Infosys Buyback: बायबैक में हिस्सा लेने से पहले जरूर जान लीजिए टैक्स नियम, नहीं तो हो सकता है नुकसान!

Infosys Buyback: इन्फोसिस शेयर बायबैक की रिकॉर्ड डेट करीब आ गई है। ऐसे में इसमें हिस्सा लेने से पहले निवेशकों को टैक्स नियमों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए।  

Shivam Shukla
पब्लिश्ड10 Nov 2025, 01:47 PM IST
इंफोसिस शेयर बायबैक
इंफोसिस शेयर बायबैक

Infosys Buyback Tax Rules: देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस ने 18,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक का ऐलान किया है, जिसके लिए रिकॉर्ड डेट भी घोषित कर दी गई है। दिग्गज आईटी कंपनी ने पिछले सप्ताह बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट का ऐलान किया। कंपनी की ओर दाखिल एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, 14 नवंबर 2025 रिकॉर्ड डेट है। इस तारीख तक कंपनी ने रजिस्ट्रर में जिन शेयरधारकों का नाम होगा, वे ही अपने शेयर बेच सकेंगे। लेकिन शेयर बायबैक में हिस्सा लेने से पहले टैक्स के नियमों को जरूर जान लीजिए।

पहले कंपनियां चुकाती थीं टैक्स

दरअसल, टैक्स कानूनों में आए बदलाव ने शेयर बायबैक को निवेशकों के लिए एक नया गणित बना दिया है। पहले कंपनियों को बायबैक पर टैक्स चुकाना पड़ता था और शेयरधारकों को छूट मिलती थी, लेकिन अब पूरी रकम डिविडेंड की तरह टैक्स के दायरे में आ गई है। आइए नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

अब निवेशक को देना होगा टैक्स

पहले के नियम के अनुसार, कंपनियां बायबैक पर इस्तेमाल की गई रकम का 20 प्रतिशत टैक्स चुकाती थीं। शेयरधारकों को मिली रकम इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10 के तहत पूरी तरह छूट मिलती थी। लेकिन नयमों में संशोधन के बाद अब शेयरधारकों को मिलने वाली पूरी रकम डिविडेंड मानी जाएगी और इन पर टैक्स चुकाना होगा।

यह भी पढ़ें | नया आधार ऐप लॉन्च, जानिए खासियत

इस वजह से सवालों के घेरे में बायबैक

मनी कंट्रोल की एक खबर के मुताबिक, मार्च 2025 में एक निवेशक ने नव भारत लिमिटेड के बायबैक में हिस्सा लिया। उसे 13,000 रुपये मिले, जिस पर 10 प्रतिशत टैक्स काटकर 1300 रुपये वसूले गए। लेकिन उसकी असल कमाई 100 रुपये थी। दरअसल, शेयरों की खरीद लागत घटाने के बाद यही मुनाफा बचा। ऐसे में बायबैक का फायदा सवालों के घेरे में आ गया। अब इन्फोसिस के बायबैक के लिए यही सवाल सामने है। इसमें हिस्सा लेना चाहिए या नही?

यह भी पढ़ें | Gold Silver Rate: सोने-चांदी की कीमतों में 1% अधिक का उछाल, जानें ताजा रेट

नए नियम में ये राहत

हालांकि, नए नियम में एक राहत जरूर है। बायबैक में दी गई शेयरों की लागत को कैपिटल लॉस माना जाता है। शॉर्ट टर्म अगर होल्डिंग 12 महीने से कम, लॉन्ग टर्म अगर इससे ज्यादा। इस नुकसान को अन्य कैपिटल गेन के खिलाफ सेट-ऑफ किया जा सकता है। इनकम टैक्स नियमों के तहत इसे आगे भी कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा है। अगर आपके पास टैक्सेबल कैपिटल गेन हैं, तो बायबैक से होने वाला लॉस उन्हें कम कर देगा। इससे कुल टैक्स बचत हो सकती है। लेकिन अगर गेन नहीं हैं, तो यह लॉस बेकार साबित होगा। बता दें कि 12 महीने से ज्यादा की होल्डिंग पर गेन 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है, जबकि शॉर्ट टर्म पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है।

इन निवेशकों को बायबैक में हिस्सा लेना फायदेमंद

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इंफोसिस बायबैक में हिस्सा लेना तब समझदारी भरा कदम है जब कुछ शर्तें पूरी हों। पहली आपकी डिविडेंड सहित कुल इनकम नए रिजीम में रिबेट के रेंज में हो। दूसरी, शेयर 12 महीने से कम समय से रखे हों और ओल्ड रिजीम में कुल इनकम (स्लैब या स्पेशल रेट सहित) 5 लाख रुपये से कम हो। पुराने रिजीम में धारा 87ए की रिबेट शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर भी लागू होती है।हालांकि, अगर होल्डिंग लंबी है और कैपिटल गेन सेट-ऑफ के लिए उपलब्ध हैं, तो फायदा बढ़ जाता है।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़मनीInfosys Buyback: बायबैक में हिस्सा लेने से पहले जरूर जान लीजिए टैक्स नियम, नहीं तो हो सकता है नुकसान!
More
बिजनेस न्यूज़मनीInfosys Buyback: बायबैक में हिस्सा लेने से पहले जरूर जान लीजिए टैक्स नियम, नहीं तो हो सकता है नुकसान!