DigiLocker असली है या फर्जी? इन सिंपल तरीकों से चेक करें ऐप, नहीं होगा कोई फ्रॉड, जानिए डिटेल में

DigiLocker एक सुरक्षित डिजिटल वॉलेट है, लेकिन फर्जी ऐप्स यूजर्स की जानकारी चुराने का खतरा बढ़ाते हैं। असली ऐप MeitY द्वारा विकसित है। ऐसे में इसे केवल आधिकारिक स्रोतों से डाउनलोड करें।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड3 Dec 2025, 03:02 PM IST
DigiLocker असली है या फर्जी? इन सिंपल तरीकों से चेक करें ऐप, नहीं होगा कोई फ्रॉड, जानिए डिटेल में
DigiLocker असली है या फर्जी? इन सिंपल तरीकों से चेक करें ऐप, नहीं होगा कोई फ्रॉड, जानिए डिटेल में

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने हाल ही में गूगल प्ले स्टोर पर दिख रहे फर्जी डिजीलॉकर (DigiLocker) ऐप्स को लेकर एक जरूरी चेतावनी जारी की है। ये नकली ऐप्स लोगों की व्यक्तिगत जानकारी और दस्तावेज चुराने के लिए बनाए गए हैं, जिससे पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा काफी बढ़ जाता है।

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DigiLocker, जो डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का हिस्सा है, एक सुरक्षित डिजिटल वॉलेट है जिसमें भारतीय नागरिक अपने सरकारी दस्तावेज जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, पैन कार्ड, आधार कार्ड और शिक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन साइबर अपराधी इसके नाम और लोगो से मिलते-जुलते नकली ऐप्स बना रहे हैं ताकि लोगों को भ्रमित कर सकें।

DigiLocker से खतरा क्यों है?

DigiLocker के आधिकारिक ऐप को National e-Governance Division (NeGD) तैयार और संचालित करता है और यह पेपरलेस गवर्नेंस को बढ़ावा देता है। लेकिन नकली ऐप्स गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करते हैं। इन्हें इस्तेमाल करने पर उपयोगकर्ताओं का डेटा चोरी हो सकता है और उनकी पहचान या वित्तीय जानकारी गलत हाथों में जा सकती है।

ये फर्जी ऐप्स आपकी लॉगिन जानकारी चुरा सकते हैं, विज्ञापन दिखाने वाले सॉफ़्टवेयर की तरह काम कर सकते हैं या कुछ मामलों में आपके फोन में रैनसमवेयर भी डाल सकते हैं। DigiLocker में रखे जाने वाले दस्तावेज बेहद संवेदनशील होते हैं, इसलिए इस खतरे को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सही DigiLocker ऐप कैसे पहचानें?

1. डेवलपर का नाम चेक करें: असली DigiLocker ऐप MeitY, Government of India द्वारा विकसित है। यदि कोई अन्य डेवलपर दिखे तो ऐप फर्जी हो सकता है।

2. केवल आधिकारिक स्रोतों से डाउनलोड करें: यदि ऐप स्टोर पर भ्रम हो रहा हो, तो आधिकारिक वेबसाइट digilocker.gov.in पर जाएं। यहां Google Play Store और Apple App Store के असली डाउनलोड लिंक उपलब्ध हैं।

3. डाउनलोड संख्या देखें: असली ऐप के डाउनलोड 1 लाख से 5 लाख के बीच होते हैं। फर्जी ऐप्स आमतौर पर 10,000 से 50,000 डाउनलोड दिखाते हैं।

4. ब्रांडिंग और प्रमाणिकता जांचें: हालांकि नकली ऐप्स असली जैसे लोगो का उपयोग कर सकते हैं, परंतु डेवलपर नाम और प्रमाणिक बैज देखकर असली ऐप पहचान सकते हैं।

अगर आपने गलती से नकली ऐप इंस्टॉल कर लिया है तो तुरंत ऐप डिलीट करें और सभी सरकारी और लिंक्ड अकाउंट्स के पासवर्ड बदलें। यह कदम नुकसान कम करने के लिए बेहद जरूरी है।

जरूरी साइबर सुरक्षा उपाय

  • जहां संभव हो दो-स्तरीय लॉगिन (2FA) सक्षम करें
  • अपने अकाउंट्स पर नजर रखें और संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत कार्रवाई करें
  • फोन को हमेशा नए सुरक्षा अपडेट के साथ रखें
  • ऐप्स को अनावश्यक परमिशन न दें
  • डिजिटल इंडिया सेवाओं के लिए सिर्फ आधिकारिक स्रोतों का ही इस्तेमाल करें

साइबर अपराधियों के निशाने पर क्यों है डिजीलॉकर?

दरअसल, DigiLocker में वे दस्तावेज रखे होते हैं जो पहचान की चोरी, वित्तीय लेन-देन में धोखाधड़ी और सरकारी सेवाओं में अनधिकृत पहुंच के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या के कारण साइबर अपराधियों के लिए यह आकर्षक लक्ष्य बन चुका है।

सरकार ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने और केवल असली ऐप का उपयोग करने की सलाह दी है। असली DigiLocker ऐप पूरी तरह मुफ्त है, केवल MeitY, Government of India द्वारा बनाया गया है और सिर्फ आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। अगर ऐप इनमें से किसी भी मानक पर खरा नहीं उतरता, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

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