Investment Tips: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को कई बार भ्रम की स्थिति से गुजरना पड़ता है। जैसे म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय कई स्कीम में दो ऑप्शन नजर आते हैं। पहला ग्रोथ ऑप्शन, और दूसरा, ‘इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विदड्रॉल’ (IDCW) का विकल्प। कई निवेशक यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें इनमें से कौन सा प्लान सेलेक्ट करना चाहिए। अगर आप भी इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। अच्छी तरह सोच समझकर ही किसी भी तरह के विकल्प पर विचार विमर्श करना चाहिए। आइये सबसे ग्रोथ और डिविडेंड में अंतर क्या है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, ग्रोथ ऑप्शन में निवेशक के निवेश से जो मुनाफा बनता है, उसे नहीं दिया जाता है। बल्कि इस मुनाफे को दोबारा उसी म्यूचुअल फंड में जोड़ दिया जाता है। इससे निवेशक को मुनाफे पर मुनाफा मिलने लगता है। ऐसे में कंपाउंडिंग का बेनिफिट मिलने लगता है। समय के साथ कंपाउंडिंग की यह ताकत आपकी पूंजी को तेजी से बढ़ाने में काम आती है। यही वजह है कि ग्रोथ ऑप्शन में फंड की नेट एसेट वैल्यू यानी NAV ज्यादा तेजी से बढ़ती है।
डिविडेंड
पहले डिविडेंड ऑप्शन कहा जाता था, अब इसे ‘इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विदड्रॉल’ यानी IDCW नाम से जाना जाता है। इसमें फंड से मिलने वाला मुनाफा समय-समय पर निवेशकों में बांट दिया जाता है। हालांकि यह पेआउट निश्चित नहीं होता है। लिहाजा जब भी इस तरह से पेमेंट किया जाता है तो फंड की NAV घट जाती है। कहने का मतलब ये हुआ कि लंबे समय में आपकी पूंजी उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाती जितनी ग्रोथ ऑप्शन में बढ़ सकती है।
जानिए नाम में क्यों हुआ बदलाव
SEBI ने डिविडेंड ऑप्शन का नाम बदलकर IDCW रख दिया है। इसमें नाम से ही पत चल जाता है कि इसमें आपको मिलने वाला पेआउट फंड के मुनाफे और आपकी खुद की पूंजी से ही आता है। यह कोई गारंटीड इनकम जैसा विकल्प नहीं है।
जानिए आपके लिए कौन सा ऑप्शन है बेहतर
अगर आप रिटायर्ड हैं या किसी भी वजह से रेगुलर इनकम हासिल करना आपके लिए जरूरी है तो आपके लिए IDCW बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। लेकिन अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं और चाहते हैं कि आपका पैसा लगातार बढ़ता रहे, तो ग्रोथ ऑप्शन सही साबित हो सकता है।