन्स रेश्यो (acceptance ratio) बहुत ज्यादा होने की उम्मीद नहीं है।
यह सबसे बड़ा बदलाव है। अब बायबैक से मिलने वाला पैसा “इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज” माना जाएगा और आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। अगर आप 30% ब्रैकेट में आते हैं तो टैक्स काफी ज्यादा बन सकता है और प्रीमियम का बड़ा हिस्सा कट सकता है। पहले कंपनी बायबैक टैक्स देती थी और निवेशकों को पैसे टैक्स-फ्री मिलते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
अगर कोई निवेशक शेयर मार्केट में बेचता है, तो टैक्स कैपिटल गेन रेट के हिसाब से लगता है-
लॉन्ग टर्म (>12 महीने) वाले गेन्स पर लगभग 12.5%, जबकि शॉर्ट-टर्म गेन्स पर 20%। कई बार यह बायबैक वाले टैक्स से बेहतर बैठ सकता है।
अगर आपकी पूरी टैक्सेबल इनकम (बायबैक प्रोसीड्स सहित) नई टैक्स व्यवस्था में 12 लाख के अंदर है, तो आप रिबेट के जरिए पूरा टैक्स बचा सकते हैं। पुरानी व्यवस्था में 5 लाख तक की आय वालों को भी रिबेट मिलती है, लेकिन वह ओपन-मार्केट गेन्स पर लागू होती है।
बायबैक में आपका खरीद मूल्य घटाया नहीं जाता। इसकी बजाए आपका कॉस्ट एक कैपिटल लॉस माना जाता है, जिसे आप आगे कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। ये लॉस 8 साल तक कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है।
इन्फोसिस बायबैक पर TDS भी काटेगी। कम स्लैब वाले निवेशकों को बाद में रिफंड मिल सकता है, लेकिन शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है।
अगर आपकी होल्डिंग 2 लाख या उससे कम है, तो आप छोटे शेयरहोल्डर माने जाएंगे। इस कैटेगरी में एक्सेप्टेन्स रेश्यो थोड़ा बेहतर रहने का अनुमान होता है।
इन्फोसिस का बायबैक बड़ा है और प्रीमियम भी आकर्षक दिखता है, लेकिन बदल चुके टैक्स नियम इसे पहले जितना फायदेमंद नहीं रहने देते। इसलिए निवेशकों को पात्रता, टैक्स, एक्सेप्टेन्स रेश्यो और अपनी होल्डिंग पीरियड को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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