ITR Filing 2025: इस साल रिफंड आने में देरी के आसार, जानिए ऐसा क्यों

ITR Filing 2025: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख करीब है। 15 सितंबर 2025 तक बिना किसी शुल्क के इनकम टैक्स रिटर्न भरा जा सकता है। अगर आप भी इनकम टैक्स रिटर्न भरने जा रहे हैं तो इस बार रिफंड में देरी हो सकती है। इसकी वजह ये है कि गहन जांच पड़ताल करके ही रिफंड दिया जा रहा है

Jitendra Singh
अपडेटेड9 Jul 2025, 10:00 PM IST
ITR Filing 2025: अब तक 75 लाख से अधिक रिटर्न फाइल किए जा चुके हैं।
ITR Filing 2025: अब तक 75 लाख से अधिक रिटर्न फाइल किए जा चुके हैं। (Hindustan)

ITR Filing 2025: अगर आपकी आय टैक्स स्लैब के दायरे में आती है, तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरना जरूरी है। अक्सर आईटीआर भरने में लोग चूक कर देते हैं। इससे आयकर नोटिस मिलने की आशंका बढ़ जाती है। इस बार आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर कर दी गई है। इस बीच रिफंड आने में इस बार देरी भी हो सकती है। इसकी वजह ये है कि इनकम टैक्स रिटर्न द्वारा रिटर्न फाइल करने में दी गई सभी जानकारियों की जांच बारीकी से कर रहा है। इससे यह माना जा रहा है कि रिफंड की प्रोसेसिंग में देरी होगी, जिससे रिफंड के पैसों पर ज्यादा ब्याज मिल सकता है।

अब तक 75 लाख से अधिक टैक्स पेयर्स रिटर्न दाखिल कर चुके हैं। रिफंड पाने के लिए रिटर्न की सही फाइलिंग और स्टेटस की निगरानी जरूरी है।टैक्सपेयर्स को घबराने की जरूरत नहीं, सही जानकारी देने पर रिफंड जरूर मिलेगा। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अभी तक करीब 71.1 लाख रिटर्न - ई-वेरीफाई किए जा चुके हैं।

रिफंड में देरी के आसा

रिटर्न फाइलिंग के लिए टैक्सपेयर्स ने कौन सा फार्म भरा है, इसकी जांच पड़ताल में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जुटा हुआ है। ITR-2 या ITR-3 फार्म की तुलना में ITR-1 (सहज) या ITR-4 जैसे फॉर्म आमतौर पर कम समय में प्रोसेस हो जाते हैं। अधिक रिफंड क्लेम में इनकम टैक्स विभाग द्वारा थोड़ी सख्ती से चेक एंड बैलेंस का रूख अपनाया जा सकता है। टैक्स रिटर्न में दी गई डेटा में किसी प्रकार की खामी जैसे इनकम या टैक्स क्रेडिट के मैच न करने की स्थिति में रिवेरीफिकेशन के लिए आयकर विभाग करदाता से पोस्ट के जरिए जरूरी दस्तावेज मांग सकता है।

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रिफंड में देरी पर मिल सकता है ब्याज

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 244A के तहत, अगर टैक्स रिफंड में देरी होती है, तो सरकार आपको हर महीने 0.5% ब्याज देगी। यह ब्याज उस दिन से गिना जाएगा, जब आपने रिटर्न फाइल किया है या असेसमेंट ईयर खत्म हुआ है। यह तब तक चलेगा जब तक रिफंड का भुगतान नहीं हो जाता है। अगर आपका 10,000 रुपये का रिफंड बनता है और सरकार ने 6 महीने बाद भुगतान किया, तो आपको 10,000 रुपये + 300 रुपये (6 महीने का 0.5% प्रतिमाह) = 10,300 रुपए मिलेंगे। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह ब्याज केवल उन्हीं मामलों में मिलेगा, जहां रिफंड अमाउंट आपके कुल टैक्स का 10 फीसदी से ज्यादा हो। रिफंड की रकम टैक्सपेयर की टैक्स देनदारी से 10 फीसदी से कम होने की स्थिति में रिफंड के पैसों पर ब्याज नहीं मिलता है।

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