ITR Refund Status: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साफ किया है कि रिफंड में देरी कुछ ही मामलों में हो रही है, जबकि ज्यादातर टैक्सपेयर्स को उनका बकाया पहले ही मिल चुका है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए 95% से ज्यादा इनकम टैक्स रिफंड क्लेम सफलतापूर्वक प्रोसेस हो चुके हैं।
कुछ टैक्सपेयर्स की चिंताओं के बावजूद, अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि रिफंड जानबूझकर नहीं रोका गया है। इसके बजाय, स्ट्रक्चरल टैक्स बदलावों, बेहतर डेटा एनालिटिक्स और नए टैक्स सिस्टम को ज्यादा अपनाने की वजह से इस साल कुल रिफ़ंड की रकम कम हुई है।
पिछले साल के मुकाबले कुल रिफंड कम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 11 जनवरी तक कुल इनकम टैक्स रिफंड ₹3.11 लाख करोड़ था, जो पिछले साल इसी समय में रिफंड किए गए ₹3.75 लाख करोड़ से लगभग 17% कम है। इस गिरावट के पीछे एक मुख्य कारण टैक्स काटने और कैलकुलेट करने के तरीके में बदलाव है, जिससे रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड की जरूरत कम हो जाती है।
जानिए रिफंड क्यों अटके हुए हैं?
टैक्स अधिकारियों ने बताया कि ऑटोमेटेड डेटा वेरिफिकेशन सिस्टम ने कुछ इनकम टैक्स रिटर्न में गड़बड़ियों को मार्क किया। इन मिसमैच की वजह से रिफंड जारी करने से पहले ज़्यादा डिटेल्ड रिव्यू किया गया। ऐसे मामलों में, टैक्सपेयर्स से अपने रिटर्न को रिवाइज़ या सही करने के लिए कहा गया। डिपार्टमेंट ने टारगेटेड कम्प्लायंस ड्राइव भी चलाए, जिससे टैक्सपेयर्स को अपनी मर्ज़ी से गलतियाँ ठीक करने के लिए बढ़ावा मिला। अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा कि रिफंड सिर्फ उन्हीं मामलों में रोके जा रहे हैं जिनमें आगे वेरिफिकेशन की जरूरत है, और कुल मिलाकर रिफंड प्रोसेसिंग सिस्टम में कोई रुकावट नहीं आई है।
रिफंड एक साल पहले के मुकाबले कम
अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस वित्त वर्ष में कम रिफंड की एक वजह टीडीएस के प्रावधानों में बदलाव है। सरकार के टीडीएस के प्रावधानों को लगातार तर्कसंगत बना रही है। इससे ज्यादा टीडीएस कटने के मामलों में कमी आई है। ज्यादा टीडीएस नहीं कटने से टैक्सपेयर्स को रिफंड को पोस्ट-फाइलिंग की जरूरत नहीं रह गई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स के इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करने से भी रिफंड में कमी आई है।