
जो भी व्यक्ति हर महीने कुछ रकम निवेश करके भविष्य में एकमुश्त धनराशि पाना चाहता है, वह पहले से ही सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान की अवधारणा से परिचित होगा। लेकिन इसके अलावा और भी कुछ सिस्टेमैटिक तरीके हैं जो इसी उद्देश्य को पूरा करते हैं।
म्यूचुअल फंड के संदर्भ में तीन प्रमुख शब्द SIP, STP और SWP अक्सर निवेशकों को भ्रमित करते हैं कि इनमें से किसे चुना जाए। आइए इन तीनों को सरल भाषा में समझें और जानें कि कौन किसके लिए बेहतर है।
एसआईपी (Systematic Investment Plan) एक नियमित निवेश की रणनीति है जिसमें निवेशक हर महीने या तय समयांतराल पर एक निश्चित राशि निवेश करता है। यह तरीका निवेशकों को बाजार में धीरे-धीरे और अनुशासित तरीके से निवेश करने में मदद करता है।
एसआईपी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह रिस्क को कंट्रोल करने और रुपये की लागत औसत (Rupee Cost Averaging) करने में मदद करता है। यानी जब बाजार नीचे होता है, तो आपको ज़्यादा यूनिट्स मिलती हैं, और जब ऊपर होता है, तो कम यूनिट्स जिससे लंबे समय में औसत लागत संतुलित रहती है।
एसटीपी (Systematic Transfer Plan) एक ऐसा तरीका है जिसमें तय राशि को एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में नियमित रूप से ट्रांसफर किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप हर महीने ₹10,000 को Axis Liquid Fund से Axis Bluechip Fund में ट्रांसफर करते हैं, तो इसे एसटीपी कहा जाएगा।
अक्सर एसटीपी का उपयोग तब किया जाता है जब निवेशक अपनी राशि को Debt या Liquid Fund से Equity Fund में स्थानांतरित करना चाहता है। यह तरीका भी बाजार की अस्थिरता को कम करता है और निवेश की औसत लागत को संतुलित बनाता है।
एसडब्ल्यूपी (Systematic Withdrawal Plan) उन निवेशकों के लिए उपयोगी है जो अपनी निवेश राशि से नियमित आय प्राप्त करना चाहते हैं। कई लोग इसके लिए बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) या पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट का सहारा लेते हैं, लेकिन जब इन योजनाओं के ब्याज दरें घटती हैं तो भविष्य की आय को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
ऐसे में एसडब्ल्यूपी एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इस योजना में निवेशक अपने म्यूचुअल फंड निवेश से तय राशि को हर महीने, हर तिमाही या हर साल निकाल सकता है। निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार तारीख चुन सकता है, जिस दिन उसकी राशि बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। यह राशि निकालने की प्रक्रिया म्यूचुअल फंड की यूनिट्स को रिडीम करके की जाती है। जब तक स्कीम में यूनिट्स बची रहती हैं, निवेशक नियमित रूप से निकासी कर सकता है।
अब जबकि हमने तीनों को समझ लिया है, तो देखते हैं कि कौन-सी योजना किस प्रकार के निवेशक के लिए उपयुक्त है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करें और योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। बाजार की स्थितियां और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।)
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