Health Insurance Claim Lapses: हम हेल्थ इंश्योरेंस इसलिए लेते हैं ताकि मुश्किल वक्त में काम आ सके और हमें अपनी बचत खर्च न करनी पड़े। लेकिन सोचिए, अगर आपकी बीमा कंपनी ही क्लेम सेटलमेंट के दौरान पारदर्शिता न बरते और आपको सही जानकारी न दे, तो क्या होगा? इंश्योरेंस सेक्टर की रेगुलेटर भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने ऐसे ही एक गंभीर मामले में सख्त एक्शन लिया है।
IRDAI ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस की गंभीर खामियों को देखते हुए कंपनी पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और साफ कर दिया है कि पॉलिसीधारकों के अधिकारों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किन वजहों से हुई कार्रवाई?
15 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में IRDAI ने बताया कि रिमोट इंस्पेक्शन के दौरान केयर हेल्थ इंश्योरेंस में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई। शिकायत निपटान, साइबर सुरक्षा, क्लेम सेटलमेंट, री-इंश्योरेंस अकाउंटिंग और बिना पहचान वाले डिपॉजिट को लेकर नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया।
IRDAI ने पाया कि जब किसी पॉलिसीधारक की शिकायत या क्लेम खारिज होता था, तो कंपनी उसे यह नहीं बताती थी कि वह इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के पास जा सकता है। पत्रों में सिर्फ कस्टमर केयर नंबर, ईमेल और एक सामान्य लिंक दिया जाता था। रेगुलेटर ने कहा कि इससे पॉलिसीधारकों पर अनावश्यक बोझ पड़ा और उन्हें सही शिकायत मंच तक पहुंचने में दिक्कत हुई।
पारदर्शिता पर सवाल
सबसे गंभीर खामी क्लेम सेटलमेंट में पाई गई। कई कैशलेस क्लेम मामलों में मरीज या अटेंडेंट के सिग्नेचर नहीं थे, अस्पताल द्वारा दिए गए डिस्काउंट बिल में साफ नहीं दिखाए गए और क्लेम अमाउंट में कटौती की वजहें पॉलिसीधारकों को ठीक से नहीं बताई गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ 31 फीसदी मामलों में जरूरी सिग्नेचर मौजूद थे। IRDAI ने कहा कि ईमेल लॉग दिखाना पर्याप्त सबूत नहीं है और यह रवैया पारदर्शिता के खिलाफ है।
साइबरसिक्योरिटी और अकाउंटिंग पर भी आपत्ति
रेगुलेटर ने यह भी नोट किया कि साइबर सुरक्षा से जुड़ी कमजोरियों को तय समय में ठीक नहीं किया गया। इसके अलावा री-इंश्योरेंस अकाउंटिंग के तरीके ऐसे थे, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति हकीकत से बेहतर दिखती थी। साथ ही 1.06 करोड़ रुपये के प्रस्ताव डिपॉजिट को लंबे समय तक सही खाते में ट्रांसफर नहीं किया गया।
केयर हेल्थ ने दी ये सफाई
कंपनी ने जवाब में कहा कि अब शिकायत पत्रों में ओम्बड्समैन की पूरी जानकारी दी जा रही है। साइबर सुरक्षा में देरी को सिस्टम की जटिलता बताया गया। क्लेम सेटलमेंट को लेकर कंपनी का कहना था कि ग्राहकों को ईमेल में शामिल किया जाता है और अस्पतालों के साथ तकनीकी दिक्कतें चल रही हैं। री-इंश्योरेंस को लेकर भी पुराने सिस्टम बंद करने की बात कही गई।
IRDAI का फैसला
IRDAI ने क्लेम सेटलमेंट और पारदर्शिता से जुड़ी खामियों को सबसे गंभीर मानते हुए 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। बाकी मामलों में चेतावनी और एडवाइजरी जारी की गई, साथ ही साफ कहा गया कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराई गई तो और कड़ी कार्रवाई हो सकती है। IRDAI ने कंपनी को 45 दिनों में जुर्माना भरने और 90 दिनों में एक्शन-टेकन रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।