
Kisan Credit Card: खेती के बढ़ते खर्च के बीच किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) किसानों के लिए सबसे बड़ा वित्तीय सहारा बनकर उभरा है। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत किसानों को बिना किसी लंबी प्रक्रिया के लोन मुहैया कराती है। इस लोन के पैसों को किसान खेती से जुड़े कार्यों में लगा सकते हैं। खास बात यह है कि समय पर भुगतान करने वाले किसानों को ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलता है, जिससे प्रभावी ब्याज दर काफी कम हो जाती है। यही वजह है कि देश के करोड़ों किसान अपनी फसल की जरूरतों और कृषि निवेश के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे हैं।
बता दें कि किसानों की खेती-किसानी से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) देश की सबसे लोकप्रिय सरकारी योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत किसानों को एक कार्ड दिया जाता है, जो ATM की तरह काम करता है। बैंक की ओर से तय सीमा तक किसान कभी भी पैसे निकाल सकते हैं। ब्याज सिर्फ उतने ही पैसों पर लगेगा, जितते पैसे निकाले गए हैं।
दरअसल, खेती के लिए बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई और मशीनरी जैसी जरूरतों के लिए किसानों को अक्सर नकदी की आवश्यकता होती है। पहले उन्हें साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड ने इस समस्या को काफी हद तक कम कर दिया है। ऐसे में यह कार्ड किसानों के लिए किसी हीरा से कम नहीं है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब फसल का समय सभी के लिए एक जैसा तय कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, कम समय में तैयार होने वाली फसलों के लिए फसल सीजन 12 महीने और ज्यादा समय लेने वाली फसलों के लिए 18 महीने माना जाएगा। फसल सीजन का मतलब बीज बोने से लेकर फसल की कटाई और उसे मंडी या बाजार में बेचने तक का पूरा समय होता है। इस बदलाव से किसानों को लोन चुकाने के लिए तय समय मिलेगा, वहीं बैंकों के लिए भी लोन की वसूली करना आसान होगा।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत वर्ष 1998 में की गई थी। इसका मकसद किसानों को उनकी कृषि आवश्यकताओं के लिए आसान और जल्द ही लोन की सुविधा मुहैया कराना था। इस योजना के तहत किसान को एक क्रेडिट लिमिट दी जाती है, जिसके भीतर वह आवश्यकता अनुसार धनराशि निकाल सकते हैं। यह व्यवस्था बैंक खाते और ATM कार्ड की तरह काम करती है, जिससे किसानों को बार-बार लोन के लिए अप्लाई नहीं करना होता है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना को अब काफी ज्यादा फ्लेक्सिबल बना दिया गया है, ताकि ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके। इस स्कीम के तहत किसानों को बिना किसी लंबी कागजी कार्रवाई और गारंटी के बेहद कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है। अगर आप डेयरी फार्मिंग शुरू करना चाहते हैं, नई गाय या भैंस खरीदना चाहते हैं, उनके चारे का इंतजाम करना चाहते हैं। ऐसे तमाम काम के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
KCC की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम ब्याज दर है। सरकार की ब्याज सहायता योजना (Interest Subvention Scheme) के तहत सामान्य ब्याज दर लगभग 7 फीसदी रहती है। समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को 3 फीसदी तक अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है। इसके बाद प्रभावी ब्याज दर सिर्फ 4 फीसदी रह जाती है। यही कारण है कि किसान क्रेडिट कार्ड को देश की सबसे सस्ती ऋण योजनाओं में गिना जाता है।
इस योजना में अप्लाई करने के लिए वोटर आईडी, पैन कार्ड या आधार कार्ड की जरूरत होगी। ये डॉक्यूमेंट आपसे आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ के लिए मांगे जा सकते हैं।
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