
IRDAI Committee: हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहिए, यह सही है। लेकिन यह भी सही है कि कई बार इंश्योरेंस कंपनियां गाढ़े वक्त में धोखा दे देती हैं। भारत में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के आंकड़े बताते हैं कि क्लेम सेटलमेंट रेशियो तो ठीक है, लेकिन क्लेम की गई पूरी की पूरी रकम देने में कंपनियों का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। अब बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) का ध्यान इस कमी की ओर गया है तो उसने इस दिशा में सुधार के लिए एक समिति गठित कर दी है।
IRDAI की गठित समिति का मुख्य उद्देश्य हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट में मौजूद कमियों और अंतरालों की पहचान करना है। IRDAI के अध्यक्ष अजय सेठ ने कहा है हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट की संख्या तो अधिक है, लेकिन निपटान की गई राशि अपेक्षा से कम है। खासकर, फुल सेटमेंट के मामले में तो कंपनियों की ओर से दी गई रकम उतनी नहीं होती है जितनी की होनी चाहिए। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी IRDAI बारीकी से निगरानी कर रहा है।
बीमा लोकपाल दिवस पर इरडाई के चेयमरैन अजय सेठ ने कहा, 'हेल्थ इंश्योरेंस में हम लगातार यह अंतराल देख रहे हैं। क्लेम सेटलमेंट की संख्या तो ऊंची है, लेकिन कभी-कभार सेटल्ड अमाउंट अपेक्षा से कम है, विशेषकर फुल सेटलमेंट के मामले में। इसकी हम निगरानी कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बीमा भरोसा प्लैटफॉर्म से 2.57 लाख बीमाधारकों ने शिकायतें दर्ज कीं। इनमें से 99% से अधिक शिकायतों का समाधान किया गया है। इरडाई के चेयरमैन ने कहा, 'लेकिन हमें इन औसत उपलब्धियों से आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए।'
दरअसल, भारत में इंश्योरेंस लेने का चलन अब भी बहुत कम है। ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा के लिए ज्यादा से ज्यादा लोग इंश्योरेंस लें, इसकी चौतरफा कोशिश हो रही है। 'वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा' का लक्ष्य पूरा हो सके, इसके लिए इंश्योरेंस सेक्टर की कमियों की पहचान करके उन्हें दूर करने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में इरडाई ने भी हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर को और ज्यादा लुभावना बनाने के लिए क्लेम सेटलमेंट अमाउंट को अपेक्षा के अनुरूप पहुंचाने के रास्ते सुझाने के लिए समिति का गठन किया है।
IRDAI डिजिटल एक्सेस का भी विस्तार कर रहा है ताकि बीमा खरीदना, सर्विस लेना और क्लेम करना अधिक सुविधाजनक हो सके। यह प्रॉडक्ट डिजाइन में बीमा कंपनियों को अधिक लचीलापन देकर इनोवेशन को बढ़ावा दे रहा है, छोटे-छोटे बीमा और समावेशी मॉडल को भी प्रोत्साहित कर रहा है और कम्यूनिकेशन आसान बनाने पर जोर दे रहा है। उम्मीद है कि ऐसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों, अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों और महिलाओं के बीच बीमा की पहुंच बढ़ा सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। निवेश से जुड़ा निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। मिंट हिंदी आपके किसी भी निवेश निर्णय से जुड़े परिणामों के लिए जिम्मेदार नहीं है।
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