नई दिल्ली: टैक्सपेयर्स रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख करीब आ रही है। लेकिन, अभी तक बहुत सारे टैक्सपेयर्स ने अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया है। आमतौर पर डेडलाइन करीब आने पर लोग रिटर्न भरते समय जल्दबाजी करते हैं, लेकिन यह जल्दबाजी टैक्स विभाग के नोटिस का कारण बन सकती है। इनकम टैक्स विभाग के पास आपकी कमाई और निवेश का पल-पल का हिसाब रहता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि आप अपने ITR में जो भी जानकारी दे रहे हैं, वह आपके टैक्स दस्तावेजों से पूरी तरह मेल खाती हो। इसके लिए आपको फॉर्म 16, फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) का मिलान करना बेहद जरूरी होता है। अगर इन तीनों में जरा सी भी गड़बड़ी हुई, तो आपकी परेशानी बढ़ सकती है।
फॉर्म 16, 26AS और AIS क्या होता है?
1.फॉर्म 16 को आपका एंप्लायर जारी करता है। इसमें आपकी सैलरी, उस पर कटे टैक्स (TDS) और टैक्स छूट के क्लेम का पूरा ब्योरा होता है। इसका पार्ट A टैक्स कटौती की जानकारी देता है और पार्ट B में कुल सैलरी का हिसाब होता है।
2.वहीं, दूसरा अहम दस्तावेज फॉर्म 26AS है। यह एक तरह से टैक्स विभाग के पास जमा आपका पासबुक है। इसमें पैन (PAN) कार्ड के जरिए कटे हर TDS, एडवांस टैक्स और सेल्फ असेसमेंट टैक्स की एंट्री होती है।
3.इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण दस्तावेज एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) होता है। इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट का यह डॉक्यूमेंट आपकी हर बड़ी वित्तीय गतिविधि जैसे- म्यूचुअल फंड निवेश, शेयर बाजार में खरीद-बिक्री, बैंक ब्याज और विदेशों में भेजे गए पैसों की जानकारी अपने पास रखता है।
इन तीनों दस्तावेजों का कैसे करें मिलान?
इन दस्तावेजों का मिलान करने के लिए सबसे पहले IT डिपॉर्टमेंट के पोर्टल से फॉर्म 26AS और AIS का लेटेस्ट वर्जन डाउनलोड करें। इसके बाद फॉर्म 16 में दर्ज सैलरी और कटे हुए टैक्स (TDS) के आंकड़ों की तुलना फॉर्म 26AS से करें। नौकरीपेशा लोगों के मामले में दोनों जगहों पर सैलरी और टीडीएस की रकम समान होनी चाहिए। इसके बाद, बैंक से मिले ब्याज या डिविडेंड जैसी अतिरिक्त आय को AIS और फॉर्म 26AS के जरिए चेक करें। अगर आपने साल के दौरान कोई एडवांस टैक्स चुकाया है, तो यह सुनिश्चित करें कि वह आपके ITR फॉर्म में सही जगह दर्ज हो।
छोटी सी चूक से मिल सकता है नोटिस
बता दें कि जब आपकी तरफ से दाखिल किए गए रिटर्न और टैक्स विभाग के पास मौजूद आंकड़ों में अंतर होता है, तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेता है। कई बार एंप्लायर की गलती से TDS देरी से जमा होता है, जिससे फॉर्म 16 और 26AS में अंतर आ जाता है। अगर इस मिसमैच को बिना सुधारे रिटर्न फाइल कर दिया जाए, रिफंड में देरी के साथ टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस भी आ सकता है।