Gig Economy: अब लहसुन छीलने के लिए भी ऐप से आ रही है मेड, हेल्परों वाले ‘स्विगी’, ‘जमैटो’ का तेजी से बढ़ रहा बिजनेस

Instant Help Apps: शहरों में जीवनशैली में जैसे-जैसे बदलाव आ रहा है, वैसे-वैसे नए-नए बिजनेस उभर रहे हैं। अब मिनटों में खाना डिलिवर करने वाले ऐप स्विगी, जमैटो की तरह मिनटों में डोमेस्टिक हेल्प मुहैया कराने वाले ऐप भी आ गए हैं। 

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड18 Feb 2026, 06:32 PM IST
घर के छोटे-छोटे काम के लिए ऐप बुकिंग से आ रहे लोग (सांकेतिक तस्वीर)
घर के छोटे-छोटे काम के लिए ऐप बुकिंग से आ रहे लोग (सांकेतिक तस्वीर)

सोचिए, आपको यात्रा पर निकलना है। लेकिन ऑफिस का काम निपटाने में थोड़ी देर हो गई, ऊपर से ट्रैफिक जाम। आपको घर पहुंचने में ही देर हो रही है। फिर घर जाकर पैकिंग भी तो करनी है। इतना टाइम नहीं बचा है आपके पास। ऐसे में ऐप से हाउस हेल्प बुक कीजिए और पैकिंग करवा लीजिए।

अब लहसुन छीलने के लिए बुकिंग से आ रहे लोग

मजे की बात तो यह है अब ऐप से मेड भी बुक हो रही हैं जो आपके घर आकर लहसुन छील देंगी, प्याज और सब्जियां काट देंगी। बस अब ऐप खोलिए, अपने काम के हिसाब से हेल्पर चुनिए, कितने देर के लिए बुक करना चाहते हैं वो बताइए, फिर बुकिंग बटन टैप कर दीजिए। कुछ देर में आपकी मदद के लिए बंदा हाजिर। न मोलभाव का झंझट, ना काम का किचकिच। तय कीमत और अच्छे काम की रेटिंग का हेल्पर हाजिर। गिग इकोनॉमी के दौर में हर काम आसान हो रहा है।

अब शहर-शहर में इंस्टैंट हेल्प ऐप्स की भरमार

दिल्ली, मुंबई समेत देश के तमाम बड़े शहरों में हाउस हेल्परों के स्विगी, जमैटो, ब्लिंकिट जैसे प्लैटफॉर्म्स काम कर रहे हैं। स्नैबिट (Snabbit), बुकमाईबाई ( Bookmybai ), मिडक्लैप (Midclap), ब्रूमीज (Broomees), सुलेखा (Sulekha), हेल्पर4यू (Helper4U) जैसे अनेक प्लैटफॉर्म्स अब हाउस हेल्प से लेकर ड्राइवर तक मुहैया करवा रहे हैं। आपको घर में ही बाल कटवाने हैं, बर्तन धुलवाने, तितर-बितर हुए घर को व्यवस्थित करवाना है- जो भी जररूत है, उसे पूरा करने के लिए ऐप पर लोग मौजूद हैं। बस आपको कौन का काम करवान है या कितनी देर के लिए हेल्प चाहिए, इतना बताना है और लोग मिल जाएंगे।

इसलिए बढ़ रहा है इंस्टैंट हेल्प बिजनेस

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे जैसे शहरों में घरेलू कामकाज के लिए ऐप से लोगों को बुलाने का चलन तेजी से जोर पकड़ रहा है। लोग अब किसी पड़ोसी के कहने या सिक्यॉरिटी से पूछकर लोगों को काम पर रखने के बजाय ऐप पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। दरअसल, पति-पत्नी और बच्चों तक सीमित परिवार में अगर पति-पत्नी, दोनों ही कामकाजी हैं तब घर का काम निपटाना पहाड़ सा हो जाता है। समय की कमी है, मोबाइल फोन से बुकिंग की समझ है, हेल्पर के खर्चे उठाने के पैसे हैं और साफ-सुथरा काम करवाने की चाहत है तो फिर ऐप बेस्ड इंस्टैंट हेल्प का बिजनेस तो बढ़ेगा ही।

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छह महीने में 10 गुना ग्रोथ

टाइम्स ऑफ इंडिया (ToI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु की कंपनी स्नैबिट के ग्राहकों की संख्या पिछले कुछ महीनों में बेतहाशा बढ़ी है। अगस्त, 2025 में स्नैबिट को महीने में करीब एक लाख जॉब ऑर्डर आए थे जो फरवरी, 2026 तक आते-आते 10 लाख प्रति माह तक पहुंच गए हैं। यानी सिर्फ छह महीने में 10 गुना बढ़ोतरी। अर्बन कंपनी इस क्षेत्र का अच्छा-खासा ब्रैंड बन गई है। उसके प्लैटफॉर्म पर भी छोटे-छोटे काम के लिए तुरंत हेल्पर बुक करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अर्बन कंपनी ने पिछले वर्ष ही इंस्टैंटहेल्प वर्टिकल लॉन्च किया था और सिर्फ आठ महीने में अक्टूबर, 2025 के आंकड़े बताते हैं कि इंस्टाहेल्प पर 4.68 लाख ऑर्डर्स आए थे।

इन कामों के लिए लोग ले रहे इंस्टैंट हेल्प ऐप की मदद

घर की सफाई: सामान्य झाड़ू-पोंछा, कोने-कोने की सफाई, सामान हटाकर साफ-सफाई, घर में पार्टी हुई तो उसके बाद की सफाई

किचन का काम: हर दिन खाना बनाना, विशेष तरह का भोजन बनाना, खाना बनाने में मदद (प्याज काटना, लहसुन छीलना, बर्तन धोना आदि)।

बच्चों की देखभाल: जरूरत पड़ने पर बच्चे की देखभाल, नियमित रूप से देखभाल, रातभर बच्चे को संभालना ताकि खुद अच्छी नींद ले सकें, बच्चे की तबीयत खराब हो तब आपातकालीन देखभाल

बुजुर्गों/दिव्यांगों की देखभाल: हर दिन आकर दिनचर्या में मदद, इलाज करवाने के लिए अस्पताल ले जाना, दवाइयां लेने की याद करवाना, कभी-कभार बातचीत के लिए बुलाना

कपड़े का काम: कपड़े की धुलाई, कपड़े को आयरन करना, खास तरह के कपड़े की विशेषज्ञता के साथ धुलाई

बिगड़े को ठीक करना: पानी के पाइप से जुड़े काम, बिजली के काम, घर की दीवारों से जुड़े काम, फर्नीचर ठीक करना, घर के अप्लायंसेज ठीक करना

शरीर की देखभाल: बाल काटना, नाखून काटना, हेयर कलर करना

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इंस्टैंट हेल्प ऐप्स का रेवेन्यू मॉडल क्या है?

प्लेटफॉर्म आम तौर पर अपना बिजनेस इस तरीके से चलाते हैं...

कमीशन-बेस्ड मॉडल: हर ट्रांजैक्शन पर 15–30% कट

सब्सक्रिप्शन प्लान: रेगुलर सफाई या घरेलू स्टाफ के लिए मंथली पैकेज

लीड-जेनरेशन फीस: वेरिफाइड लीड के लिए वर्कर से चार्ज करना

प्रीमियम मेंबरशिप: प्रायॉरिटी बुकिंग और डिस्काउंटेड रेट

हर वर्कर पर रहती है प्लैटफॉर्म की नजर

प्लैटफॉर्म्स अपने वर्कर्स पर उनके लोकेशन जानकर नजर रखती हैं। कोई वर्कर कहां जा रहा है, वहां कितनी देर ठहर रहा है, रास्ते में उसे कितना वक्त लगा है, प्लैटफॉर्म्स की इन सब पर नजर रहती है। ऐसे में अगर कोई बुकिंग से इतर व्यक्तिगत साठगांठ से काम करना या करवाना चाहे तो यह मुश्किल है। वर्कर को ऐप के जरिए ही काम मिलेगा और काम करवाने वाले को को ऐप पर ही बुकिंग करनी होगी।

25-30 हजार की मासिक कमाई का मॉडल

काम होने के बाद सर्विस लेने वाले वर्कर की रेटिंग करते हैं। उस रेटिंग के आधार पर ऐप पर वर्करों की रैंकिंग होती है। जिन वर्करों की रेटिंग खराब होती है वो ऐप सर्च में धीरे-धीरे गायब होते जाते हैं जबकि अच्छी रेटिंग वाले वर्कर सर्च में ऊपर आ जाते हैं। अच्छी रेटिंग वाले वर्करों को हर महीने 25-30 हजार रुपये की कमाई आराम से हो जाती है।

इंस्टैंट हेल्प ऐप FAQs

इंस्टैंट हेल्प ऐप क्या है?

इंस्टैंट हेल्प ऐप स्विगी, जमैटो, ब्लिंकइट, अर्बन कंपनी जैसा प्लैटफॉर्म है। जिस तरह स्विगी-जमैटो के तुरंत खाना मंगवाते हैं, ब्लिंकइट से सामान मंगवाते हैं, अर्बन कंपनी से घर के बड़े कामों के लिए प्लंबर, इंजीनियर बुलाते हैं, उसी तरह घर के छोटे-छोटे कामों के लिए इंस्टैंट हेल्प की मदद ली जाती है। इंस्टैंट हेल्प ऐप पर आप खाना बनाने में मदद, घर में झाड़ू लगाने जैसे छोटे-छोटे कामों के लिए हेल्पर बुक किए जाते हैं।

इंस्टैंट हेल्प ऐप वर्कर की कमाई कितनी है?

इंस्टैंट हेल्प वर्कर की कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कितना काम मिलता है। सर्विस लेने वाले ऐप पर वर्कर की रेटिंग करते हैं। अच्छी रेटिंग वाले वर्करों को ज्यादा काम मिलता है और वो ज्यादा कमाई कर पाते हैं। अनुमान के अनुसार, एक अच्छी रेटिंग वाला वर्कर महीने में 25 से 30 हजार रुपये के आसपास कमा लेता है।

क्या इंस्टैंट हेल्प ऐप सुरक्षित है?

हां, इंस्टैंट हेल्प ऐप पर लिस्टेड वर्कर्स प्रफेशलनी ट्रेंड होते हैं और प्लैटफॉर्म्स उनका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन करने के बाद ही लिस्ट करता है।

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