ITR Deadline: टैक्सपेयर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए मंगलवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। अब जिन टैक्सपेयर्स के खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी है, उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के लिए एक महीने का और वक्त मिल गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2025 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2025 कर दी है।
तीन हाईकोर्ट एक लाइन पर, CBDT पर दबाव
गुजरात हाईकोर्ट पहले ही ऐसा आदेश दे चुका था कि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (TAR) और ITR के बीच कम से कम एक महीने का गैप होना चाहिए। अब जब पंजाब-हरियाणा और हिमाचल हाईकोर्ट ने भी वही बात दोहराई, तो CBDT पर देशभर में एक समान एक्सटेंशन देने का दबाव बढ़ गया है। अगर CBDT ने जल्द ही सर्कुलर जारी किया, तो पूरे देश के टैक्सपेयर्स को राहत मिल सकती है।
कैसे शुरू हुआ मामला?
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में टैक्स प्रोफेशनल्स और एसोसिएशनों ने कुल पांच याचिकाएं दाखिल की थीं, जिन्हें मिलाकर एक केस बनाया गया। सुनवाई के दौरान CBDT के वकील कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। तब कोर्ट ने सीधे आदेश देते हुए कहा कि जब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की तारीख 31 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है, तो ITR फाइलिंग की डेडलाइन स्वाभाविक रूप से 30 नवंबर तक होनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भी एडवोकेट विशाल मोहन की याचिका पर यही फैसला सुनाया। कोर्ट्स ने साफ कहा कि टैक्स ऑडिट और ITR के बीच कम से कम एक महीने का अंतर जरूरी है।
कौन से टैक्सपेयर्स को मिलेगी राहत?
ये राहत उन टैक्सपेयर्स को मिली है जिनके खातों का ऑडिट अनिवार्य होता है, जैसे कंपनियां, प्रॉप्राइटरशिप फर्म्स और पार्टनरशिप फर्म के वर्किंग पार्टनर्स। इनके लिए अब ITR फाइलिंग की नई डेडलाइन 30 नवंबर 2025 तय की गई है।
CBDT की खामोशी पर कोर्ट की सख्ती
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान CBDT को फटकार लगाई और कहा कि अगर विभाग अदालतों के आदेशों का पालन नहीं करता, तो यह कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) मानी जाएगी। अब जब तीन हाईकोर्ट एक जैसी राय दे चुके हैं, तो ये मामला राष्ट्रीय स्तर पर अहम बन गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट में भी इसी मुद्दे पर चार्टर्ड अकाउंटेंट राम बजाज ने याचिका दायर की है। वहां सुनवाई 30 अक्टूबर को होनी है। ऐसे में उम्मीद है कि और भी हाईकोर्ट्स इस दिशा में एकमत हो सकते हैं।
अगर ऐसा हुआ, तो लाखों टैक्सपेयर्स और सीए को न केवल राहत मिलेगी बल्कि फाइलिंग का दबाव भी काफी कम हो जाएगा।