
म्यूचुअल फंड की सरलता और PMS (Portfolio Management Services) का लचीलापन, अब तक ये दोनों अलग-अलग दुनिया थीं। लेकिन भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई SIF कैटेगरी ने इस खाई को पाटने की कोशिश की है। और कोटक महिंद्रा ऐसेट मैनेजमेंटने आज, 15 जून 2026 को, इसी कैटेगरी में अपना पहला फंड कोटक इन्फिनिटी हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड लॉन्च कर दिया है। यह न्यू फंड ऑफर (NFO) 29 जून तक खुला रहेगा। निवेशकों के लिए यह एक नया विकल्प है, लेकिन इसे समझना जरूरी है।
कोटक महिंद्रा एएमसी ने आज अपना पहला एसआईएफ सेबी की नई एसआईएफ कैटेगरी में पदार्पण है। यह फंड इक्विटी, आर्बिट्राज और डेरिवेटिव स्ट्रैटेजी का मिश्रण करेगा और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपनी इक्विटी एक्सपोजर को गतिशील रूप से बदलता रहेगा। पारंपरिक म्यूचुअल फंड जहां डेरिवेटिव का उपयोग केवल हेजिंग और पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के लिए कर सकते हैं, वहीं एसआईएफ कुल संपत्ति के 25% तक बिना हेज के शॉर्ट पोजीशन ले सकता है यानी गिरते बाजार से भी मुनाफा कमाने की संभावना रहती है।
एसआईएफ में PAN स्तर पर सभी स्ट्रैटिजीज को मिलाकर न्यूनतम 10 लाख रुपये का निवेश अनिवार्य है। यह इसे 500 रुपये के न्यूनतम निवेश से शुरू होने वाले पारंपरिक म्यूचुअल फंड और 50 लाख रुपये के न्यूनतम निवेश से शुरू होने वाले पीएमएस के बीच रखता है। साफ है कि यह फंड उन अनुभवी निवेशकों के लिए डिजाइन किया गया है जो म्यूचुअल फंड की सीमाओं से आगे जाना चाहते हैं, लेकिन पीएमएस की ऊंची न्यूनतम रकम तक नहीं पहुंच पाते।
कोटक महिंद्रा AMC के एमडी निलेश शाह का कहना है कि म्यूचुअल फंड ने लॉन्ग-वनली इन्वेस्टमेंट के जरिये बड़ी संपत्ति बनाई है। एसआईएफ इसी का अगला पड़ाव है जो लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रैटिजी के जरिये बाजार के उतार-चढ़ाव से और बेहतर तरीके से निपटने की क्षमता देता है। फंड मैनेजर कल्पेश जैन के अनुसार, इन्फिनिटी हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड इक्विटी, आर्बिट्राज और डेरिवेटिव रणनीतियों में निवेश करेगा और अस्थिर बाजार में गिरावट को सीमित रखने की कोशिश करेगा। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि निवेश उद्देश्यों की प्राप्ति की कोई गारंटी नहीं है।
एसआईएफ में म्यूचुअल फंड जैसी टैक्स व्यवस्था लागू होती है। इक्विटी पर एक साल बाद 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और फंड स्तर पर कोई टैक्स नहीं। यह कैटेगरी III एआईएफ से बेहतर है, जहां कैपिटल गेन्स और बिजनेस इनकम दोनों पर टैक्स लगता है। यह निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत है और एसआईएफ को टैक्स बचत के लिहाज से आकर्षक बनाता है।
कोटक का यह कदम एसआईएफ कैटेगरी को मुख्यधारा में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। सेबी ने अप्रैल 2025 में यह कैटेगरी शुरू की थी और अब बड़े एएमसी एक-एक कर इसमें उतर रहे हैं। निवेशकों को याद रखना चाहिए कि यह प्रॉडक्ट जटिल है और इसमें पूंजी डूबने का जोखिम भी है, इसलिए निवेश से पहले स्कीम से जुड़े सारे दस्तावेज, नियम और शर्तें जरूर पढ़ लें।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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