Gold Jewellery Investment: भारत में सोने को न सिर्फ एक सुरक्षित निवेश (Safe Investment) ऑप्शन है, बल्कि इसे खरीदना भी बेहद शुभ समझा जाता है। हालांकि, निवेश के नजरिए से गोल्ड ज्वेलरी (Gold Jewellery) खरीदना अब घाटे का सौदा साबित हो सकता है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी (KIE) के मैनेजिंग डायरेक्टर और को-हेड संजीव प्रसाद ने हाल ही में अनिंद्य भौमिक और सुनीता बलदावा के साथ मिलकर लिखे एक को-ऑर्टिकल में इस विषय पर अपनी राय दी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने में निवेश करने के इच्छुक लोगों के लिए ज्वेलरी खरीदने के बजाय गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) खरीदना या गोल्ड कॉइन, बार और ईंटों के माध्यम से फिजिकल इन्वेस्टमेंट करना ज्यादा समझदारी भरा कदम है।
ज्वैलरी में गोल्ड की नेट वैल्यू 60% ही
संजीव प्रसाद ने अपने नोट में साफ किया कि गोल्ड ज्वेलरी की खरीद कीमत के मुकाबले सोने का नेट वैल्यू केवल 60 से 70 प्रतिशत ही होती है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि ज्वेलरी की खरीद कीमत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हीरे या अन्य कीमती पत्थरों का होता है। इन पत्थरों के कमजोर प्रदर्शन के कारण ज्वेलरी पर होने वाला फायदा सीमित हो जाता है।
इस वजह से कम हो जाती है ज्वेलरी की वैल्यू
प्रसाद ने कहा, घरेलू लोगों की तरफ से मेकिंग चार्ज और कीमती पत्थरों के लिए चुकाए जाने वाले प्रीमियम को देखते हुए 'वेल्थ एफर्ट्स' काफी कम हो सकता है। दरअसल, इन रत्नों की कीमतों में लगातार करेक्शन हुआ है, जिससे सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से होने वाले फायदे की कुछ हद तक भरपाई हो गई होगी।
कोटक के नोट में यह भी कहा गया है कि परिवारों को अपनी खरीद पर भी फायदा मिल सके, इसके लिए सोने की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जरूरत होगी, बशर्ते कि कीमती पत्थरों की कीमतें स्थिर रहें।
भारतीयों की सोने में बड़ी होल्डिंग
रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि भारतीय परिवारों ने लगभग 500 बिलियन डॉलर वैल्यू का सोना और कीमती पत्थर खरीदा है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) ने वित्त वर्ष 2021 से लेकर वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (H1FY26) के दौरान 200 बिलियन डॉलर की इक्विटी खरीदी है। इस दौरान भारतीय घरों में सोने की कुल होल्डिंग वित्त वर्ष 2014-15 में $694 बिलियन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 के अंत तक $2,113 बिलियन होने का अनुमान है।
कीमतों में उछाल से डिमांड घटी
वर्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के एक नोट के मुताबिक, सोने की मजबूत कीमतों के कारण अक्टूबर 2025 ओवरऑल गोल्ड ज्वेलरी की डिमांड में गिरावट आई। वहीं, दो दिग्गज बाजार भारत और चीन ने कीमतों में उछाल दर्ज किया।