2026 में आईपीओ बाजार में जबरदस्त हलचल रहने वाली है। प्राइम डेटाबेस के मुताबिक, लगभग 100 कंपनियां 1.4 लाख करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं। हालांकि, लिस्टिंग पर तुरंत मुनाफा कमाने की चाहत रखने वाले छोटे निवेशकों के लिए अब राह आसान नहीं दिख रही है। अनुभवी निवेशक और बाजार विशेषज्ञ अब अंधाधुंध निवेश के बजाय सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दे रहे हैं।
आईपीओ में निवेश का बदला गणित
दिल्ली के अनुभवी निवेशक गोपाल शर्मा का कहना है कि हर आईपीओ में पैसा लगाना समझदारी नहीं है। उनके मुताबिक, 10 में से कम से कम 7 आईपीओ से दूरी बनानी चाहिए। शर्मा मानते हैं कि आजकल कंपनियां अपने आईपीओ की कीमत बहुत ज्यादा रखती हैं। इससे बड़े निवेशकों (एंजेल और वेंचर कैपिटल) को तो बाहर निकलने का रास्ता मिल जाता है, लेकिन छोटे निवेशकों के लिए मुनाफे की गुंजाइश कम रह जाती है।
पेटीएम और रिलायंस पावर से मिला सबक
निवेशकों के लिए पेटीएम का आईपीओ एक बड़ा सबक रहा है। साल 2021 में भारी उत्साह के बीच आए इस आईपीओ ने लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को 27% का घाटा दिया था। गोपाल शर्मा जैसे कई निवेशक आज भी इसमें नुकसान झेल रहे हैं। इसी तरह साल 2008 में रिलायंस पावर के आईपीओ ने भी लिस्टिंग पर 17% की गिरावट के साथ निवेशकों को चौंका दिया था। ये उदाहरण बताते हैं कि भारी डिमांड के बावजूद लिस्टिंग पर नुकसान हो सकता है।
लिस्टिंग रिटर्न में आई बड़ी गिरावट
आंकड़ों पर गौर करें तो 2025 में आईपीओ से मिलने वाला औसत रिटर्न पिछले साल के मुकाबले 68% तक गिर गया है। अगर किसी निवेशक ने 2025 के सभी मुख्य आईपीओ में एक-एक लॉट खरीदा होता, तो उसे औसतन केवल 9.55% का लाभ होता। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान निफ्टी 50 ने 10.5% का बेहतर रिटर्न दिया है। यही वजह है कि चेन्नई के सेकर मारुडा गौंडर जैसे निवेशक अब आईपीओ के बजाय स्थापित कंपनियों के शेयरों पर भरोसा कर रहे हैं।
शेयर आवंटन की बढ़ती चुनौती
आजकल आईपीओ में इतने ज्यादा लोग आवेदन करते हैं कि शेयर मिलना किस्मत का खेल हो गया है। अगर कोई आईपीओ ओवरसब्सक्राइब होता है, तो लॉटरी के जरिए सिर्फ एक लॉट ही मिल पाता है। प्राइम डेटाबेस के एमडी प्रणव हल्दिया के अनुसार, 15,000 रुपये के निवेश पर अगर शेयर दोगुना भी हो जाए, तो 15,000 का ही मुनाफा होगा। यह छोटी राशि किसी निवेशक की वित्तीय स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं लाती है।
नुकसान न काटने की गलती और फोमो
सेबी के एक अध्ययन से पता चला है कि 23% निवेशक घाटा होने पर भी शेयर नहीं बेचते। वे इस उम्मीद में बैठे रहते हैं कि भाव बढ़ेगा, जिससे अक्सर नुकसान और बढ़ जाता है। बिहार में मुजफ्फरपुर के दीपक कुमार ने पेटीएम के शेयर गिरते समय नहीं बेचे, जिसका उन्हें आज भी मलाल है। वहीं, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे मामलों में निवेशकों ने लिस्टिंग पर मुनाफा नहीं वसूला और बाद में शेयर के दाम गिर गए। विशेषज्ञ कृष्णा रथ की सलाह है कि 'छूट जाने के डर' (FOMO) में आकर निवेश न करें क्योंकि फिलहाल बाजार का मूल्यांकन काफी ज्यादा है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।