
How to invest in Gold and Silver: आज, बुधवार को सोने-चांदी का भाव फिर से चढ़ गया। देश में सोने प्रति 10 ग्राम 5,170 रुपये महंगा होकर 1,58,990 रुपये के भाव को छू लिया तो चांदी प्रति किलो 17,260 रुपये महंगा होकर 2,85,150 रुपये के भाव तक पहुंच गया। इस तरह, एक दिन में सोना-चांदी का भाव क्रमशः 3.360 पर्सेंट और 6.440 पर्सेंट चढ़ गया। यानी सोना के मुकाबले आज चांदी में ज्यादा चमक आई।
लेकिन क्या इन बहुमूल्य धातुओं में तेजी आगे भी बरकरार रहेगी? क्या अमेरिका से ट्रेड डील होने के बाद भी सोना-चांदी बेहतर में निवेश करते रहना होशियारी होगी या फिर यह रणनीति गच्चा आगे चलकर गच्चा दे देगी? ऐसे प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि पिछले सप्ताह ही सोना-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट आती रही।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में कमोडिटी रिसर्च के हेड हारीश वी कहते हैं कि पिछले सप्ताह सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट तात्कालिक थी। उन्होंने कहा, 'सोना और चांदी की कीमतें पिछले सप्ताह की ऐतिहासिक गिरावट के बाद स्थिर हो रही हैं। ये दोनों धातुएं फिर से महंगी होंगी क्योंकि इनकी महंगाई के सारे कारक अभी भी मौजूद हैं।'
बिजनेस न्यूज वेबसाइट इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स में असोसिएट डायरेक्टर तन्वी कंचन की राय दी गई है। कंचन कहती हैं कि व्यापार के रास्ते से बाधाएं हटने पर अक्सर सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश के प्रति लोगों की दिलचस्पी घटती है, लेकिन वैश्विक स्तर पर यही देखा जा रहा है कि इससे सोने की कीमतों में खास गिरावट नहीं आ रही है। कंचन कहती हैं, 'भू-राजनीतिक तनावों के घटने से सुरक्षित निवेशों में कमी आती है, हालांकि, यह कमी सीमित ही रहेगी क्योंकि दाम गिरने के बाद खुदरा और संस्थानिक खरीदार सोने पर टूट पड़ते हैं।'
वहीं, मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) में ईटीएफ एंड फंड मैनेजर के हेड सिद्धार्थ श्रीवास्तव को भी ऐसी कोई वजह नहीं दिखती है जिससे की लॉन्ग टर्म में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आ जाए। वह कहते हैं, ‘भू-राजनीतिक तनावों में कमी से बहुमूल्य धातुओं की कीमतें गिरती हैं, लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंक स्वर्ण भंडार बढ़ा रहे हैं, निवेशकों में सोने के प्रति आकर्षण बढ़ ही रहा है जबकि चांदी कई उद्योगों में उपयोगी हो गई है।’
स्टेबल मनी के को-फाउंडर और सीईओ सौरभ जैन तो कहते हैं कि भारत-अमेरिका का ट्रेड टेंशन घटने या खत्म होने से चांदी की कीमतें और बढ़ेंगी ही क्योंकि अब टैरिफ घट जाएगा और व्यापार सुलभता बढ़ेगी। उन्होंने कहा, 'विशेष रूप से चांदी की कीमतें इसलिए बढ़ेंगी क्योंकि ट्रेड डील से उद्योगों को ताकत मिलेगी और वहां चांदी की खपत बढ़ जाएगी। वहीं, व्यापार में तेजी से लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो सोने की खरीद भी बढ़ेगी।'
स्क्रिपबॉक्स के फाउंडर और सीईओ अतुल सिंघल का भी मानना है कि ट्रेड डील से चांदी ज्यादा चमकेगी क्योंकि उद्योगों में इसकी मांग बढ़ेगी। अगर औद्योगिक मांग नहीं भी बढ़ी, तब भी लॉन्ग टर्म में सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और जियोपॉलिटिकल जोखिम दोनों धातुओं की कीमतें गिरने नहीं देंगे।
ऋद्धिसिद्धि बुलियंस लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्विराज कोठारी का कहना है कि सोने के दाम में हल्की-फुल्की बढ़त बनी रहेगी, लेकिन औद्योगिक मांग में तेजी के कारण चांदी की कीमतों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। ऐसे में मीडियम से लॉन्ग टर्म के निवेश के लिहाज से चांदी बेहतरीन है। अतुल सिंघल भी कहते हैं कि चांदी तो सोने से भी ज्यादा रिटर्न दे सकती है, लेकिन उसमें जोखिम भी ज्यादा है।
सिद्धार्थ श्रीवास्तव कहते हैं कि सोना-चांदी में निवेश लॉन्ग टर्म के लिहाज से करना ही उचित है। वो कहते हैं कि पिछले सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों आई बड़ी गिरावट ही सतर्कता की सीख लेने के लिए काफी है। वहीं, कंचन कहती हैं कि सोना और चांदी के दाम बढ़ने के बाद फिर से निवेशक उन्हें बेचकर मुनाफा कमाएंगे, तब कीमतें फिर गिरेंगी।
उनकी राय है कि सोने-चांदी में निवेश ईटीएफ या डिजिटल प्लैटफॉर्म के जरिए करना ज्यादा समझदारी है बजाय असल में सोना-चांदी खरीदने के। उनका मानना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील हो गई तो अब निवेशक मजबूरी में सोना-चांदी की तरफ नहीं बढे़ंगे बल्कि रणनीतिक तौर पर लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की तरफ ही जाएंगे।
| ईटीएफ | कीमतें (रुपये में) |
|---|---|
| आईसीआईसीआई सिल्वर ईटीएफ | 277.99 |
| टाटा सिल्वर ईटीएफ | 27.45 |
| निप्पॉन गोल्ड ईटीएफ | 267.44 |
| एचडीएफसी सिल्वर ईटीएफ | 268.52 |
| एसबीआई सिल्वर ईटीएफ | 273.8 |
| ईटीएफ | कीमतें (रुपये में) |
|---|---|
| आईआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ | 134.67 |
| टाटा गोल्ड ईटीएफ | 15.24 |
| निप्पॉन गोल्ड ईटीएफ | 129.8 |
| एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ | 134.1 |
| एसबीआई गोल्ड ईटीएफ | 133.98 |
उधर, सौरभ जैन सोना-चांदी में एसआईपी के जरिए निवेश करने की सलाह देते हैं। वो कहते हैं कि इससे रोज-रोज के उतार-चढ़ाव के कारण फैसले लेने में उहापोह से बचा जा सकेगा। जैन का मानना है कि एसआईपी के जरिए निवेश करने का एक फायदा यह भी है कि आप जल्दी प्रॉफिट बुकिंग की नहीं सोचेंगे और लगातार निवेश करते रहेंगे जिससे आगे चलकर आपके पास बड़ी संपत्ति बन जाएगी।
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