ट्रंप का बड़ा दांव: Kevin Warsh बनेंगे Fed के नए चेयरमैन, क्या बदल जाएगी ग्लोबल इकोनॉमी?

Federal Reserve Chairman: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के लिए केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम का नामांकन किया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉर्श के नाम का आधिकारिक ऐलान किया।  

Shivam Shukla
अपडेटेड5 Mar 2026, 06:54 AM IST
Kevin Warsh बनेंगे Fed के नए चेयरमैन
Kevin Warsh बनेंगे Fed के नए चेयरमैन

Federal Reserve Chairman: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व (Fed) के नए चेयरमैन की घोषणा की है। ट्रंप ने फेड के अगले अध्यक्ष के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम का आधिकारिक ऐलान किया। अगर अमेरिकी सीनेट से इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाती है, तो जेरोम पॉवेल (Jerome Powell) की जगह वॉर्श को फेडरल रिजर्व का चेयरमैन बना दिया जाएगा। बुधवार को व्हाइट हाउस ने साफ किया कि वॉर्श का नॉमिनेशन सीनेट को भेज दिया गया है। ट्रंप ने पिछले महीने वॉर्श को नया फेड चेयरमैन बनाने की इच्छा जताई, अब उनके नाम का आधिकारिक ऐलान भी कर दिया गया।

फेड चेयरमैन बनना इतना आसान भी नहीं

हालांकि, केविन वॉर्श (Kevin Warsh) भले ही राष्ट्रपति ट्रंप की पहली पसंद हों, लेकिन फेड रिजर्व (Federal Reserve) की कुर्सी तक पहुंचना इतना आसान नहीं है। नॉर्थ कैरोलिना के कद्दावर सीनेटर थॉम टिलिस ने इस नॉमिनेशन के विरोध में एक सख्त रुख अपनाया है। टिलिस का कहना है कि वे वॉर्श की पुष्टि तब तक रोक कर रखेंगे, जब तक कि वाशिंगटन डी.सी. का अमेरिकी अटॉर्नी ऑफिस जेरोम पॉवेल के खिलाफ चल रही संघीय आपराधिक जांच को बंद नहीं कर देता। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नेतृत्व को लेकर वाशिंगटन में काफी हलचल मची हुई है।

यह भी पढ़ें | इंटरनेशनल मार्केट में सोना-चांदी महंगा, जानिए ताजा भाव

केविन वॉर्श का फेड से है पुराना नाता

बता दें कि केविन वॉर्श को कोई नया नाम नहीं हैं। वे फेडरल रिजर्व के पुराने खिलाड़ी रहे हैं। साल 2006 से 2011 के बीच उन्होंने फेड के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में अपनी सेवाएं दी थीं। यह वही दौर था जब दुनिया 2008 के भीषण वित्तीय संकट से जूझ रही थी। राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश की तरफ से नियुक्त वॉर्श उस समय फेड के इतिहास के सबसे युवा गवर्नर्स में से एक थे। संकट के उस दौर में उन्होंने बाजार को स्थिरता देने के लिए कई आपातकालीन ऋण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की थी। उनकी दूरदर्शिता ने उस वक्त चरमराती वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभालने में अहम भूमिका निभाई थी।

यह भी पढ़ें | विदेश मंत्रालय ने बनाया स्पेशल कंट्रोल रूम, भारतीयों के लिए हेल्पलाइन जारी

वॉर्श की शिक्षा और करियर

केविन वॉर्श की शिक्षा और करियर बैकग्राउंड काफी मजबूत है। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है, जबकि हार्वर्ड से लॉ की डिग्री प्राप्त की है। उनके पेशेवर करियर की बात करें, तो मॉर्गन स्टेनली जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में उन्होंने बैंकिंग की बारिकियां सीखीं। वॉर्श ने जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल के दौरान आर्थिक नीति के लिए राष्ट्रपति के विशेष सहायक के रूप में भी काम किया है। इसके साथ ही उनका जुड़ाव प्रसिद्ध लॉडर कॉस्मेटिक्स परिवार से भी है। फिलहाल, वे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में एक प्रतिष्ठित फेलो के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं वॉर्श

एक्सपर्ट्स का कहना है कि वॉर्श का आना फेडरल रिजर्व की कार्यशैली में एक बड़े बदलाव का संकेत है। जहां जेरोम पॉवेल को सर्वसम्मति और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है, वहीं वॉर्श के आने से बैंक की पॉलिसीज में बड़ा बदलाव दिख सकता है। जानकारों के मुताबिक, वॉर्श महंगाई को लेकर अधिक सख्त रुख अपना सकते हैं और फेड के बैलेंस शीट विस्तार पर लगाम लगा सकते हैं। उनके साथ काम कर चुके स्टीफन मिरन ने कहा वॉर्श एक मौलिक विचारक हैं और मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर उनकी इंसाइट्स बेहद गहरी है।

यह भी पढ़ें | सोना-चांदी की कीमतों में उछाल के बीच गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में भारी गिरावट

ग्लोबल इकोनॉमी पर क्या पड़ेगा असर?

गौरतलब है कि फेडरल रिजर्व के फैसले केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहते हैं। जब फेड ब्याज दरों या महंगाई को लेकर सख्त कदम उठाता है, तो उसका सीधा असर डॉलर की मजबूती और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट पर पड़ता है। अगर वॉर्श महंगाई को कंट्रोल करने के लिए सख्त रुख अपनाते हैं, तो विकासशील देशों के बाजारों में कैपिटल का फ्लो प्रभावित हो सकती है। कर्ज की दरों में बदलाव और इंपोर्टेड सामानों की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होममनीट्रंप का बड़ा दांव: Kevin Warsh बनेंगे Fed के नए चेयरमैन, क्या बदल जाएगी ग्लोबल इकोनॉमी?
More