Investing in lands in India: जमीन खरीदने से पहले करें ये काम, मिलेगा बंपर फायदा

Investing in lands in India: भारत में जमीन में निवेश करना लॉन्ग टर्म में मोटा फायदा मिल सकता है। हालांकि इसमें कानूनी दांव पेंच भी सा्मने आ सकते हैं। इसमें मालिकाना हक, जोनिंग, लोकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टांप ड्यूटी, जैसी तमाम समस्याएं आ सकती है। 

Jitendra Singh
अपडेटेड15 Jan 2026, 05:46 PM IST
Investing in lands in India: जमीन खरीदने से पहले हर तरह की जांच पड़ताल जरूर करें।
Investing in lands in India: जमीन खरीदने से पहले हर तरह की जांच पड़ताल जरूर करें। (Livemint)

Investing in lands in India: आजकल कई लोग निवेश के मकसद से शहर से दूर कोई प्लॉट खरीद लेते हैं। लोगों को यह उम्मीद रहती है कि रिटायरमेंट के बाद यहीं घर बनाकर रहेंगे। तबतक जमीन के दाम भी दोगुना हो जाएंगे। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है। कभी-कभी जमीन में बिना जांच पड़ताल निवेश करने से धोखा भी मिल सकता है। लिहाजा जब भी कोई प्लॉट खरीदें तो मालिकाना हक, जोनिंग, लोकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टांप ड्यूटी, मार्केट वैल्यू, विवाद, नाप-जोख, सरकारी मंजूरी और पर्यावरण संबंधी जांच पड़ताल जरूर कर लें। वरना जल्दबाजी में लिया गया फैसला घातक साबित हो सकता है।

ऐसे में अगर आप भी प्लॉट लेने का मन बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों को पहले ही जांच लेना बेहतर होता है। यहां हम आपको बता रहे हैं भारत में प्लॉट खरीदने से पहले ध्यान रखने लायक 10 अहम बातें, जो आपके पैसे और समय दोनों की बचत करेंगी।

1. जमीन का इस्तेमाल और जोनिंग

भारत में हर जमीन किसी खास उपयोग के लिए तय होती है, जैसे रिहायशी, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल या कृषि। गलत जोनिंग वाली जमीन खरीदने पर आपके प्लान अटक सकते हैं।

क्या करें – स्थानीय नगर निगम या पंचायत से जोनिंग चेक करें। अगर कृषि जमीन है, तो देखें कि उसे नॉन-एग्रीकल्चरल में बदला जा सकता है या नहीं।

2. मालिकाना हक और टाइटल साफ है या नहीं

सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि जमीन बेचने वाले के पास उस प्लॉट का साफ़ और कानूनी टाइटल है या नहीं। इसका मतलब यह कि उस पर कोई पुराना केस, कर्ज या विवाद न हो।

क्या करें – सेल डीड, टाइटल डीड और एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट की जांच करें। कम से कम 12–30 साल का रिकॉर्ड देखना चाहिए। वकील की मदद लेना सबसे सुरक्षित रहेगा।

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3. स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन खर्च

प्लॉट खरीदने पर आपको सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस भी देनी पड़ती है। आमतौर पर स्टांप ड्यूटी 5–7% और रजिस्ट्रेशन फीस 1% होती है। कुछ राज्यों में महिलाओं के लिए छूट भी मिलती है।

4. प्लॉट का नाप-जोख और सीमाएं

कई बार डीड में लिखे एरिया और जमीन पर असली माप में फर्क निकल आता है। लिहाजा लाइसेंस प्राप्त सर्वेयर से नाप करवाएं और GPS या गांव के सर्वे रिकार्ड से मैच करें।

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5. मार्केट वैल्यू और ग्रोथ

आज प्लॉट कितने का है और आगे उसकी कीमत कितनी बढ़ सकती है, यह सबसे अहम सवाल है। अपने आसपास के रेट्स और सरकारी सर्कल रेट (गाइडलाइन वैल्यू) चेक करें। ऐसे इलाके चुनें जहां आने वाले समय में डिवेलपमेंट प्लान हो।

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