Iran Currency collapse: भारत के ₹847 ईरान में 1 करोड़ रियाल के बराबर, देश की डूबती अर्थव्यवस्था की क्या है वजह?

Iran Currency collapse: ईरान की करेंसी रियाल इतनी कमजोर हो गई है कि भारत के कुछ सौ रुपये वहां करोड़ों रियाल के बराबर हैं। विरोध प्रदर्शनों और अमेरिकी दबाव से हालात और बिगड़े हैं। लोग महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड15 Jan 2026, 08:31 PM IST
भारत का एक रुपया ईरान में कितना होगा? (सांकेतिक तस्वीर)
भारत का एक रुपया ईरान में कितना होगा? (सांकेतिक तस्वीर)(AP)

Iran Currency collapse: ईरान की अर्थव्यवस्था इस वक्त गहरे संकट में है। वहां की करेंसी रियाल इतनी कमजोर हो चुकी है कि भारत का रुपया हजारों गुना ज्यादा ताकतवर दिख रहा है। हालात ऐसे हैं कि भारत के कुछ सौ रुपये ईरान में करोड़ों रियाल के बराबर हो जाते हैं।

ईरान की नेशनल करेंसी रियाल विदेशी करेंसी के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक दबाव ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।

भारतीय रुपया हजारों गुना मजबूत

ताजा वैल्यू के मुताबिक, इस वक्त भारत का 1 रुपया करीब 11,797 से 12,600 ईरानी रियाल के बराबर चल रहा है। यानी भारत के सिर्फ 100 रुपये ईरान में 11 लाख से ज्यादा रियाल बन जाते हैं। ये तुलना बताती है कि ईरानी करेंसी कितनी तेजी से अपनी कीमत खो चुकी है।

847 रुपये में 1 करोड़ रियाल

अगर गिनती करें तो ईरान के 1 करोड़ रियाल, भारत के करीब 847 रुपये के बराबर बैठते हैं। मतलब कुछ सौ रुपये लेकर कोई भी भारतीय कागजों में ईरान का करोड़पति बन सकता है। लेकिन सच्चाई ये है कि इन करोड़ों रियाल से वहां बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

डॉलर-यूरो के सामने रियाल की पस्त हालत

13 जनवरी को Bonbast.com पर ट्रैक की गई दरों के मुताबिक, ईरान के ओपन मार्केट में 1 अमेरिकी डॉलर करीब 14 लाख 29 हजार रियाल तक पहुंच गया, जबकि 1 यूरो लगभग 16 लाख 68 हजार रियाल में ट्रेड होता दिखा। यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है।

क्यों गिरा रियाल?

दिसंबर 2025 के आखिर में रियाल की गिरावट और तेज हो गई। जैसे ही मुद्रा कमजोर हुई, इम्पोर्टेड सामान की कीमतें आसमान छूने लगीं। खाने-पीने की चीजें, दवाइयां और रोजमर्रा का सामान आम लोगों की पहुंच से बाहर होने लगा। गुस्साए व्यापारियों और दुकानदारों ने सड़कों पर उतरकर विरोध शुरू कर दिया।

जो विरोध पहले महंगाई और व्यापार की परेशानी तक सीमित था, वह धीरे-धीरे अयातुल्ला अली खामेनेई की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन में बदल गया। हालात इतने बिगड़े कि कई शहरों में बाजार और कारोबार प्रभावित होने लगे।

ईरान से व्यापार करने वालों पर 25% टैरिफ

इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के व्यापारिक साझेदारों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की। उन्होंने ऐलान किया कि जो भी देश ईरान के साथ कारोबार करेगा, उसे अमेरिका के साथ अपने बिजनेस पर 25 फीसदी टैरिफ देना होगा। इस बयान ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ा दिया।

आम नागरिकों पर असर

रियाल की गिरती कीमत का सबसे बड़ा असर आम ईरानी नागरिकों पर पड़ रहा है। कमाई वही है, लेकिन खर्च कई गुना बढ़ चुका है। लोग अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और भविष्य को लेकर चिंता और गहरी होती जा रही है।

कुछ सौ रुपये में करोड़पति बनने की कहानी सुनने में भले ही रोमांचक लगे, लेकिन ईरान के लिए यह आर्थिक तबाही की चेतावनी है। जब तक अर्थव्यवस्था संभलती नहीं, तब तक रियाल की यह गिरावट आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ाती रहेगी।

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