Insurance Tips: लाइफ इंश्योरेंस, बैंक खाते, एफडी, म्यूचुअल फंड, स्टॉक्स, इंश्योरेंस जैसे तमाम वित्तीय खातों के लिए नॉमिनी बनाना बहुत जरूरी है। जब किसी अकाउंटहोल्डर्स या पॉलिसीहोल्डर्स की मृत्यु होती है तो ऐसी स्थिति में उसके खाते में जमा पैसे, उसके द्वारा बनाए गए नॉमिनी को दिए जाते हैं। इंश्योरेंस पॉलिसी में कंपनी के रिकॉर्ड में नॉमिनी का नाम दर्ज न होने पर कई तरह की कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सता है। इससे क्लेम का पैसा जल्दी नहीं मिल पाता और लाइफ इंश्योरेंस का मकसद ही खत्म हो जाता है।
लाइफ इंश्योरेंस आपके परिवार की सबसे मुश्किल घड़ी में उनकी फाइनेंशियल सुरक्षा की गारंटी है। जब कोई पॉलिसीहोल्डर किसी नॉमिनी को नॉमिनेट करता है तो इससे इंश्यरेंस कंपनियों को साफ निर्देश रहता है कि मौत होने पर किसे पेमेंट करना है। इस क्लैरिटी से प्रोसेस में देरी कम होती है और दुख के समय परिवारों को बेवजह की परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।
नॉमिनी जोड़ने से परेशानी होगी खत्म
अगर लाइफ इंश्योरेंस स्कीम में आप नॉमिनी का नाम जोड़ देते हैं तो क्लेम सेटलमेंट प्रोसेस आसान हो जाता है। इससे किसी भी तरह का कानूनी अड़चने नहीं आती हैं। इससे परिवार को एक बड़ी राहत मिलती है। नॉमिनेशन सिर्फ़ सुविधाजनक नहीं है - यह एक कानूनी जरूरत भी है। इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के तहत हर जीवन बीमा पॉलिसी में एक नॉमिनी होना जरूरी है ताकि पॉलिसी के पैसे के बंटवारे में स्पष्टता बनी रहे।
नॉमिनी के लिए नियम हुए आसान
पिछले कुछ सालों में नॉमिनेशन को लेकर नियम ज्यादा आसान किए गए हैं। इसे ज्यादा पारदर्शी बनाया गया है। इसे पॉलिसीहोल्डर के हित में मजबूत किया गया है। इंश्योरेंस कानून (अमेंडमेंट) एक्ट, 2015 ने 'बेनिफिशियल नॉमिनी' का कॉन्सेप्ट पेश किया। अगर पति/पत्नी, बच्चे या माता-पिता जैसे करीबी परिवार के सदस्यों का नाम दिया जाता है, तो उनका दावा कानूनी वारिसों या दूसरे दावेदारों से पहले माना जाता है। इससे परिवार औरइंश्योरेंस कंपनियां दोनों को सुरक्षित रहते हैं। इसके साथ इंश्योरेंस कराने का मकसद भी पूरा होता है।
बदल सकते है नॉमिनी का नाम
जिंदगी में हमेशा बदलाव आता रहता है। नॉमिनी के नाम भी आप समय-समय पर बदल सकते हैं। अगर आप अविवाहित हैं और इंश्योरेंस पॉलिसी है तो शादी के बाद नॉमिनी का नाम बदल सकते हैं। लिहाजा समीक्षा करते रहें और नॉमिनेशन को अपडेट करते रहना चाहिए। शादी के बाद पॉलिसी होल्डर्स को अपने जीवनसाथी को ही नॉमिनी बनाना चाहिए। बच्चे होने के बाद नॉमिनेशन को जीवनसाथी और बच्चों के बीच सही तरह से बंटवारा कर सकते हैं। जब बच्चे वित्तीय रूप से अपने ऊपर निर्भर हो जाएं तो फिर से नॉमिनी में अपने जीवनसाथी का नाम लिख सकते हैं। अगर आप शादी के बाद नॉमिनी में बदलाव नहीं करते हैं तो कानूनी अड़चने आ सकती हैं।