इंश्योरेंस क्लेम मिलने में हो रही है देरी? जानें लोकपाल से शिकायत का तरीका और कानूनी अधिकार

Insurance ombudsman complaint process and limit: बीमा क्लेम अटकने पर परेशान न हों। आप बीमा लोकपाल या IRDAI से मदद ले सकते हैं। साथ ही, मल्टी-ईयर रिन्यूअल और क्रिटिकल इलनेस के सर्वाइवल पीरियड जैसे नियमों को समझकर आप अपना फायदा बढ़ा सकते हैं।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड22 Dec 2025, 08:12 PM IST
इंश्योरेंस क्लेम में देरी हो रही हो तो क्या करें? (सांकेतिक तस्वीर)
इंश्योरेंस क्लेम में देरी हो रही हो तो क्या करें? (सांकेतिक तस्वीर)

How to file complaint for insurance claim delay: कई बार इंश्योरेंस पॉलिसी होने के बावजूद क्लेम मिलने में काफी समय लग जाता है या कंपनी आनाकानी करने लगती है। ऐसी स्थिति में ग्राहकों के पास अपनी शिकायत दर्ज कराने और कानूनी रास्ता अपनाने के कई विकल्प मौजूद हैं। अगर आप सही प्रक्रिया जानते हैं, तो न सिर्फ अपना पैसा वापस पा सकते हैं बल्कि प्रीमियम पर छूट का लाभ भी उठा सकते हैं। आइए समझते हैं कि बीमा दावों से जुड़ी मुश्किलों को कैसे हल करें।

क्लेम में देरी होने पर यहां करें शिकायत

अगर आपका इंश्योरेंस क्लेम पेंडिंग है, तो सबसे पहले बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी को पत्र लिखें। इसमें अपने क्लेम की पूरी जानकारी दें। अगर वहां से समाधान नहीं मिलता, तो आप इरडाई (IRDAI) की शिकायत टीम से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, कानूनी रास्ता अपनाते हुए आप उचित अदालतों का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।

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बीमा लोकपाल से कब और कैसे मिलेगी मदद?

बीमा लोकपाल व्यक्तिगत बीमा, ग्रुप पॉलिसी और सूक्ष्म उद्यमों की शिकायतों की सुनवाई करता है। हालांकि, लोकपाल के पास जाने से पहले एक बात का ध्यान रखें कि वह अधिकतम 50 लाख रुपये तक के क्लेम से जुड़े मामले ही देख सकता है। अगर आपका क्लेम अमाउंट 50 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको सीधे अदालत जाना होगा।

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मल्टी-ईयर रिन्यूअल से बचाएं अपने पैसे

हेल्थ इंश्योरेंस को कई सालों के लिए एक साथ रिन्यू कराना काफी फायदेमंद होता है। बीमा कंपनियां अक्सर लंबी अवधि के प्रीमियम पर अच्छी छूट देती हैं। इसका एक बड़ा फायदा यह भी है कि पॉलिसी की अवधि के दौरान अगर प्रीमियम की दरें बढ़ती हैं, तो आप पर उसका असर नहीं पड़ता। मेडिकल महंगाई को देखते हुए तीन साल के लिए पॉलिसी रिन्यू करना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

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क्रिटिकल इलनेस बीमा में 'सर्वाइवल पीरियड' का नियम

गंभीर बीमारी के बीमा में क्लेम मिलने के लिए सर्ववाइवल रूल्स या सर्वाइवल पीरियड लागू होता है। इसमें बीमारी का पता चलने के बाद एक तय समय तक जीवित रहना जरूरी होता है। उदाहरण के लिए, अगर 1 जनवरी को बीमारी का पता चला और सर्वाइवल पीरियड छह महीने है, तो क्लेम 30 जून के बाद ही मिलेगा। अगर इस दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तो क्लेम नहीं मिलता। इसलिए हमेशा कम सर्वाइवल पीरियड वाली पॉलिसी चुननी चाहिए।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। बीमा संबंधित समस्याओं के लिए किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।

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